Indian Football: डूरंड कप जीत के बाद ईस्ट बंगाल को बड़ा झटका, इमामी ने छोड़ी निवेशक की भूमिका
Indian Football: डूरंड कप जीतने के बाद ईस्ट बंगाल को आर्थिक मोर्चे पर झटका लगा है। इमामी ने निवेश और प्रबंधन से हटने का फैसला किया है, हालांकि कंपनी प्रायोजक के रूप में क्लब से जुड़ी रहेगी। इस निर्णय ने भारतीय फुटबॉल और आईएसएल क्लबों की आर्थिक स्थिरता पर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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कीर्तिमान डेस्क | यशोदा साहू
26 Aug 2026, 12:42 PM
खेल डेस्क
Indian Football: मैदान पर ईस्ट बंगाल के लिए हालिया दौर यादगार रहा है। रेड-एंड-गोल्ड ब्रिगेड ने शानदार प्रदर्शन करते हुए लंबे समय बाद बड़ी सफलता हासिल की। लेकिन जीत के जश्न के बीच क्लब के सामने आर्थिक मोर्चे पर नई चुनौती खड़ी हो गई है। प्रमुख निवेशक इमामी ने क्लब के निवेश और प्रबंधन से पीछे हटने का फैसला किया है। डूरंड कप की सफलता के दो दिन बाद सामने आए इस फैसले के साथ ही इमामी और सौ साल से अधिक पुराने ईस्ट बंगाल क्लब के बीच चार वर्षों से चली आ रही निवेश साझेदारी समाप्त हो गई। हालांकि, कंपनी ने क्लब से पूरी तरह अलग होने के बजाय प्रायोजक के रूप में जुड़े रहने की बात कही है।
ईस्ट बंगाल से पीछे हटी इमामीप्रायोजक बनी रहेगी इमामी
इमामी ने स्पष्ट किया है कि निवेश और प्रबंधन की भूमिका छोड़ने के बावजूद वह प्रायोजक के रूप में ईस्ट बंगाल से जुड़ी रहेगी। कंपनी ने क्लब की खेल योजनाओं को सहयोग देने और आगामी सीजन के लिए खिलाड़ियों, अधिकारियों तथा समर्थकों को शुभकामनाएं देने की बात कही है। हालांकि, इमामी का यह फैसला ऐसे समय सामने आया है, जब भारतीय फुटबॉल आर्थिक अनिश्चितता से गुजर रहा है। एफएसडीएल और अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ के बीच समझौता खत्म होने के बाद रिलायंस ने आईएसएल से दूरी बना ली। इसके बाद सिटी फुटबॉल ग्रुप ने भी छह साल बाद मुंबई सिटी एफसी से अपनी हिस्सेदारी वापस ले ली।
आईएसएल कप और लीग शील्ड जीतने के बावजूद मुंबई सिटी से सिटी फुटबॉल ग्रुप का बाहर होना बढ़ती लागत और सीमित आमदनी की ओर इशारा करता है। वहीं, जमशेदपुर एफसी ने भी आईएसएल संचालन बंद करने का निर्णय लिया है। टाटा समूह अब जमीनी स्तर पर फुटबॉल प्रतिभाओं के विकास पर ध्यान केंद्रित करेगा। भारतीय क्लबों को टिकट बिक्री, प्रसारण अधिकार, मर्चेंडाइज और प्रायोजन से यूरोपीय क्लबों जैसी आमदनी नहीं हो पाती। ऐसे में संचालन की बढ़ती लागत उनके लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। ईस्ट बंगाल के लिए राहत की बात यह है कि इमामी ने क्लब से पूरी तरह रिश्ता नहीं तोड़ा है। इसके बावजूद रिलायंस, सिटी फुटबॉल ग्रुप, टाटा समूह और अब इमामी के फैसलों ने भारतीय फुटबॉल के व्यावसायिक भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अक्टूबर 2026 में प्रस्तावित नए आईएसएल सीजन से पहले क्लबों और लीग के लिए स्थायी आर्थिक मॉडल तैयार करना सबसे बड़ी जरूरत बन गया है।