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ठगी गिरोह की दो महिला आरोपी गिरफ्तार
ठगी गिरोह की दो महिला आरोपी गिरफ्तार
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45 करोड़ के निवेश और ब्लैक मनी को नोट में बदलने के नाम पर 1.13 करोड़ की ठगी, अंतरराज्यीय गिरोह की दो महिलाएं गिरफ्तार

रायपुर पुलिस ने 45 करोड़ रुपये के निवेश और केमिकल से ब्लैक मनी को असली नोट में बदलने का झांसा देकर ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का खुलासा किया है। पुलिस ने नागपुर से दो महिला आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो पिछले 15 साल से इस तरह की जालसाजी में सक्रिय थीं।

अप्पू धीवर |  कीर्तिमान न्यूज
प्रकाशित: 05 Aug 2026, 08:20 AM · अपडेट: 24 Oct 2026, 10:12 PM
रायपुर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में पुलिस ने एक ऐसे अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है जो 45 करोड़ रुपये के बड़े निवेश का झांसा देकर और कथित 'ब्लैक मनी' को केमिकल से असली नोट बनाने का दांव खेलकर करोड़ों की चपत लगाता था। रायपुर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए इस ठगी नेटवर्क से जुड़ी दो मुख्य महिला आरोपियों को नागपुर से दबोच लिया है। पकड़ी गई महिलाओं की पहचान कनिज फातमा उर्फ भावना पांडेय (निवासी कोलकाता) और दीपिका पालीवाल (निवासी उदयपुर, राजस्थान) के रूप में हुई है। 

कई शहरों में दे चुके है वारदातों को अंजाम 

पुलिस जांच में यह चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है कि दोनों पिछले 15 सालों से इस जालसाजी के खेल में सक्रिय हैं। यह गिरोह नागपुर, लखनऊ समेत देश के कई बड़े शहरों में इसी तरह की वारदातों को अंजाम दे चुका है। मामले का खुलासा तब हुआ जब बालोद जिले के बोरिदकला गांव निवासी और 'सालिक ग्रीन रिन्यूएबल एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड' के डायरेक्टर उमेश कुमार सिन्हा ने तेलीबांधा थाने में शिकायत दर्ज कराई। पीड़ित बिजनेसमैन को अपनी कंपनी के विस्तार और नए प्लांट के लिए लगभग 45 करोड़ रुपये की फंडिंग की जरूरत थी। 

विदेशी निवेशकों से फंड दिलाने का दिया भरोसा 

इसी दौरान उनकी मुलाकात राकेश कौशिक के जरिए दीपक सिंह, अभिषेक सिंह और योगी नाम के व्यक्तियों से हुई। आरोपियों ने खुद को बड़े-बड़े अधिकारियों और विदेशी निवेशकों का नजदीकी बताकर आसानी से फंड दिलाने का भरोसा दिया। पीड़ित का भरोसा जीतने के लिए जालसाजों ने उन्हें चेन्नई और नागपुर बुलाया। वहां फाइल प्रोसेसिंग, विदेशी स्वीकृति और हाई-पावर केमिकल का नाटक रचा गया। 

क्लीयरेंस के नाम पर पैसों की मांग 

ठगों ने पीड़ित के सामने एक डेमो दिया, जिसमें उन्होंने दावा किया कि खास केमिकल की मदद से काले रंग से ढके कागज या नोट असली भारतीय मुद्रा में बदल जाते हैं। वास्तव में, इस ट्रिक में पहले से छिपाकर रखे गए असली नोटों का इस्तेमाल किया गया था, जिससे बिजनेसमैन पूरी तरह झांसे में आ गया। भरोसा जीतने के बाद ठगों ने कभी विदेशी केमिकल के आयात तो कभी वरिष्ठ अधिकारियों की क्लीयरेंस के नाम पर पैसे मांगना शुरू कर दिया। 

लंब समय बीतने के बाद हुआ ठगी का अहसास 

फंड जल्द रिलीज होने का लालच देकर अलग-अलग किश्तों में बिजनेसमैन से कुल 1 करोड़ 13 लाख रुपये वसूल लिए गए। जब लंबा समय बीतने के बाद भी न तो निवेश का पैसा आया और न ही दिए गए रुपये वापस मिले, तब पीड़ित को ठगी का अहसास हुआ और उसने पुलिस की शरण ली। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस उपायुक्त (क्राइम एवं साइबर) स्मृतिक राजनाला और पुलिस उपायुक्त (मध्य) तारकेश्वर पटेल के मार्गदर्शन में एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट तथा तेलीबांधा थाना पुलिस की संयुक्त टीम गठित की गई। 

खंगाल रहे आरोपियों के पुराने रिकार्ड 

पुलिस ने बैंक अकाउंट्स, मोबाइल लोकेशन और डिजिटल ट्रांजैक्शन की कड़ियों को जोड़ा। जांच का दायरा जैसे ही नागपुर पहुंचा, पुलिस टीम ने वहां डेरा डाला और सटीक घेराबंदी करके कनिज फातमा और दीपिका पालीवाल को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में पता चला कि यह नेटवर्क देश के अलग-अलग राज्यों में फैला हुआ है। रायपुर पुलिस अब उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र समेत अन्य राज्यों की पुलिस से संपर्क साधकर आरोपियों का पुराना क्राइम रिकॉर्ड खंगाल रही है।

गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से:

  • 3 मोबाइल फोन

  • 26,000 रुपये नकद

  • एटीएम कार्ड व पहचान पत्र (कुल जुमला कीमती लगभग 70,000 रुपये) जब्त किए हैं।

बाकी फरार सदस्यों की तलाश जारी 

फिलहाल तेलीबांधा थाने में अपराध क्रमांक 330/2026 के तहत बीएनएस की धारा 318(4) और 61(2) के तहत केस दर्ज कर लिया गया है। पुलिस का कहना है कि गिरोह के बाकी फरार सदस्यों की तलाश जारी है और जल्द ही इस नेटवर्क से जुड़े कुछ और बड़े चेहरों का खुलासा हो सकता है।
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