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गंगा दसहरा में पवित्र स्नान
गंगा दसहरा में पवित्र स्नान
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गंगा दशहरा :  आस्था का संगम, सरयू से गंगा घाटों में भीड़

गंगा दशहरा के अवसर पर देशभर के प्रमुख गंगा घाटों और अयोध्या की सरयू नदी में श्रद्धालुओं का भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा। वाराणसी, हरिद्वार, प्रयागराज, ऋषिकेश और पटना सहित कई धार्मिक स्थलों पर लोगों ने पवित्र स्नान कर मां गंगा की पूजा-अर्चना की। हिंदू मान्यताओं के अनुसार ज्येष्ठ शुक्ल दशमी को मनाया जाने वाला यह पर्व मां गंगा के पृथ्वी पर अवतरण दिवस के रूप में माना जाता है। इस दिन स्नान, दान और पूजा करने से पापों से मुक्ति और पुण्य की प्राप्ति होने की मान्यता है। घाटों पर विशेष सुरक्षा व्यवस्था की गई थी, वहीं कई संगठनों ने गंगा स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया।

प्रकाशित: 28 May 2026, 01:54 PM · अपडेट: 11 Sep 2026, 12:55 PM
अयोध्या
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
देशभर में गंगा दशहरा का पर्व श्रद्धा, भक्ति और आस्था के साथ मनाया गया। इस अवसर पर अयोध्या की पवित्र सरयू नदी, वाराणसी, प्रयागराज, हरिद्वार, ऋषिकेश, कानपुर, पटना और गढ़मुक्तेश्वर सहित देश के प्रमुख गंगा घाटों पर लाखों श्रद्धालुओं ने स्नान कर मां गंगा की पूजा-अर्चना की। सुबह ब्रह्म मुहूर्त से ही घाटों पर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गंगा दशहरा के दिन गंगा स्नान, दान और पूजा करने से व्यक्ति के पापों का नाश होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। कई श्रद्धालु दूर-दूर से केवल इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने के लिए पहुंचे। घाटों पर “हर-हर गंगे” और “गंगा मैया की जय” के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।

गंगा दशहरा

गंगा दशहरा हिंदू पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इसी दिन मां गंगा स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं। इस वर्ष यह पर्व 28 मई 2026 को मनाया गया। पुराणों के अनुसार राजा भगीरथ ने अपने पूर्वजों की आत्मा की मुक्ति के लिए वर्षों तक कठोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर मां गंगा पृथ्वी पर उतरने के लिए तैयार हुईं। लेकिन गंगा के तेज प्रवाह को संभालना पृथ्वी के लिए संभव नहीं था। तब भगवान शिव ने गंगा को अपनी जटाओं में धारण किया और फिर धीरे-धीरे पृथ्वी पर प्रवाहित किया। इसी कारण गंगा दशहरा को “गंगा अवतरण दिवस” भी कहा जाता है और यह पर्व सनातन परंपरा में अत्यंत पवित्र माना जाता है।

बहोत खास है यह पर्व

सनातन धर्म में गंगा दशहरा का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। “दशहरा” शब्द का अर्थ है दस प्रकार के पापों का नाश। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन गंगा स्नान करने, मां गंगा की पूजा करने और दान-पुण्य करने से व्यक्ति के दस प्रकार के पाप समाप्त हो जाते हैं। धार्मिक विद्वानों के अनुसार इस दिन गंगा जल का स्पर्श भी अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। कई श्रद्धालु गंगा जल घर लाकर पूरे वर्ष पूजा और धार्मिक कार्यों में उसका उपयोग करते हैं।

अयोध्या की सरयू में भारी भीड़

भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या में गंगा दशहरा के अवसर पर सरयू घाटों पर श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। राम की पैड़ी, नया घाट और गुप्तार घाट पर सुबह से ही हजारों श्रद्धालु स्नान के लिए पहुंचे।लोगों ने सरयू स्नान कर दीपदान किया और मंदिरों में पूजा-अर्चना की। कई श्रद्धालुओं ने संतों और जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र और जल का दान भी किया। अयोध्या प्रशासन ने घाटों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। पुलिस, जल पुलिस और गोताखोरों की टीमें तैनात रहीं, जबकि नगर निगम की टीमों ने साफ-सफाई की व्यवस्था संभाली।

हरिद्वार और वाराणसी में दिव्य नजारा

हरिद्वार के हर की पैड़ी और वाराणसी के दशाश्वमेध घाट पर गंगा दशहरा के अवसर पर विशेष धार्मिक आयोजन किए गए। शाम के समय हुई भव्य गंगा आरती ने श्रद्धालुओं को भावुक कर दिया। सैकड़ों दीपों से जगमगाते घाटों का दृश्य बेहद आकर्षक दिखाई दिया। श्रद्धालुओं ने गंगा में दीप प्रवाहित कर परिवार की सुख-समृद्धि और शांति की कामना की। प्रयागराज के संगम तट पर भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने स्नान किया। कई संत-महात्माओं ने गंगा के महत्व पर प्रवचन दिए।

कैसे मनाये गंगा दशहरा

गंगा दशहरा के दिन लोग सुबह जल्दी उठकर पवित्र नदी में स्नान करते हैं। इसके बाद मां गंगा की पूजा, आरती और मंत्र जाप किया जाता है।कई श्रद्धालु इस दिन उपवास भी रखते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार तिल, जल, वस्त्र, फल, छाता, पंखा और अन्न का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। कुछ लोग घरों में भी गंगा जल से पूजा कर गंगा स्तोत्र और गंगा चालीसा का पाठ करते हैं। मंदिरों में विशेष भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

गंगा स्नान और दान का महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गंगा स्नान केवल शरीर की शुद्धि नहीं बल्कि आत्मा की शुद्धि का भी प्रतीक माना जाता है। कहा जाता है कि मां गंगा के पवित्र जल में स्नान करने से मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। गंगा दशहरा पर दान का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इस दिन गरीबों और जरूरतमंदों को अन्न, जल, फल, वस्त्र और धन दान करने से कई गुना पुण्य फल मिलता है।

आस्था और संस्कृति का संगम

गंगा दशहरा केवल धार्मिक पर्व नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपरा और आस्था का जीवंत प्रतीक माना जाता है। हर साल इस दिन देशभर से लाखों श्रद्धालु गंगा और अन्य पवित्र नदियों के घाटों पर पहुंचते हैं और आध्यात्मिक शांति की अनुभूति करते हैं। यह पर्व त्याग, दान, सेवा, स्वच्छता और आध्यात्मिक चेतना का संदेश देता है। इसी वजह से गंगा दशहरा को सनातन धर्म के सबसे पवित्र पर्वों में शामिल किया जाता है।
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