मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में जमीन विवाद को लेकर एक ऐसा मामला सामने आया, जिसने पुलिस और प्रशासन को भी परेशान कर दिया। वाटर प्लांट के लिए चिन्हित जमीन को लेकर विरोध कर रही एक महिला अचानक 100 फीट ऊंचे BSNL टावर पर चढ़ गई। महिला अपनी मांगों को लेकर काफी देर तक टावर पर बैठी रही, जिसके बाद मौके पर मौजूद अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए।
महिला का कहना था कि उसकी जमीन से जुड़ी कार्रवाई को रोका जाए और उसकी बात सुनी जाए। टावर पर चढ़ी महिला को नीचे उतारने के लिए पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने काफी देर तक समझाइश की। इस दौरान मौके पर बड़ी संख्या में ग्रामीण भी जमा हो गए और पूरे गांव में तनाव की स्थिति बन गई।
श्यारदे गांव में प्रशासन की कार्रवाई का विरोध
यह पूरा मामला श्योपुर जिले के बीरपुर थाना क्षेत्र के श्यारदे गांव का है। जानकारी के अनुसार, क्षेत्र में एक बड़े वाटर प्लांट का निर्माण प्रस्तावित है। इसके लिए जमीन चिन्हित कर अधिग्रहण की प्रक्रिया की गई थी। प्रशासन का कहना था कि संबंधित जमीन पर कुछ लोगों का कब्जा है, जिसे हटाने के लिए कार्रवाई की जा रही है। इसी कार्रवाई को लेकर पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीम गांव पहुंची थी।
मांग पूरी होने तक नीचे नहीं उतरने की बात कही
महिला के टावर पर चढ़ने के बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने उसे नीचे उतरने के लिए समझाया। लेकिन महिला अपनी मांग पर अड़ी रही। उसने कहा कि जब तक उसकी समस्या का समाधान नहीं होगा और जमीन से जुड़ी कार्रवाई पर रोक नहीं लगेगी, तब तक वह टावर से नीचे नहीं उतरेगी। करीब 100 फीट ऊंचाई पर महिला के बैठे होने से मौके पर मौजूद लोगों में चिंता फैल गई।
782 करोड़ रुपये की लागत से बनना है वाटर प्लांट
जिस जमीन को लेकर यह विवाद सामने आया है, वह एक महत्वपूर्ण पेयजल परियोजना से जुड़ी हुई है। इस वाटर प्लांट के माध्यम से श्योपुर जिले के करीब 377 गांवों तक पानी पहुंचाने की योजना है। परियोजना की अनुमानित लागत करीब 782 करोड़ रुपये बताई जा रही है। इस महत्वाकांक्षी योजना का शिलान्यास करीब दो साल पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया गया था। योजना के पूरा होने से बड़ी संख्या में ग्रामीणों को पेयजल सुविधा मिलने की उम्मीद है।
जमीन पर विवाद से प्रशासन की बढ़ी चिंता
वाटर प्लांट जैसी बड़ी योजना के लिए जमीन उपलब्ध कराना प्रशासन के लिए जरूरी है, वहीं दूसरी ओर जमीन से जुड़े लोगों की समस्याओं का समाधान करना भी चुनौती बना हुआ है। श्यारदे गांव में सामने आए इस घटनाक्रम ने जमीन अधिग्रहण से जुड़े मामलों में संवाद और सहमति की जरूरत को भी उजागर किया है। फिलहाल प्रशासन की टीम महिला को सुरक्षित नीचे उतारने और पूरे मामले का समाधान निकालने में जुटी हुई है।