जंतर-मंतर हलचल : सरकार से बातचीत से पहले सीजेपी का सख्त रुख, कहा- धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर लिखित में मिले हां या ना
जंतर-मंतर पर आंदोलन कर रही CJP और सरकार के बीच शनिवार को अहम बैठक होगी। संगठन ने दो प्रमुख मांगों पर लिखित आश्वासन, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर स्पष्ट जवाब और प्रशासनिक सुधार की मांग दोहराई है।
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कीर्तिमान न्यूज
25 Jul 2026, 10:16 AM
नई दिल्ली
राजधानी के जंतर-मंतर पर पिछले कई दिनों से डटे 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) के कार्यकर्ताओं और सरकार के बीच आज एक अहम दौर की वार्ता होने जा रही है। हालांकि, बैठक की मेज पर बैठने से ठीक पहले सीजेपी ने अपने तेवर साफ कर दिए हैं। संगठन का स्पष्ट कहना है कि सरकार के साथ जिन मुद्दों पर मौखिक सहमति बनी है, उन पर अब कागजी मुहर लगनी जरूरी है। शनिवार सुबह मीडिया से बात करते हुए सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता आशुतोष रांका ने बातचीत का खाका सामने रखा। उन्होंने बताया कि सरकार ने दोपहर 3:30 से 4 बजे के बीच मुलाकात का वक्त तय किया है, हालांकि बैठक किस जगह होगी, इसकी जानकारी अभी नहीं दी गई है। आशुतोष रांका ने सीधे शब्दों में कहा कि अब आर-पार की बातचीत का वक्त है। उन्होंने कहा, "जिन दो प्रमुख मांगों पर पहले ही सैद्धांतिक सहमति (In-principle agreement) बन चुकी है, उनके लिए हमें आज सरकार से लिखित पुष्टि चाहिए, ताकि समझौते को अंतिम रूप दिया जा सके।"
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर फंसा पेंच
प्रवक्ता के मुताबिक, बीते दिन हुई बैठक में प्रभावितों के मुआवजे और कानूनी पचड़ों को खत्म करने जैसे मुद्दों पर सकारात्मक रुख देखने को मिला था। संगठन को उम्मीद है कि इन बिंदुओं पर आज सरकार ड्राफ्ट सौंप देगी। बातचीत में सबसे बड़ा पेंच शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर फंसा हुआ है। रांका ने दोटूक कहा कि इस मामले पर अब और विचार-विमर्श की गुंजाइश नहीं बची है।
"सरकार को धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर आज 'हाँ' या 'ना' में साफ़ जवाब देना होगा। अगर सरकार उन्हें पद से हटाने को तैयार नहीं है, तो वो सीधे मना कर दे। कम से कम हमें स्थिति स्पष्ट होगी तो हम अपनी आगे की रणनीति तय कर सकेंगे। बिना किसी ठोस फैसले के ऐसी बैठकों का कोई औचित्य नहीं रह जाता।" — आशुतोष रांका, प्रवक्ता (CJP)
लिखित समझौते की मांगNEET पेपर लीक की जिम्मेदारी शिक्षा मंत्री की
पेपर लीक मामले में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के 47 अधिकारियों को बर्खास्त किए जाने के सवाल पर सीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि यह सिर्फ ऊपरी लीपापोती है। उन्होंने कहा कि बर्खास्तगी की बारीकियों को देखना बाकी है, लेकिन मुख्य सवाल जवाबदेही का है। NEET पेपर लीक और उसके बाद देश भर में छात्रों द्वारा उठाए गए आत्मघाती कदमों की सीधी नैतिक जिम्मेदारी शिक्षा मंत्री की बनती है। जब तक शीर्ष स्तर पर जवाबदेही तय नहीं होती और बड़े प्रशासनिक सुधार नहीं किए जाते, तब तक यह लड़ाई जारी रहेगी।
नम वांगचुक की ट्रोलिंग पर जताया आक्रोश
प्रसिद्ध पर्यावरणविद् और आंदोलनकारी सोनम वांगचुक के हालिया वीडियो मैसेज और उन्हें निशाना बनाए जाने पर आशुतोष रांका ने गहरा दुख जताया।
दक्षिणपंथी ट्रोलिंग पर: उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति ने देश के युवाओं और बेहतर भविष्य के लिए 26 दिनों तक अपनी जान जोखिम में डालकर अनशन किया, उसे आज कुछ समूहों द्वारा सोशल मीडिया पर ट्रोल किया जा रहा है। देश के लिए इससे ज्यादा शर्मनाक बात दूसरी नहीं हो सकती।
कांग्रेस नेता की टिप्पणी पर जवाब: कांग्रेस सांसद इमरान मसूद द्वारा वांगचुक को 'अन्ना पार्ट टू' बताने और 'निजी डील' के आरोप लगाने पर रांका ने कहा कि विपक्षी दल क्या सोच रहा है, यह वे जानें। लेकिन सोनम वांगचुक की नीयत और उनके संघर्ष पर सवाल उठाना पूरी तरह से गलत और बेबुनियाद है।
आज दोपहर होने वाली इस बैठक पर अब सबकी नजरें टिकी हैं कि क्या सरकार सीजेपी की लिखित शर्तों को स्वीकार करती है या आंदोलन और उग्र रूप लेता है।