कमाली मंदिर विवाद : मंदिर से मूर्तियां हटाने पर मचा हंगामा, श्रद्धालुओं के दबाव में फिर हुई स्थापना
भोपाल के ऐतिहासिक कमाली मंदिर से प्राचीन मूर्तियां हटाए जाने पर स्थानीय लोगों और हिंदू संगठनों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद प्रतिमाओं को दोबारा उनके मूल स्थान पर स्थापित किया गया। श्रद्धालुओं ने मंदिर परिसर में शॉपिंग कॉम्प्लेक्स बनाने की कथित योजना की जांच और मंदिर के जीर्णोद्धार की मांग की।
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कीर्तिमान न्यूज
10 Jul 2026, 11:23 AM
भोपाल
भोपाल के घोड़ा नक्कास इलाके में स्थित ऐतिहासिक कमाली मंदिर गुरुवार को अचानक भारी हंगामे और विरोध-प्रदर्शन का अखाड़ा बन गया। मामला मंदिर परिसर से प्राचीन मूर्तियों को हटाए जाने से जुड़ा है, जिसकी भनक लगते ही स्थानीय लोग और हिंदू संगठनों के पदाधिकारी बड़ी संख्या में मौके पर जमा हो गए और नारेबाजी शुरू कर दी।
प्रदर्शनकारियों का सीधा आरोप है कि मंदिर परिसर में एक नया शॉपिंग कॉम्प्लेक्स बनाने की गुपचुप तैयारी चल रही है। इसी कमर्शियल कंस्ट्रक्शन को रास्ता देने के लिए सालों पुरानी और पूजनीय प्रतिमाओं को उनके मूल स्थान से हटा दिया गया।
रात के अंधेरे में मूर्तियों को किया शिफ्ट
हिंदू संगठनों का कहना है कि जिस मंदिर से हजारों श्रद्धालुओं की गहरी आस्था जुड़ी है, वहां रात के अंधेरे में चुपचाप मूर्तियों को शिफ्ट कर दिया गया। जैसे ही यह खबर सुबह भोपाल के पुराने शहर में फैली, लोगों का गुस्सा भड़क गया और वे मंदिर परिसर में इकट्ठा होने लगे। मामला बढ़ता देख और जनभावनाओं के दबाव में आखिरकार मूर्तियों को दोबारा उनके तय स्थान पर रखना पड़ा।
धार्मिक व्यवस्था से न हो छेड़छाड़
हिंदू उत्सव समिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी और समाज के अन्य वरिष्ठ नागरिकों की मौजूदगी में प्रतिमाओं को फिर से उनके मूल स्थान पर सम्मानपूर्वक स्थापित कराया गया। हालांकि, प्रदर्शनकारी सिर्फ इतने पर शांत नहीं हुए, उन्होंने मांग की है कि मंदिर का जीर्णोद्धार किया जाए और परिसर की मूल धार्मिक व्यवस्था से कोई छेड़छाड़ न हो। इस पूरे विवाद के बीच मंदिर की जमीन का एक बेहद दिलचस्प ऐतिहासिक पहलू भी सामने आया है।
विरोध प्रदर्शनजमीन पर भू-माफियाओं की नजर
हिंदू उत्सव समिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने बताया: "नवाब काल के दौरान कमाली बाबा को यह जमीन दान में मिली थी। मान्यता है कि बाबा द्वारा बजाए गए शंख की आवाज जितनी दूर तक गूंजी थी, उतनी पूरी जमीन इस मंदिर को सौंपी गई थी।" तिवारी ने आरोप लगाया कि इस ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व की जमीन पर पहले से ही कई व्यावसायिक गतिविधियां चलाई जा रही हैं और अब भू-माफिया या प्रबंधन मिलकर यहां मॉल या शॉपिंग कॉम्प्लेक्स तानने की फिराक में हैं।
वादा मंदिर बनाने का पर नहीं हुआ पूर्ण
गुस्साए स्थानीय निवासियों ने मंदिर प्रबंधन की नीयत पर भी सवाल उठाए हैं। लोगों का कहना है कि सालों पहले प्रबंधन ने वादा किया था कि यहां लाल पत्थरों से एक भव्य और नक्काशीदार मंदिर का निर्माण कराया जाएगा। लेकिन आज 6 साल बीत जाने के बाद भी धरातल पर एक ईंट तक नहीं रखी गई। श्रद्धालुओं का आरोप है कि मंदिर के विकास और सौंदर्यीकरण को ठंडे बस्ते में डालकर पूरा ध्यान सिर्फ व्यावसायिक फायदे (कमर्शियल एक्टिविटीज) पर लगाया जा रहा है, जिसे भोपाल की जनता किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगी।