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Women Entrepreneur Devni Devi Story (Image Source: Social Media)
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Homemade Food Startup: 20 रुपए के टिफिन से 2.5 करोड़ तक का सफर, जानिए देवनी देवी की सफलता कहानी 

Homemade Food Startup: देवनी देवी का सफर एक आम गृहिणी से सफल उद्यमी बनने तक का है। बिजनेस शुरू करने से पहले उनका ज्यादातर समय घर की रसोई में बीतता था, जहां वे 20 से ज्यादा सदस्यों वाले बड़े परिवार के लिए खाना तैयार करती थीं।

कीर्तिमान डेस्क | रोशनी पटेल
प्रकाशित: 28 Sep 2026, 03:32 PM · 5 मिनट पढ़ने का समय
नई दिल्ली
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
 Homemade Food Startup: देवनी देवी का सफर एक आम गृहिणी से सफल उद्यमी बनने तक का है। बिजनेस शुरू करने से पहले उनका ज्यादातर समय घर की रसोई में बीतता था, जहां वे 20 से ज्यादा सदस्यों वाले बड़े परिवार के लिए खाना तैयार करती थीं। महज 16 साल की उम्र में शादी के बाद देवनी देवी बिहार के एक संयुक्त परिवार का हिस्सा बन गईं। इतने बड़े परिवार के लिए रोजाना खाना बनाना, खाने की योजना तैयार करना और सही मात्रा का ध्यान रखना उनकी दिनचर्या बन गई थी।
देवनी देवी के पास कोई औपचारिक बिजनेस शिक्षा या ट्रेनिंग नहीं थी, लेकिन वर्षों तक रसोई संभालते हुए उन्होंने स्वादिष्ट और बड़ी मात्रा में खाना तैयार करने की कला सीख ली। यही अनुभव आगे चलकर उनके बिजनेस की नींव बना।

साल 2002 में शुरू हुआ 20 रुपए की थाली वाला सफर

साल 2002 में बच्चों की पढ़ाई के दौरान उन्होंने घर का बना सादा खाना बेचने का फैसला किया। शुरुआत महज 20 रुपए प्रति थाली से हुई। उनका पहला ग्राहक एक मेडिकल छात्र सौरभ था, जिसने उन्हें टिफिन और मेस सर्विस की जरूरत को समझने में मदद की। शुरुआती दिनों में देवनी देवी अकेले ही पूरा काम संभालती थीं। खाना बनाने से लेकर पैकिंग और छात्रों तक पहुंचाने तक की जिम्मेदारी वे खुद उठाती थीं। कई बार उन्हें दूर-दूर तक जाकर टिफिन पहुंचाना पड़ता था।

 छात्रों के बीच बढ़ी लोकप्रियता, लोगों ने प्यार से कहा ‘अम्मा’

धीरे-धीरे उनके खाने के स्वाद की चर्चा फैलने लगी। छात्रों की संख्या बढ़ने लगी और कई लोग उन्हें अपनापन दिखाते हुए ‘अम्मा’ कहकर बुलाने लगे। यही नाम आगे चलकर उनके ब्रांड की पहचान बन गया। देवनी देवी के घर से बाहर काम करने के फैसले पर कई लोगों ने सवाल उठाए। आलोचनाओं के बावजूद उन्होंने अपना काम जारी रखा। यहां तक कि उनके पति ने करीब छह महीने तक उनसे बातचीत नहीं की, लेकिन उन्होंने आत्मनिर्भर बनने का रास्ता नहीं छोड़ा। 

2009 में शुरू किया गर्ल्स हॉस्टल, छात्रों से जुड़ा रिश्ता और मजबूत हुआ

साल 2009 में उन्होंने अपनी पोती के नाम पर ‘समृद्धि गर्ल्स हॉस्टल’ की शुरुआत की। उनके टिफिन सर्विस से जुड़े कई पुराने छात्र इस हॉस्टल के शुरुआती निवासी बने। कोरोना महामारी के दौरान जब छात्र घर लौट गए और हॉस्टल बंद हो गए, तब उनका कारोबार प्रभावित हुआ। लेकिन उन्होंने खाना बनाना बंद नहीं किया और डॉक्टरों के हॉस्टल तक भोजन पहुंचाती रहीं, जब स्वास्थ्यकर्मियों को भरोसेमंद खाने की सबसे ज्यादा जरूरत थी।

 बीमारी के समय छात्रों ने निभाया अपना रिश्ता

कोविड संक्रमण की चपेट में आने के बाद देवनी देवी की मदद उन्हीं छात्रों ने की, जिन्हें उन्होंने वर्षों तक खाना खिलाया था। पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (PMCH) में छात्रों ने उनकी देखभाल की। बिजनेस में बड़ा बदलाव तब आया जब उनके बेटे ने इसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जोड़ने का सुझाव दिया। साल 2022 में ‘अम्मा किचन’ डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पहुंचा और नए ग्राहकों तक इसकी पहुंच बढ़ने लगी। 

आज करोड़ों का कारोबार, 30 से ज्यादा लोगों को मिला रोजगार

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आज अम्मा किचन के दो डाइन-इन आउटलेट्स हैं और 30 से ज्यादा लोग यहां काम कर रहे हैं। बिजनेस का सालाना टर्नओवर करीब 2.5 करोड़ रुपए तक पहुंच चुका है। एक छोटे से घर के किचन से शुरू हुआ यह सफर अब बड़े फूड ब्रांड में बदल चुका है। रोजाना मिलने वाले करीब 350 ऑनलाइन ऑर्डर्स देवनी देवी की मेहनत और लोगों के भरोसे को दिखाते हैं।
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