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Chhattisgarh Road Construction: सड़क निर्माण पर डामर का ग्रहण, दोगुनी हुई कीमतें, अधर में ₹2000 करोड़ के प्रोजेक्ट्स
Chhattisgarh Road Construction: छत्तीसगढ़ में डामर की कीमत छह महीनों में 50 हजार से बढ़कर 96,500 रुपये प्रति टन पहुंच गई है। इससे करीब 2,000 करोड़ रुपये के सड़क निर्माण और मरम्मत कार्य प्रभावित हुए हैं। कई परियोजनाओं की रफ्तार थम गई है और ठेकेदारों ने सरकार से रेट रिवीजन की मांग की है।
Chhattisgarh Road Construction: छत्तीसगढ़ में सड़कों का जाल बिछाने और मरम्मत करने की रफ्तार पर अचानक ब्रेक लग गया है। राज्य भर में जारी डामरीकरण के
काम या तो पूरी तरह ठप पड़ गए हैं या फिर उनकी गति बेहद धीमी हो चुकी है। इस पूरे संकट की वजह बनी है डामर की बेतहाशा बढ़ती कीमतें। महज छह महीनों के भीतर डामर के दाम लगभग दोगुने हो चुके हैं, जिससे पीडब्ल्यूडी (PWD) और निर्माण एजेंसियों के हाथ-पांव फूल गए हैं।
छह महीने में 50 हजार से 96.5 हजार पहुंचा डामर
जानकारों के मुताबिक, छह महीने पहले जिस डामर की कीमत 50 हजार रुपये प्रति टन थी, वह आज उछलकर 96,500 रुपये प्रति टन तक पहुंच गई है। कच्चे माल के इतने महंगे होने से सड़क निर्माण से जुड़ी एजेंसियों के लिए काम जारी रखना आसान नहीं रह गया है। ठेकेदारों का कहना है कि लागत दोगुनी होने की वजह से राज्यभर में सड़कों की मरम्मत और नए निर्माण से जुड़े करीब 2,000 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट्स सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं। स्थिति यह है कि डामरीकरण के लगभग 90 फीसदी कामों पर असर पड़ा है—कई जगह एजेंसियां नए टेंडर लेने से हिचक रही हैं, तो कई जगह आधा-अधूरा काम छोड़कर काम बंद कर दिया गया है।
पीक सीजन में संकट, कॉन्ट्रैक्टर एसोसिएशन ने मांगी राहत
हाल ही में लोक निर्माण विभाग (PWD) की एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें पीडब्ल्यूडी सचिव, ईएनसी और ठेकेदार संघ के प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक में ठेकेदारों ने अपनी मजबूरी जाहिर करते हुए कहा कि
सड़कों के निर्माण का यह 'पीक सीजन' है, लेकिन इस समय डामर की किल्लत और बढ़ी हुई दरें सबसे बड़ी रुकावट बन गई हैं। छत्तीसगढ़ कॉन्ट्रैक्टर एसोसिएशन ने सरकार से दर संशोधन (Rate Revision) की गुहार लगाई है। एसोसिएशन का साफ कहना है कि पुराने अनुबंधों में जो दरें तय हुई थीं, उस बजट में वर्तमान मार्केट प्राइस पर काम करना सीधे तौर पर भारी नुकसान का सौदा है।
राजधानी से लेकर ग्रामीण इलाकों तक सड़कें बदहाल
डामर की कीमतों में आई इस तेजी का खामियाजा सीधे जनता को भुगतना पड़ रहा है:
राजधानी रायपुर का एक्सप्रेस-वे: स्टेशन से सद्दाणी दरबार तक 17 करोड़ रुपये की लागत से होने वाले रिनुअल का टेंडर जारी हो चुका है, लेकिन बढ़ी दरों के कारण ठेका एजेंसी अनुबंध (Agreement) साइन नहीं कर रही है।
महासमुंद से तुमगांव मार्ग: 9 किलोमीटर लंबी सड़क के नवीनीकरण में से एजेंसी ने 5 किमी का डामरीकरण तो कर दिया, लेकिन इसके बाद बढ़ी लागत का हवाला देकर काम बीच में ही छोड़कर चली गई। बाकी 4 किमी हिस्सा अब भी अधूरा पड़ा है।
भैंसा भंडार से तेलसी सड़क: रायपुर जिले की इस 30 किमी लंबी सड़क के लिए पीडब्ल्यूडी ने एजेंसी तय कर दी थी, लेकिन लागत बढ़ने के कारण काम शुरू ही नहीं हो सका। नतीजतन, ऊबड़-खाबड़ राहों से गुजरने वाले ग्रामीणों और राहगीरों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
जब तक सरकार की तरफ से रेट रिवीजन या डामर की उपलब्धता को लेकर कोई ठोस रास्ता नहीं निकलता, तब तक प्रदेश में सड़कों की स्थिति सुधरने के आसार कम ही नजर आ रहे हैं।