Road Construction Issue: महासमुंद में बोरियाझर से चोरभट्टी तक करीब 26 किलोमीटर सड़क के निर्माण की मांग को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। सड़क की बदहाल स्थिति, कम चौड़ाई और आए दिन होने वाली दुर्घटनाओं से परेशान ग्रामीण अब इसके जल्द निर्माण की मांग कर रहे हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, सड़क निर्माण के लिए बजट आवंटित हो चुका है, लेकिन प्रशासनिक स्वीकृति लंबित होने के कारण काम शुरू नहीं हो पा रहा है। इसी मुद्दे को लेकर करीब 40 गांवों के ग्रामीण कलेक्ट्रेट पहुंचे और अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते उनकी मांग पर कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आंदोलन और चक्काजाम करने के लिए मजबूर होंगे।
करीब 70 गांवों के आवागमन का प्रमुख मार्ग
बोरियाझर से चोरभट्टी तक की सड़क खट्टी, लभरा, आमाकोनी, जोगीडिपा, चोरभट्टी समेत आसपास के कई गांवों के लोगों के लिए महत्वपूर्ण मार्ग है। सड़क की खराब स्थिति से करीब 70 गांव प्रभावित हो रहे हैं, लोग रोजमर्रा के काम, खेती-किसानी और अन्य जरूरतों के लिए यही प्रमुख मार्ग है।सड़क की चौड़ाई इतनी कम है कि जब कोई बड़ा या भारी वाहन गुजरता है, तो सामने से आने वाले वाहनों के लिए रास्ता लगभग बंद हो जाता है। कई बार दो वाहनों का एक साथ निकलना संभव नहीं हो पाता, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।
गड्ढे, पानी का भराव और गहरी साइड शोल्डर से खतरा
ग्रामीणों ने बताया कि सड़क पर जगह-जगह गड्ढे होने के कारण वाहन चालकों को परेशानी होती है। बारिश के दौरान गड्ढों में पानी भर जाने से सड़क की स्थिति और खराब हो जाती है। सड़क के किनारे का हिस्सा (साइड सोल्डर) लगभग एक फीट तक नीचे है। ऐसे में वाहन जब मुख्य सड़क से किनारे की ओर उतरते हैं, तो उनके अनियंत्रित होकर गिरने की आशंका रहती है। इसके अलावा, सड़क के दोनों ओर बड़ी और कंटीली झाड़ियां उगी हुई हैं जिसके कारण रास्ता संकरा हो जाता है। ग्रामीणों के मुताबिक झाड़ियों से टकराने या बचने के प्रयास में भी दुर्घटनाएं हुई है।
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पहले भी हो चुकी हैं दुर्घटनाएं, कई मौतों का दावा
ग्रामीणों का दावा है कि सड़क की खराब स्थिति और कम चौड़ाई के कारण पहले भी कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें लोगों की जान भी जा चुकी है। ऐसे में सड़क निर्माण केवल सुविधा नहीं बल्कि लोगों की सुरक्षा से जुड़ा विषय बन जाता है। आने वाले समय में धान कटाई और कृषि कार्यों का सीजन शुरू होने वाला है, इसी मार्ग से धान और अन्य कृषि उपज एवं अन्य सामान का परिवहन होता है। सड़क की खराब स्थिति के करण किसानों को धान की ढुलाई और दूसरे कृषि कार्यों में भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
बजट आवंटित, लेकिन प्रशासनिक स्वीकृति लंबित
ग्रामीणों के अनुसार, बोरियाझर-चोरभट्टी सड़क के निर्माण के लिए बजट का प्रावधान हो चुका है, लेकिन अब तक प्रशासनिक स्वीकृति नहीं मिली है। उनका कहना है कि आगामी फरवरी तक स्वीकृति मिलने की समय-सीमा बताई गई है। यदि तय समय में स्वीकृति नहीं मिलती है, तो आवंटित बजट निरस्त होने की आशंका है। ग्रामीणों को डर है कि यदि इस अवधि में प्रशासनिक स्वीकृति नहीं मिली, तो सड़क निर्माण का काम फिर अटक सकता है और उन्हें एक और साल इंतजार करना पड़ सकता है। इसलिए वे जल्द से जल्द स्वीकृति जारी कर निर्माण कार्य शुरू कराने की मांग कर रहे हैं।
जनप्रतिनिधियों से नाराजगी, पुराने वादों पर उठाए सवाल
सड़क निर्माण में देरी को लेकर ग्रामीणों में क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों के प्रति भी नाराजगी है। उनका कहना है कि अब तक कई विधायक और जनप्रतिनिधि बदल चुके हैं , लेकिन सड़क की समस्या जस की तस बनी हुई है, और क्षेत्र के लोगों को आज भी सड़क जैसी बुनियादी सुविधा के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि खराब सड़क के कारण रोजाना आवागमन करने वाले लोगों, किसानों और वाहन चालकों को जोखिम उठाना पड़ता है।
केंद्रीय परिवहन मंत्री तक पहुंचा मामला, फिर भी समाधान का इंतजार
अधिवक्ता जयप्रकाश टंडन के मुताबिक, उन्होंने इस सड़क की समस्या को लेकर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से भी मुलाकात की थी। इस संबंध में गडकरी ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र लिखकर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद सड़क निर्माण की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ने पर उन्होंने प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाए हैं।कलेक्ट्रेट पहुंचे ग्रामीण, चक्काजाम की चेतावनी
सड़क निर्माण की मांग को लेकर करीब 40 गांवों के ग्रामीण कलेक्ट्रेट पहुंचे और अपनी मांगों के संबंध में ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द कार्रवाई कर सड़क निर्माण की प्रक्रिया शुरू कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते उनकी समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो वे आगे उग्र आंदोलन और चक्काजाम कर सकते हैं।अब सवाल यह है कि जब सड़क निर्माण के लिए बजट का प्रावधान हो चुका है, तो प्रशासनिक स्वीकृति में देरी क्यों हो रही है? क्या तय समय-सीमा के भीतर स्वीकृति जारी होगी और ग्रामीणों को खराब सड़क से राहत मिल पाएगी? फिलहाल, ग्रामीणों को प्रशासन के निर्णय का इंतजार है।







