Singrauli News: मध्य प्रदेश के बसौड़ा गांव में सड़क की समस्या के कारण ग्रामीणों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। देवसर विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत जोगियानी के इस गांव में करीब 25 आदिवासी परिवार रहते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गांव तक सड़क नहीं होने से आवागमन के साथ-साथ आपात स्थिति में मरीजों को अस्पताल पहुंचाना भी मुश्किल हो जाता है। हाल ही में गांव के निवासी ईश्वर सिंह गोंड की तबीयत बिगड़ने पर परिजनों को काफी परेशानी उठानी पड़ी।
आवेदन के बाद भी सड़क का इंतजार
उल्टी-दस्त के कारण उनकी हालत गंभीर होने पर परिजनों ने उन्हें कुर्सी पर बैठाया और किसी तरह सड़क तक पहुंचाया। इसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया। इस घटना ने गांव में सड़क जैसी बुनियादी सुविधा की जरूरत को फिर सामने ला दिया है। आवेदन देने के बाद भी नहीं बनी सड़क ग्रामीणों के मुताबिक, सड़क निर्माण की मांग को लेकर विधायक, कलेक्टर, एसडीएम, तहसीलदार और पंचायत स्तर के अधिकारियों तक आवेदन दिए जा चुके हैं।
सड़क निर्माण के लिए प्रस्ताव भेजे जाने की बात भी कही जा रही है, लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हो सका है।
ग्रामीणों को अब भी सड़क का इंतजार
सड़क नहीं होने के कारण ग्रामीणों को रोजमर्रा के आवागमन में परेशानी होती है। सबसे ज्यादा दिक्कत तब आती है, जब गांव में कोई बीमार पड़ जाता है और उसे तत्काल अस्पताल पहुंचाने की जरूरत होती है। ऐसी स्थिति में एंबुलेंस की पहुंच भी एक बड़ी चुनौती बन जाती है। ग्रामीणों को अब भी सड़क का इंतजार बसौड़ा गांव के लोगों को उम्मीद है कि उनकी समस्या पर प्रशासन ध्यान देगा और सड़क निर्माण की दिशा में जल्द कदम उठाए जाएंगे।25 आदिवासी परिवारों को अब भी सड़क का इंतजार
ग्रामीणों का सवाल है कि जब कई स्तरों पर शिकायतें और आवेदन दिए जा चुके हैं, तो आखिर सड़क निर्माण कब शुरू होगा? फिलहाल, गांव के करीब 25 आदिवासी परिवार सड़क जैसी बुनियादी सुविधा का इंतजार कर रहे हैं। अब देखना होगा कि जिम्मेदार अधिकारी ग्रामीणों की मांग पर कब तक कार्रवाई करते हैं और गांव को सड़क सुविधा मिल पाती है या नहीं।






