Ganesh Utsav Jashpur: जशपुर में आस्था और प्रकृति का संगम, हाथियों की याद में सजता है गणेश दरबार
Ganesh Utsav Jashpur: छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के ग्राम शेखरपुर में ‘गज श्रद्धा’ की अनोखी परंपरा वर्षों से चली आ रही है। ग्रामीण जंगली हाथियों की स्मृति को भगवान गणेश से जोड़कर गणेश उत्सव मनाते हैं। यह पहल आस्था के साथ वन्यजीव संरक्षण और मानव-हाथी सह-अस्तित्व का प्रेरक संदेश दे रही है।
Ganesh Utsav Jashpur: छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में प्रकृति, आस्था और वन्यजीवों के प्रति संवेदनशीलता की अनूठी परंपरा देखने को मिल रही है। पत्थलगांव वन परिक्षेत्र के ग्राम शेखरपुर में ग्रामीण पिछले कई वर्षों से जंगली हाथियों की स्मृति को भगवान गणेश के प्रति अपनी आस्था से जोड़कर गणेश उत्सव मनाते आ रहे हैं। ग्रामीणों की यह ‘गज श्रद्धा’ मानव और वन्यजीवों के बीच सह-अस्तित्व का प्रेरणादायी संदेश दे रही है।
इस परंपरा की शुरुआत वर्ष 2009 की एक घटना से हुई। ग्राम शेखरपुर में विद्युत करंट की चपेट में आने से दो जंगली हाथियों की मृत्यु हो गई थी। ग्रामीणों ने हाथियों को भगवान गणेश का प्रतीक मानते हुए हिन्दू रीति-रिवाज के अनुसार उनका अंतिम संस्कार किया और उसी स्थान पर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित की। इसके बाद से प्रतिवर्ष गणेश चतुर्थी के अवसर पर ग्रामीण यहां श्रद्धा और उल्लास के साथ गणेश उत्सव का आयोजन करते हैं।
जशपुर में ‘गज श्रद्धा’, हाथियों की याद में मनता है गणेश उत्सवआस्था के साथ वन्यजीव संरक्षण का संदेश
इस वर्ष भी वन्यजीव संरक्षण और मानव-हाथी सह-अस्तित्व के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से 22 सितम्बर को वन परिक्षेत्र पत्थलगांव द्वारा ग्राम शेखरपुर में ‘गजरथ’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने सहभागिता की। वन विभाग के अधिकारियों एवं मैदानी अमले ने ग्रामीणों को जंगली हाथियों के व्यवहार, उनके प्राकृतिक आवास के महत्व, हाथियों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने तथा मानव-हाथी द्वंद्व को कम करने के लिए आवश्यक सावधानियों की जानकारी दी। कार्यक्रम के माध्यम से वन्यजीवों के प्रति संवेदनशीलता और उनके साथ सुरक्षित सह-अस्तित्व का संदेश दिया गया। गणेश प्रतिमा विसर्जन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
प्रकृति और संस्कृति के समन्वय की प्रेरक पहल
वन विभाग ने ग्राम शेखरपुर के ग्रामीणों की भावना एवं वर्षों से चली आ रही इस परंपरा की सराहना की है। विभाग ने कहा कि शेखरपुर की ‘गज श्रद्धा’ केवल धार्मिक आस्था की अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि प्रकृति और वन्यजीवों के प्रति ग्रामीण समाज की संवेदनशीलता का भी उदाहरण है। जशपुर जैसे वन एवं हाथी प्रभावित क्षेत्र में यह परंपरा वन्यजीव संरक्षण के साथ मानव-हाथी सह-अस्तित्व का सकारात्मक संदेश देती है। ग्रामीणों की सहभागिता और वन विभाग के जागरूकता प्रयास मिलकर यह संदेश दे रहे हैं कि वन्यजीवों के संरक्षण के साथ आवश्यक सावधानी और संवेदनशीलता अपनाकर सुरक्षित सह-अस्तित्व की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है।