जिले से एक बेहद दर्दनाक खबर सामने आई है, जहां विकास और वन्यजीवों के बीच के संघर्ष ने एक और बेकसूर जान ले ली। घरघोड़ा वन परिक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले चारमार गांव में कोयला परिवहन के लिए इस्तेमाल होने वाली रेल लाइन पर यह भीषण हादसा हुआ। देर रात जब एक तेज रफ्तार मालगाड़ी इस ट्रैक से गुजर रही थी, तभी हाथियों का एक दल रेलवे लाइन पार कर रहा था। इसी दौरान लगभग 45 वर्षीय एक भारी-भरकम जंगली मादा हथिनी ट्रेन की सीधी चपेट में आ गई।
ट्रेन की टक्कर इतनी जोरदार थी कि मादा हथिनी के पैर और शरीर के निचले हिस्से में बेहद गंभीर व गहरे जख्म हो गए। टक्कर के बाद हथिनी ट्रैक के पास गिरकर दर्द से बुरी तरह कराहने लगी।
हाथियों के कड़े पहरे के कारण रेस्क्यू में आई भारी रुकावट
घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम और वन्यजीव रेस्क्यू एक्सपर्ट्स की टीम एंबुलेंस और जरूरी साजो-सामान के साथ मौके पर पहुंच गई। लेकिन घायल हथिनी के चारों तरफ हाथियों का एक बड़ा और आक्रामक झुंड डटा हुआ था। अपने साथी की सुरक्षा को लेकर संवेदनशील हाथी किसी को भी पास नहीं आने दे रहे थे। हाथियों के कड़े पहरे और भारी आक्रोश के कारण रेस्क्यू टीम को हथिनी तक पहुंचने और इलाज शुरू करने में घंटों कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।
इलाज मिलने से पहले ही तोड़ा दम
वन विभाग की कार्यप्रणाली पर फिर उठे गंभीर सवाल
इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर एलीफेंट कॉरिडोर (हाथी गलियारों) में ट्रेनों की रफ्तार और वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय ग्रामीणों और पर्यावरणविदों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि संवेदनशील वन क्षेत्रों और कोयला रूटों पर ट्रेनों की गति को नियंत्रित क्यों नहीं किया जा रहा है, जिसके कारण आए दिन इन बेजुबान हाथियों को अपनी जान गंवानी पड़ रही है।
