Gond Samaj Dispute: अखिल भारतीय गोंड समाज 18 गढ़ की रानी महल पिथौरा और सरायपाली (बसना) महासभा के बीच चल रहे विवाद को सुलझाने के लिए संयुक्त बैठक कराने की मांग की गई है। इस संबंध में प्रशासन को आवेदन सौंपकर सामाजिक मतभेद दूर करने, सदस्यों पर लगाए गए प्रतिबंध हटाने और समाज के संविधान से जुड़े विवादों पर कार्रवाई करने की मांग उठाई गई है।
2024 में अलग हुई थीं दोनों महासभाएं
आवेदन के मुताबिक, वर्ष 2024 में रानी महल पिथौरा और सरायपाली (बसना) महासभा अलग-अलग हो गई थीं। रानी महल पिथौरा महासभा की केंद्रीय अध्यक्ष बसंता ठाकुर हैं, जबकि सरायपाली (बसना) महासभा के अध्यक्ष देवेंद्रबहादुर सिंह हैं। दोनों पक्षों के बीच रीति-नीति और सामाजिक व्यवस्था को लेकर मतभेद होने की बात कही गई है।
आवेदनकर्ताओं ने बताया कि 4 जुलाई को जनपद पंचायत बागबाहरा और 10 जुलाई 2026 को कलेक्टर कार्यालय महासमुंद में दोनों महासभाओं की संयुक्त बैठक बुलाई गई थी। उनके अनुसार, देवेंद्रबहादुर सिंह के उपस्थित नहीं होने से बातचीत किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। इसके बाद भी बैठक की नई तारीख की जानकारी नहीं मिलने का दावा करते हुए प्रशासन से जल्द पहल करने की मांग की गई है।
ऑडियो रिकॉर्डिंग मामले में कार्रवाई की मांग
आवेदन में ग्राम पंडरीखार निवासी मुंशीराम ठाकुर के खिलाफ समाज के पदाधिकारियों को कथित तौर पर जान से मारने की साजिश से जुड़ी ऑडियो रिकॉर्डिंग की जांच कराने की मांग की गई है। आवेदनकर्ताओं के अनुसार, उन्होंने 23 अप्रैल 2026 को पुलिस अधीक्षक महासमुंद को शिकायत दी थी, जिसके बाद जांच एसडीओपी बागबाहरा को सौंपी गई।आवेदनकर्ताओं का कहना है कि उनका बयान दर्ज हो चुका है, लेकिन संबंधित व्यक्ति का बयान अब तक नहीं लिया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि 19 जुलाई को थाना तेंदूकोना में एक और शिकायत की गई थी। अब वे मामले की जांच पूरी कर नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग कर रहे हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और पुलिस का पक्ष सामने आना बाकी है।
समाज के सदस्यों पर लगे प्रतिबंध हटाने की मांग
आवेदन में भोथा, पतोराबांध, बसना, गढ़फूलझर और कसहीबाहरा में वर्ष 2024 और 2025 के दौरान कुछ सामाजिक पदाधिकारियों एवं सदस्यों पर लगाए गए प्रतिबंधों का भी उल्लेख है। आवेदनकर्ताओं ने इन प्रतिबंधों को गलत बताते हुए हटाने की मांग की है।
संविधान और पदों को लेकर भी विवाद
आवेदनकर्ताओं ने समाज के संविधान में वर्ष 2021-22 के दौरान किए गए कथित बदलावों पर आपत्ति जताई है। उन्होंने यज्ञराम सिदार और मनोहर ठाकुर को पद से हटाने की मांग की है। इसके अलावा, घासीराम मांझी पर पहले समाप्त किए जा चुके कार्यकारी अध्यक्ष पद को दोबारा बनाकर स्वयं उस पर नियुक्त होने का आरोप लगाया गया है। आवेदनकर्ताओं का कहना है कि इस मुद्दे ने समाज के विभाजन को बढ़ाया। उन्होंने संबंधित पदाधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।प्रशासन के फैसले का इंतजार
आवेदन के जरिए दोनों महासभाओं के बीच बातचीत कराने, सामाजिक प्रतिबंधों से जुड़े विवाद सुलझाने और पुलिस जांच में कार्रवाई की मांग की गई है। अब प्रशासन और पुलिस की प्रतिक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा कि इन मामलों में आगे क्या कदम उठाए जाते हैं। संबंधित व्यक्तियों और दूसरे पक्ष का जवाब सामने आना भी बाकी है।







