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Repair of Bilaspur-Mungeli NH-130A using cement-concrete(Image Source: social media)
Repair of Bilaspur-Mungeli NH-130A using cement-concrete(Image Source: social media)
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Bilaspur News: 188 करोड की लागत से बनी सड़क निर्माण पुरा होने से पहले ही जर्ज़र

Bilaspur News: NH-130A पर 188 करोड़ रुपये से अधिक खर्च होने के बावजूद सड़क की गुणवत्ता, मरम्मत और अधूरे निर्माण पर सवाल उठ रहे हैं। डामर की सड़क पर सीमेंट-कंक्रीट से रिपेयरिंग, साइन बोर्ड और मील स्टोन की कमी के बीच विभागीय निगरानी भी सवालों के घेरे में है। ठेकेदार को दो बार नोटिस जारी।

अप्पू धीवर |  कीर्तिमान न्यूज
प्रकाशित: 30 Oct 2026, 03:58 PM · 1 मिनट पढ़ने का समय
बिलासपुर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
Bilaspur News: राष्ट्रीय राजमार्ग NH-130A की बदहाल स्थिति अब चर्चा का विषय बन गई है। करोड़ों की लागत से तैयार की जा रही इस सड़क पर निर्माण और रखरखाव की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि सड़क का काम पूरी तरह दुरुस्त होने से पहले ही कई स्थानों पर मरम्मत की जरूरत पड़ रही है। क्षतिग्रस्त हिस्सों पर सीमेंट-कंक्रीट जैसी सामग्री डालकर पैचवर्क किया जा रहा है। सड़क की मौजूदा तस्वीरें सामने आने के बाद सवाल उठने लगे हैं कि आखिर नई सड़क पर इतनी जल्दी मरम्मत की नौबत क्यों आ रही है? क्या निर्माण के दौरान निर्धारित तकनीकी मानकों का पालन नहीं किया गया या सड़क की निचली परतों में ही कोई खामी रह गई है? 

निर्माण पूरा होने से पहले सड़क खराब, गुणवत्ता पर उठे सवाल 

 क्षेत्र के लिहाज से एक महत्वपूर्ण मार्ग है। ऐसे में सड़क की गुणवत्ता और सुरक्षा व्यवस्था का दुरुस्त होना बेहद जरूरी है। लेकिन निर्माण और रखरखाव के बीच सामने आ रही खामियों ने संबंधित विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सड़क के कुछ हिस्सों में सतह क्षतिग्रस्त होने के बाद मरम्मत का काम कराया जा रहा है।  सड़क के क्षतिग्रस्त हिस्सों में सीमेंट-कंक्रीट आधारित सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि डामर की सड़क पर इस तरह की मरम्मत कितनी टिकाऊ साबित होगी। यदि खराबी केवल ऊपरी परत में है, तो एक प्रक्रिया अपनाई जाती है। इसके लिए खराब हिस्से की सही पहचान, कमजोर सामग्री को हटाना, निचली परतों की जांच और निर्धारित तकनीकी प्रक्रिया का पालन जरूरी है। विभाग को यह स्पष्ट करना चाहिए कि डामर की सड़क पर सीमेंट-कंक्रीट से मरम्मत किस तकनीकी मानक के तहत की जा रही है।

सफर करने वाले यात्रियों को परेशानी

 सड़क की गुणवत्ता के साथ-साथ NH-130A पर यातायात सुरक्षा के इंतजामों को लेकर भी शिकायतें सामने आ रही हैं। मार्ग पर कई जगह मील स्टोन और दिशा सूचक बोर्ड नहीं होने की बात कही जा रही है। वहीं, रेट्रो-रिफ्लेक्टिव व्यवस्था और रोड मार्किंग की स्थिति भी सवालों के घेरे में है। इन सुविधाओं का महत्व रात के समय और खराब मौसम में और बढ़ जाता है। दिशा सूचक बोर्ड और मील स्टोन नहीं होने से वाहन चालकों को रास्ते, दूरी और मोड़ की सही जानकारी मिलने में परेशानी हो सकती है। पर्याप्त रिफ्लेक्टर और रोड मार्किंग के अभाव में दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ सकता है।
 करीब 30.8 किलोमीटर लंबी सड़क परियोजना पर 188 करोड़ से अधिक की लागत बताई गई है। विभागीय प्रोजेक्ट समरी के अनुसार, ठेकेदार और राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग के बीच 26 दिसंबर 2018 को अनुबंध हुआ था। वहीं, निर्माण कार्य 24 नवंबर 2020 को पूर्ण बताया गया। ऐसे में सवाल उठता है कि जब विभागीय रिकॉर्ड में निर्माण कार्य पूरा हो चुका है, तो फिर सड़क पर जरूरी सुविधाओं और मरम्मत की स्थिति संतोषजनक क्यों नहीं है? करोड़ों रुपये की लागत वाली परियोजना में निर्माण की गुणवत्ता, निरीक्षण और रखरखाव की जिम्मेदारी तय होना जरूरी है। विभाग को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि निर्माण पूर्ण होने के बाद किन मानकों के आधार पर सड़क का निरीक्षण किया गया था।
सड़क पर मरम्मत 

ठेकेदार को दो बार नोटिस, फिर भी सुधार नहीं 

 निर्माण में लापरवाही को लेकर संबंधित विभाग द्वारा ठेकेदार अनिल बिल्डकॉन प्राइवेट लिमिटेड और सब-कॉन्ट्रैक्टर कन्हैया लाल अग्रवाल को दो बार नोटिस जारी किए जाने की जानकारी सामने आई है। इसके बावजूद सड़क की गुणवत्ता, अधूरे निर्माण और मेंटेनेंस को लेकर शिकायतें जारी हैं। मील स्टोन, दिशा सूचक बोर्ड, रोड मार्किंग और रेट्रो-रिफ्लेक्टिव व्यवस्था जैसे जरूरी कार्यों की स्थिति भी चर्चा में बनी हुई है। अब सवाल यह है कि दो बार नोटिस जारी होने के बाद भी अपेक्षित सुधार क्यों नहीं हुआ? क्या ठेकेदार के खिलाफ आगे कोई कार्रवाई की जाएगी या अधूरे कामों को पूरा कराने के लिए केवल निर्देश जारी किए जाते रहेंगे? कंक्रीट से हो रही मरम्मत NH-130A पर डामर की सड़क में सीमेंट-कंक्रीट से मरम्मत किए जाने के संबंध में कार्यपालन अभियंता रोशन कुमार साहू से चर्चा की गई। उन्होंने बताया कि डामर की कमी के कारण ठेकेदार द्वारा मेंटेनेंस के दौरान कंक्रीट मटेरियल से रिपेयरिंग कराई जा रही है। 

सड़क की मरम्मत की जानकारी से एसडीओ अनजान

 इस पूरे मामले में विभागीय निगरानी को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। सड़क की लागत, निर्माण पूर्ण होने और मौजूदा रिपेयरिंग कार्य के संबंध में एसडीओ अतुल पैगवार से जानकारी मांगी गई, लेकिन उन्होंने इन विषयों की पूरी जानकारी नहीं होने की बात कही। करीब 188 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली सड़क पर मरम्मत और रखरखाव से जुड़े सवालों के बीच जिम्मेदार अधिकारी की अनभिज्ञता कई सवाल खड़े करती है। आखिर सड़क निर्माण से लेकर मेंटेनेंस तक की निगरानी किस स्तर पर की जा रही है? क्या अधिकारियों के पास परियोजना की मौजूदा स्थिति और ठेकेदार द्वारा कराए जा रहे कार्यों का नियमित विवरण उपलब्ध नहीं है?
परियोजना से जुड़ी जानकारी के लिए इंजीनियर नरेंद्र खांडे से भी चर्चा की गई। उन्होंने तत्काल पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं होने की बात कहते हुए फाइल देखने के बाद जानकारी देने की बात कही। इस खबर में परियोजना की लागत, लंबाई और निर्माण की समय सीमा से संबंधित आंकड़े विभागीय प्रोजेक्ट समरी के आधार पर शामिल किए गए हैं। ऐसे में करोड़ों रुपये की महत्वपूर्ण परियोजना से जुड़े अधिकारियों के पास स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं होना विभागीय समन्वय और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। मामला निर्माण की गुणवत्ता, ठेकेदार की जवाबदेही, विभागीय निगरानी और यात्रियों की सुरक्षा से भी जुड़ा है। मरम्मत की गुणवत्ता की जांच करे और अधूरे सुरक्षा कार्यों को समयसीमा के भीतर पूरा करवाए। साथ ही, तो जिम्मेदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई भी होनी चाहिए। करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी यदि यात्रियों को अधूरी सड़क और सुरक्षा संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, तो इसका जवाब संबंधित विभाग को देना होगा।
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