Jal Jeevan Mission Bilaspur: केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी 'जल जीवन मिशन' योजना बिलासपुर जिले में कागजी दावों और सुस्त कार्यप्रणाली की भेंट चढ़ती दिख रही है। ग्रामीण इलाकों में हर घर तक नल से जल पहुंचाने के नाम पर करोड़ों रुपये तो पानी की तरह बहा दिए गए, लेकिन हकीकत यह है कि आज भी दर्जनों गांवों में लोगों का गला सूखा हुआ है। तय समय-सीमा बीत जाने के बावजूद 151 पानी की टंकियां अधूरी पड़ी हैं, जो अब सिर्फ ढर्रेबाजी का प्रतीक बनकर रह गई हैं। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) विभाग के आंकड़ों पर नजर डालें तो जिले के 516 गांवों में घर-घर जलापूर्ति के लिए कुल 553 आरसीसी (RCC) टंकियां बनाई जानी थीं।
कई गांवों में निर्माण की ईंट भी नहीं रखी गई
हालांकि, जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। अब तक केवल 402 टंकियों का निर्माण ही पूरा हो पाया है। 136 टंकियों पर काम की रफ्तार बेहद धीमी है और 15 गांवों में तो अब तक ईंट भी नहीं रखी जा सकी है। दूरदराज और कम भू-जल स्तर वाले इलाकों के लिए सोलर आधारित जलापूर्ति योजना शुरू की गई थी, लेकिन इसकी हालत भी कुछ अलग नहीं है।
सैकड़ों घरों तक आज तक नहीं पहुंच सका नल कनेक्शन
138 सोलर पंप योजनाओं के तहत 276 जगहों का सर्वे करके वर्क ऑर्डर जारी किए गए थे। इनमें से 257 जगहों पर ही सोलर पंप लग पाए हैं। 7 जगह काम अटका हुआ है, जबकि 12 चिह्नित स्थानों पर काम शुरू करने की सुध तक नहीं ली गई है। एक तरफ टंकियों का निर्माण अटका है, तो दूसरी तरफ गांवों में वितरण पाइपलाइन का काम भी आधा-अधूरा पड़ा है। इसका सीधा असर ग्रामीण आबादी पर पड़ रहा है, जहां सैकड़ों घरों तक आज तक नल का कनेक्शन नहीं पहुंच सका।ग्रामीणें तरस रहे पानी के लिए
भीषण गर्मी और जल संकट के बीच लोग दूर-दराज के स्रोतों से पानी ढोने को मजबूर हैं। विभाग की इस लेत-लतीफी के कारण जल जीवन मिशन का मूल उद्देश्य ही भटक गया है और ग्रामीण बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं।

