IGKV Raipur Hostel Crisis: इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV) में छात्रों की सुरक्षा और हॉस्टल सुविधा को लेकर सवाल उठने लगे हैं। विश्वविद्यालय परिसर के कई पुराने हॉस्टल जर्जर हालत में पहुंच चुके हैं, जहां से आए दिन प्लास्टर और छज्जे गिरने की घटनाएं सामने आ रही हैं। वहीं, हॉस्टल सीटों की कमी के कारण बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को मजबूरी में कैंपस के बाहर रहना पड़ रहा है। IGKV परिसर में बने कई हॉस्टल 30 से 60 साल पुराने हो चुके हैं और अब उनकी स्थिति खराब होती जा रही है।
करीब दो महीने पहले शिवम, सत्यम और मंदाकिनी हॉस्टल में छत का प्लास्टर और छज्जे गिरने की घटनाएं सामने आई थीं। इनमें एक छात्र घायल भी हुआ था। बताया जा रहा है कि साल 1960 में बना सत्यम हॉस्टल सहित कई अन्य भवन अब काफी पुराने हो चुके हैं। हादसों के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने जांच कराकर मरम्मत कराने की बात कही थी, लेकिन छात्रों का आरोप है कि अभी तक स्थिति में कोई बड़ा सुधार नजर नहीं आया है।
छुट्टियों में भी पूरा नहीं हो सका मरम्मत का काम
छात्रों का कहना है कि परीक्षा के बाद मिली छुट्टियां मरम्मत कार्य के लिए बेहतर समय था, लेकिन इस दौरान भी जरूरी सुधार नहीं किए गए। इसके चलते पुराने भवनों में रहने वाले विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है। विश्वविद्यालय में भवनों के रखरखाव के लिए अलग व्यवस्था मौजूद है। जानकारी के अनुसार, नियमित अमले में दो इंजीनियर, दो लिपिक और एक केयरटेकर तैनात हैं। छोटे और जरूरी मरम्मत कार्यों के लिए करीब 50 लाख रुपए तक खर्च करने की व्यवस्था भी है, जिसकी मंजूरी स्टूडेंट वेलफेयर सोसाइटी देती है। इसके बावजूद समय पर मरम्मत नहीं होने से छात्रों में नाराजगी है। विद्यार्थियों का कहना है कि पर्याप्त संसाधन होने के बाद भी हॉस्टलों की स्थिति सुधारने में देरी हो रही है।
2000 छात्रों के लिए सिर्फ 1400 हॉस्टल सीटें
हॉस्टल की सबसे बड़ी समस्या क्षमता की कमी भी है। कृषि महाविद्यालय में यूजी, पीजी और पीएचडी मिलाकर करीब 2000 विद्यार्थियों के लिए पढ़ाई की व्यवस्था है। वहीं, विश्वविद्यालय परिसर में कुल 14 हॉस्टल हैं। इनमें छह गर्ल्स हॉस्टल में करीब 650 सीटें और आठ बॉयज हॉस्टल में करीब 750 सीटें उपलब्ध हैं। यानी कुल मिलाकर लगभग 1400 छात्रों के रहने की ही सुविधा है। ऐसे में करीब 600 विद्यार्थियों यानी लगभग 30 प्रतिशत छात्रों को हॉस्टल नहीं मिल पाता। उन्हें मजबूरी में रायपुर शहर में पीजी या किराए के कमरों में रहना पड़ता है। इससे छात्रों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ रहा है और पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है।प्रशासन ने जांच और मरम्मत का दिया भरोसा
विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि हॉस्टलों की सुरक्षा को लेकर सभी भवनों की जांच कराई जा चुकी है। जिन हॉस्टलों में प्लास्टर गिरने या अन्य समस्याओं की शिकायत मिली है, वहां प्राथमिकता के आधार पर मरम्मत कार्य कराया जा रहा है। IGKV कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने कहा कि छात्रों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और हॉस्टलों की स्थिति सुधारने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
