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एचआईवी और क्रोनिक पेन
एचआईवी और क्रोनिक पेन
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एचआईवी : मरीजों में लंबे दर्द का मिला नया सुराग, वैज्ञानिकों का बड़ा खुलासा

एचआईवी से संक्रमित आधे से अधिक लोगों को जीवन में कभी न कभी लंबे समय तक रहने वाले दर्द (क्रोनिक पेन) की समस्या का सामना करना पड़ता है। इस दर्द के कारणों को समझने के लिए यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास एमडी एंडरसन कैंसर सेंटर के वैज्ञानिकों ने चूहों पर अध्ययन किया। एचआईवी से जुड़ी जैविक प्रक्रियाएं तंत्रिका कोशिकाओं के कामकाज को प्रभावित कर सकती हैं, जिससे दर्द के संकेत अधिक तीव्र हो जाते हैं और दर्द लंबे समय तक बना रहता है। शोधकर्ताओं का मानना है कि यह अध्ययन एचआईवी मरीजों में होने वाले क्रोनिक पेन के बेहतर इलाज और नई उपचार पद्धतियों के विकास का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।

कीर्तिमान नेटवर्क
02 Jun 2026, 03:48 PM
रायपुर
एचआईवी (ह्यूमन इम्यूनोडेफिशिएंसी वायरस) से संक्रमित लोगों में लंबे समय तक रहने वाला दर्द एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, एचआईवी से प्रभावित आधे से अधिक लोगों को जीवन के किसी न किसी चरण में क्रोनिक पेन यानी लगातार बने रहने वाले दर्द की समस्या का सामना करना पड़ता है। इस दर्द का इलाज भी अक्सर जटिल और चुनौतीपूर्ण होता है। इसी समस्या को समझने के लिए अमेरिका के यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास एमडी एंडरसन कैंसर सेंटर के वैज्ञानिकों ने एक नई रिसर्च की है। प्रतिष्ठित वैज्ञानिक जर्नल  जे-न्यूरोसाइंस में प्रकाशित इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने चूहों पर प्रयोग कर यह जानने की कोशिश की कि आखिर एचआईवी शरीर में लंबे समय तक रहने वाले दर्द को कैसे जन्म देता है।

एचआईवी और दर्द 

एचआईवी को आमतौर पर शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर करने वाले वायरस के रूप में है, लेकिन इसके प्रभाव केवल प्रतिरक्षा प्रणाली तक सीमित नहीं रहते। कई मरीजों में नसों, मांसपेशियों और शरीर के अन्य हिस्सों में लगातार दर्द की शिकायत भी देखी जाती है। वैज्ञानिक लंबे समय से यह समझने की कोशिश कर रहे थे कि वायरस या उससे जुड़ी जैविक प्रक्रियाएं तंत्रिका तंत्र को किस प्रकार प्रभावित करती हैं, जिससे दर्द लंबे समय तक बना रहता है।

चूहों पर अध्ययन

शोध का नेतृत्व न्यूरोसाइंस विशेषज्ञ हुई-लिन पैन और उनकी टीम ने किया। वैज्ञानिकों ने प्रयोगशाला में चूहों के मॉडल का उपयोग करते हुए यह अध्ययन किया कि एचआईवी से जुड़ी जैविक गतिविधियां दर्द को नियंत्रित करने वाले तंत्रिका नेटवर्क पर क्या प्रभाव डालती हैं। अध्ययन में पाया गया कि वायरस से जुड़े कुछ कारक तंत्रिका कोशिकाओं के सामान्य कामकाज को प्रभावित कर सकते हैं। इसके कारण दर्द के संकेत मस्तिष्क तक अधिक तीव्रता से पहुंचते हैं और मरीज को लंबे समय तक दर्द महसूस हो सकता है।

नए इलाज की उम्मीद

शोधकर्ताओं का मानना है कि इस अध्ययन से एचआईवी से जुड़े क्रोनिक पेन की जैविक प्रक्रिया को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलेगी। यदि वैज्ञानिक दर्द पैदा करने वाले इन विशिष्ट तंत्रों की पहचान कर लेते हैं, तो भविष्य में अधिक प्रभावी और लक्षित उपचार विकसित किए जा सकते हैं। वर्तमान में एचआईवी मरीजों में होने वाले लंबे दर्द के लिए सीमित उपचार विकल्प उपलब्ध हैं और कई मामलों में दवाएं पूरी तरह राहत नहीं दे पातीं। ऐसे में यह शोध नई दवाओं और उपचार पद्धतियों के विकास का रास्ता खोल सकती है।

दुनियाभर में लाखों लोग प्रभावित

विश्व स्वास्थ्य संगठनों के अनुसार, दुनिया भर में करोड़ों लोग एचआईवी के साथ जीवन जी रहे हैं। एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी (ART) की मदद से अब मरीज पहले की तुलना में अधिक लंबा और स्वस्थ जीवन जी पा रहे हैं, लेकिन दर्द, तंत्रिका संबंधी समस्याएं और अन्य दीर्घकालिक जटिलताएं अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। एचआईवी मरीजों की जीवन गुणवत्ता बेहतर बनाने के लिए केवल वायरस को नियंत्रित करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनसे जुड़ी अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का समाधान भी जरूरी है।

आगे और शोध की जरूरत

वैज्ञानिकों ने कहा कि चूहों पर मिले नतीजे महत्वपूर्ण हैं, लेकिन इन्हें मनुष्यों पर लागू करने से पहले और अधिक अध्ययन की आवश्यकता होगी। भविष्य के शोध यह स्पष्ट कर सकते हैं कि एचआईवी से जुड़ा दर्द किन जैविक प्रक्रियाओं के कारण उत्पन्न होता है और उसे किस प्रकार प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है। यह अध्ययन एचआईवी से जुड़े क्रोनिक पेन की समझ को नई दिशा देने वाला साबित हो सकता है और भविष्य में लाखों मरीजों के लिए राहत का कारण बन सकता है।
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