भारत की आंतरिक सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को लेकर केंद्र सरकार ने अब तक का सबसे बड़ा और आधुनिक मास्टरप्लान तैयार कर लिया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने देश की सीमाओं पर घुसपैठ, तस्करी और अवैध रूप से हो रहे जनसांख्यिकीय बदलाव (Demographic Change) को पूरी तरह रोकने के लिए एक 'सॉलिड प्लान' का एलान किया है।
इस नए सुरक्षा चक्र के तहत देश की सीमाओं पर अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी, स्थानीय प्रशासनिक संसाधनों और सुरक्षा बलों (BSF) को एक साथ जोड़कर 'स्मार्ट बॉर्डर' पायलट परियोजना शुरू की जा रही है।
किसी भी कीमत पर नहीं बदलने देंगे डेमोग्राफी
त्रिपुरा की लंकामुरा सीमा चौकी (BOP) पर सीमा सुरक्षा बल (BSF) के जवानों और अधिकारियों को संबोधित करते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने बेहद सख्त लहजे में कहा:
"चाहे त्रिपुरा हो, पश्चिम बंगाल हो या फिर बिहार... हम सीमा पार से होने वाली घुसपैठ के जरिए देश की जनसांख्यिकी (Demography) को किसी भी हालत में बदलने नहीं देंगे। यह मोदी सरकार का दृढ़ संकल्प और अटूट विश्वास है।"
शाह ने साफ किया कि भारत की सीमाओं में अवैध प्रवेश की कोशिश करने वाले तत्वों के खिलाफ अब 'जीरो टॉलरेंस' की नीति पर काम होगा।
क्या है सरकार की 'चतुर्भुज सुरक्षा रणनीति'?
गृह मंत्री ने बताया कि सीमाओं को पूरी तरह सील और अभेद्य बनाने के लिए 'चतुर्भुज सुरक्षा रणनीति' (Quadripartite Security Strategy) पर काम चल रहा है। 'स्मार्ट बॉर्डर' इसी रणनीति का सबसे अहम हिस्सा है।
आखिरी चरण में योजना: यह पूरी अवधारणा (Concept) इस समय अपने फाइनल स्टेज में है।
एक साथ 7-8 जगहों पर शुरुआत: शुरुआती दौर में इस पायलट प्रोजेक्ट को देश की सीमाओं पर 7 से 8 संवेदनशील स्थानों पर एक साथ लाइव किया जाएगा।
पूरे देश में विस्तार: शुरुआती तकनीकी और भौगोलिक चुनौतियों को हल करने के तुरंत बाद, इस 'स्मार्ट ग्रिड' को भारत के पूरे सीमा नेटवर्क (Border Network) पर लागू कर दिया जाएगा।
भारत-बांग्लादेश बॉर्डर पर बड़ा अपडेट
गृह मंत्री की इस यात्रा का मुख्य केंद्र बिंदु त्रिपुरा रहा, जो उत्तर, दक्षिण और पश्चिम तीन तरफ से बांग्लादेश से घिरा हुआ है। इस सीमा को लेकर गृह मंत्री ने बड़े फैसले की जानकारी दी:
त्रिपुरा में लगभग 650 किलोमीटर लंबी सीमा बाड़ (Fencing) है।
इसमें से 119 किलोमीटर हिस्सा ऐसा है जो 15 साल से भी अधिक पुराना और जर्जर हो चुका है।
केंद्र सरकार ने इस 119 किमी पुरानी बाड़ को हटाकर उसकी जगह अत्याधुनिक और मजबूत नई बाड़ लगाने की परियोजना को मंजूरी दे दी है।
देश के सामने मौजूद 4 बड़े 'साइलेंट खतरे'
अमित शाह ने आगाह किया कि आज पाकिस्तान और बांग्लादेश सीमाओं पर पारंपरिक युद्ध से ज्यादा 'गैर-पारंपरिक' और आंतरिक सुरक्षा से जुड़े खतरे बढ़ गए हैं। सरकार का ध्यान मुख्य रूप से इन चार चुनौतियों पर है:
नार्को-टेररिज्म: सीमा पार से भारी मात्रा में हो रही मादक पदार्थों (Drugs) की तस्करी।
ह्यूमन ट्रैफिकिंग: अवैध रूप से मानव तस्करी और घुसपैठ का नेटवर्क।
ड्रोन टेक्नोलॉजी का दुरुपयोग: सीमा पार बैठे दुश्मनों द्वारा ड्रोन के जरिए नकली भारतीय मुद्रा (FICN) और हथियार गिराना।
आर्थिक हमला: नकली नोटों के जरिए देश की अर्थव्यवस्था को कमजोर करने की साजिश।
अमित शाह ने समझाया 'सुरक्षित देश' का असली मतलब
सुरक्षा की नई परिभाषा गढ़ते हुए गृह मंत्री ने कहा कि सुरक्षित देश का मतलब सिर्फ युद्ध जीतना या बड़े सैन्य खतरों से निपटना नहीं है। असल सुरक्षा की कसौटी रोजमर्रा के ये मोर्चे हैं:
"जब मैं देश को 'सुरक्षित' करने की बात करता हूँ, तो मेरा मतलब है– क्या हम अपनी सीमाओं को तस्करी से मुक्त कर सकते हैं? क्या हम अपनी मां-बेटियों को मानव तस्करी से बचा सकते हैं? क्या हम देश की युवा पीढ़ी को नशे के जाल से सुरक्षित रख सकते हैं? और क्या हम भारत की अर्थव्यवस्था को नकली करेंसी से बचा सकते हैं? अगर हम यह कर पाए, तभी देश सही मायनों में सुरक्षित होगा।"
राजस्थान-गुजरात के बाद अब बंगाल की बारी
सुरक्षा व्यवस्था की जमीनी हकीकत परखने के लिए गृह मंत्री खुद मोर्चे पर हैं। राजस्थान और गुजरात की पश्चिमी (पाकिस्तान) सीमाओं का दौरा करने के बाद शाह अब पूर्वी मोर्चे (बांग्लादेश बॉर्डर) को चाक-चौबंद कर रहे हैं।
अगला पड़ाव पश्चिम बंगाल: त्रिपुरा के बाद, गृह मंत्री के 15 जून को पश्चिम बंगाल की सीमा का दौरा करने की प्रबल संभावना है, जहां घुसपैठ एक बड़ा राजनीतिक और सुरक्षा मुद्दा है।
शीर्ष अधिकारी रहे मौजूद: त्रिपुरा दौरे पर इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के पूर्व चीफ और वर्तमान सुरक्षा सलाहकार तपन डेका सहित बीएसएफ के तमाम शीर्ष कमांडर गृह मंत्री के साथ मौजूद रहे।
नए आवासों का उद्घाटन
सीमाओं की सुरक्षा के साथ-साथ जवानों के कल्याण के लिए शाह ने एक ऑनलाइन कार्यक्रम के जरिए BSF की 37वीं बटालियन के लिए नए रिहायशी आवासों (Accommodations) और 97वीं बटालियन में 'क्वार्टर गार्ड कॉम्प्लेक्स' परियोजना का उद्घाटन भी किया, ताकि सरहद पर मुस्तैद जवानों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।
