High Court News: अंबिकापुर के राजमाता देवेंद्र कुमारी सिंहदेव शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय में तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के 448 पदों पर भर्ती का रास्ता फिर खुल गया है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने भर्ती प्रक्रिया रद्द करने के राज्य शासन के फैसले को मनमाना बताते हुए निरस्त कर दिया है। अदालत ने अधिकारियों को वर्ष 2022 में जारी मूल विज्ञापन और उसके संशोधित विज्ञापन के आधार पर भर्ती प्रक्रिया दोबारा शुरू करने का निर्देश दिया है।
सामान्य सभा के फैसले को हाईकोर्ट ने किया निरस्त
इस भर्ती को लेकर आदित्य सैनी सहित 10 अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ताओं ने 23 अप्रैल 2025 को सामान्य सभा की बैठक में लिए गए उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें पहले से चल रही भर्ती प्रक्रिया रद्द कर छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) के माध्यम से नए सिरे से भर्ती कराने का निर्णय लिया गया था। सुनवाई के दौरान अभ्यर्थियों की ओर से बताया गया कि 20 जुलाई 2022 को भर्ती विज्ञापन जारी होने के बाद चयन प्रक्रिया काफी आगे बढ़ चुकी थी। मेरिट सूची तैयार की जा चुकी थी और अभ्यर्थियों को 23 अगस्त 2023 को दस्तावेज सत्यापन के लिए भी बुलाया गया था।
आवेदनों की संख्या को लेकर सामने आया अंतर
याचिकाकर्ताओं ने भर्ती रद्द करने के पीछे दिए गए तर्कों पर भी आपत्ति जताई। उनका कहना था कि सामान्य सभा की बैठक में एक लाख से अधिक आवेदन मिलने और भर्ती प्रक्रिया में देरी होने की बात कही गई थी। जबकि महाविद्यालय के डीन ने 19 जून 2025 को चिकित्सा शिक्षा आयुक्त को भेजे पत्र में अलग आंकड़े प्रस्तुत किए थे। पत्र के मुताबिक, कुल 448 पदों के लिए 55,335 आवेदन प्राप्त हुए थे। इनमें तृतीय श्रेणी के 63 पदों के लिए 10,374 और चतुर्थ श्रेणी के 385 पदों के लिए 44,961 आवेदन शामिल थे। आवेदन संख्या में इस अंतर को याचिकाकर्ताओं ने भर्ती रद्द करने के फैसले पर सवाल उठाने का प्रमुख आधार बनाया।सरकार की दलीलें पर कोर्ट ने मांगे ठोस कारण
राज्य शासन की ओर से अदालत में कहा गया कि किसी भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने या दस्तावेज सत्यापन के लिए बुलाए जाने मात्र से अभ्यर्थी को नियुक्ति का अधिकार नहीं मिल जाता। प्रशासन को संस्थागत हित और सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए भर्ती प्रक्रिया में बदलाव करने का अधिकार है। हाईकोर्ट ने भी माना कि सरकार प्रत्येक विज्ञापित पद को भरने के लिए बाध्य नहीं है और उचित परिस्थितियों में भर्ती रद्द की जा सकती है। हालांकि, इस मामले में अधिकारी यह स्पष्ट नहीं कर पाए कि पहले से चल रही चयन प्रक्रिया में ऐसी कौन-सी खामी थी, जिसके कारण उसे आगे जारी रखना संभव नहीं था। अदालत ने यह भी माना कि नई भर्ती प्रक्रिया शुरू होने से पहले आवेदन कर चुके अभ्यर्थियों की आयु संबंधी पात्रता प्रभावित हो सकती है।
तीन महीने में पूरी करनी होगी चयन प्रक्रिया
जस्टिस बिभू दत्ता गुरु की एकलपीठ ने अपने फैसले में कहा कि भर्ती रद्द करने के निर्णय को पर्याप्त तथ्यात्मक और कानूनी आधार से साबित नहीं किया जा सका। अदालत ने इसे संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 में दिए गए समानता तथा अवसर की निष्पक्षता के सिद्धांतों के विपरीत माना। हाईकोर्ट ने 23 अप्रैल 2025 की सामान्य सभा की बैठक में लिए गए भर्ती रद्द करने के फैसले और 19 जून 2025 के संबंधित पत्र को निरस्त कर दिया है। साथ ही अधिकारियों को 20 जुलाई 2022 के मूल विज्ञापन और संशोधित विज्ञापन के आधार पर भर्ती प्रक्रिया उसी चरण से आगे बढ़ाने का निर्देश दिया है, जहां इसे रोका गया था। अब अभ्यर्थियों की पात्रता और दस्तावेजों की जांच कर तुलनात्मक मेरिट सूची तैयार की जाएगी। अदालत ने आदेश की प्रति मिलने के तीन महीने के भीतर पूरी प्रक्रिया समाप्त करने की समयसीमा तय की है।






