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Ganesh Idol Making  ( Image Source - Keertiman Media)
Ganesh Idol Making ( Image Source - Keertiman Media)
रायपुर संभाग

Ganesh Idol Making : गणेश प्रतिमाओं को फाइनल टच, रंगों से जीवंत हो रहे बप्पा

Ganesh Idol Making: लखौली के मूर्तिकार नारायण धीवर गणेश चतुर्थी से पहले 55 गणेश प्रतिमाओं को अंतिम रूप दे रहे हैं। 40 वर्षों से मूर्ति निर्माण कर रहे नारायण 5 हजार से 40 हजार रुपए तक की प्रतिमाएं तैयार कर रहे हैं।

अप्पू धीवर |  कीर्तिमान न्यूज
प्रकाशित: 13 Sep 2026, 02:03 PM · अपडेट: 30 Oct 2026, 03:34 AM
आरंग
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
Ganesh Idol Making: गणेश चतुर्थी के त्योहार को लेकर पूरे क्षेत्र में उत्साह का माहौल है। पर्व से ठीक पहले मूर्तिकारों के कार्यशालाओं में युद्धस्तर पर काम चल रहा है। महीनों से मिट्टी को आकार दे रहे कलाकार अब बप्पा की प्रतिमाओं के रंग-रोगन, साज-सज्जा और चेहरे की बारीकियों को चमकाने में दिन-रात एक किए हुए हैं। रंगों की छटा बिखरते ही भगवान गणेश का स्वरूप और अधिक मनोहारी और जीवंत नजर आने लगा है।

चार दशकों का अनुभव और कला के प्रति समर्पण 

लखौली क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम नारा के निवासी नारायण धीवर पिछले 40 वर्षों से देवी-देवताओं की मूर्तियां गढ़ रहे हैं। इस साल उन्हें छोटी-बड़ी मिलाकर करीब 55 गणेश प्रतिमाओं के ऑर्डर मिले हैं। चतुर्थी की तारीख करीब आते ही उनके ठिकाने पर दिन-रात काम चल रहा है। नारायण के लिए मूर्ति कला सिर्फ कमाई का साधन नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति और पारिवारिक परंपरा का हिस्सा है, जिसे वे दशकों से सहेजते आ रहे हैं। 

5 हजार से लेकर 40 हजार तक की प्रतिमाएं तैयार 

श्रद्धालुओं और गणेशोत्सव समितियों की पसंद और बजट को ध्यान में रखते हुए इस बार अलग-अलग डिजाइन और आकार की मूर्तियां बनाई गई हैं। कार्यशाला में सबसे छोटी मूर्ति की कीमत लगभग 5,000 रूपए है, जबकि भव्य और विशेष सजावट वाली बड़ी प्रतिमाओं का दाम 40,000 रूपए तक रखा गया है। समितियों की मांग के अनुसार मूर्तियों के मुकुट, वस्त्र और आभूषणों में भी विविधता देखने को मिल रही है।

पूरा परिवार और कारीगर जुटे मेहनत में 

इतनी बड़ी संख्या में प्रतिमाएं तैयार करना अकेले किसी के बस की बात नहीं है। नारायण धीवर के साथ उनकी पत्नी, बेटा और करीब एक दर्जन से अधिक स्थानीय कारीगर भी इस काम में हाथ बंटा रहे हैं। कार्यशाला में काम का बंटवारा बेहद सलीके से किया गया है—कोई मूर्तियों का ढांचा संभाल रहा है, कोई रंग भर रहा है, तो कोई आभूषण व मुकुट सेट कर रहा है। सबसे ज्यादा ध्यान बप्पा के चेहरे के भाव और आंखों की नक्काशी पर दिया जा रहा है, जो मूर्ति में प्राण फूंकने का काम करती है। 

स्थापना के लिए पंडाल और घर तैयार 

गणेश चतुर्थी पर बप्पा को अपने घर और पंडालों में विराजमान करने के लिए समितियों और श्रद्धालुओं ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। मूर्तियों की बुकिंग पूरी हो चुकी है और उन्हें ले जाने का सिलसिला शुरू होने वाला है। मूर्तिकारों की महीनों की कड़ी मेहनत अब श्रद्धालुओं के आंगनों और पूजा पंडालों की शोभा बढ़ाने के लिए पूरी तरह तैयार है।
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