Haldwani Purification Controversy: उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की जनसभा के बाद मैदान का कथित ‘शुद्धिकरण’ कराने का विवाद अब कानूनी रूप ले चुका है। इस मामले में बेंगलुरु की विधान सौधा पुलिस ने उत्तराखंड भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट और पार्टी के अन्य नेताओं व कार्यकर्ताओं के खिलाफ जीरो FIR दर्ज कर ली है। यह पूरी कार्रवाई टी.आर. रामप्पा नाम के व्यक्ति द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर हुई है।
जनसभा के बाद मैदान पर धार्मिक अनुष्ठान
पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कानूनी सलाह ली और 4 सितंबर को औपचारिक रूप से मामला दर्ज कर लिया। घटना की शुरुआत अगस्त महीने में हुई थी। 8 अगस्त को हल्द्वानी के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने एक विशाल जनसभा को संबोधित किया था। आरोप है कि इसके दो दिन बाद, यानी 10 अगस्त को बीजेपी से जुड़े कुछ लोगों ने उसी मैदान पर एक धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किया और कथित तौर पर जगह का ‘शुद्धिकरण’ किया।
शिकायत में जातिगत भेदभाव का मामला बताया
शिकायतकर्ता का कहना है कि मल्लिकार्जुन खड़गे अनुसूचित जाति (SC) समुदाय से आते हैं। बीजेपी नेताओं द्वारा रैली के बाद मैदान को गंगाजल या अनुष्ठान से धोना यह संदेश देने की कोशिश थी कि दलित नेता की मौजूदगी से वह स्थान 'अपवित्र' हो गया था। शिकायत में इसे सीधे तौर पर छुआछूत और जातिगत भेदभाव का मामला बताया गया है। विधान सौधा थाना पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं के साथ-साथ अत्यंत सख्त 'अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम' (SC/ST Act) और 'नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम' की संबंधित धाराओं के तहत मामला कायम किया है।
बेंगलुरू में जीरो FIR दर्ज
उत्तराखंड बीजेपी अध्यक्ष महेंद्र भट्ट का नाम FIR में इसलिए शामिल किया गया है क्योंकि आरोप है कि उन्होंने मीडिया में आकर इस कथित शुद्धिकरण कार्यक्रम का खुलकर बचाव किया था। चूंकि घटना उत्तराखंड की है और मामला बेंगलुरु में दर्ज हुआ, इसलिए इसे 'जीरो FIR' के तहत दर्ज कर संबंधित क्षेत्राधिकार वाले पुलिस स्टेशन को ट्रांसफर किया जा रहा है। इस घटनाक्रम के बाद से ही कांग्रेस, बीजेपी पर आक्रामक रुख अपनाए हुए है।मैदान में हुआ आयोजन एक सामान्य धार्मिक अनुष्ठान
विवाद बढ़ता देख कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे ने खुद बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा को एक खत लिखा था। उन्होंने पत्र में इस पूरे घटनाक्रम पर कड़ा एतराज जताते हुए सवाल उठाया था कि घटना के इतने दिन बीत जाने के बाद भी उत्तराखंड पुलिस ने मामला दर्ज क्यों नहीं किया। दूसरी तरफ, भारतीय जनता पार्टी और उत्तराखंड सरकार ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। बीजेपी नेताओं का तर्क है कि मैदान में हुआ आयोजन एक सामान्य धार्मिक अनुष्ठान था, जिसे कांग्रेस जबरन जातिगत रंग देकर राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश कर रही है।

