इस बार श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व विशेष संयोग लेकर आ रहा है। मथुरा-वृंदावन से लेकर इंदौर तक स्मार्त और वैष्णव परंपरा के मंदिरों में चार सितंबर को मध्यरात्रि में एक ही समय भगवान श्रीकृष्ण की जन्म आरती होगी। ज्योतिर्विदों के मुताबिक, इस बार जन्माष्टमी पर द्वापर युग में भगवान कृष्ण के जन्म के समय बने संयोग से मिलता-जुलता दुर्लभ योग बन रहा है। भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि तीन सितंबर की रात से शुरू होकर चार सितंबर की मध्यरात्रि के बाद तक रहेगी। इसी दौरान रोहिणी नक्षत्र का संयोग भी बन रहा है। इसके अलावा चंद्रमा वृषभ राशि में रहेगा। अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र और वृषभ राशि में चंद्रमा की स्थिति को पर्वकालीन अष्टमी और जयंती योग के रूप में देखा जा रहा है।
जन्माष्टमी पर अष्टमी-रोहिणी का दुर्लभ संयोग
ज्योतिर्विद आचार्य रामचंद्र शर्मा वैदिक के अनुसार, तीन सितंबर को सप्तमी तिथि रात 2:25 बजे तक रहेगी। इसके बाद अष्टमी तिथि शुरू होगी, जो चार सितंबर की रात 12:13 बजे तक रहेगी। रोहिणी नक्षत्र तीन सितंबर की रात 12:29 बजे से शुरू होकर चार सितंबर की रात 11:03 बजे तक रहेगा। चंद्रमा तीन सितंबर की सुबह 7:25 बजे वृषभ राशि में प्रवेश करेगा और पांच सितंबर की सुबह 10:17 बजे तक इसी राशि में रहेगा। इस कारण इस बार कालाष्टमी और श्रीकृष्ण जयंती व्रत का भी विशेष संयोग बन रहा है। धर्मशास्त्रों में जन्माष्टमी व्रत को विशेष पुण्यदायी माना गया है। भविष्योत्तर पुराण में इसकी महिमा का वर्णन करते हुए इसे करोड़ों एकादशी व्रत के समान फलदायी बताया गया है। वहीं, ब्रह्मवैवर्त पुराण में जन्माष्टमी व्रत को कई जन्मों के पापों से मुक्ति दिलाने वाला बताया गया है।

गोपाल मंदिर में 11 ब्राह्मण करेंगे अभिषेक
ज्योतिर्विद श्यामप्रसाद तिवारी के अनुसार, स्मार्त परंपरा में जन्माष्टमी के निर्धारण के लिए अष्टमी तिथि का निशीथकाल यानी मध्यरात्रि में होना प्रमुख आधार माना जाता है। वहीं वैष्णव परंपरा में अष्टमी तिथि के साथ रोहिणी नक्षत्र का संयोग विशेष महत्व रखता है। व्रत की तिथि निर्धारित करने में सूर्योदय के समय मौजूद तिथि को भी ध्यान में रखा जाता है। राजवाड़ा स्थित प्राचीन गोपाल मंदिर में जन्माष्टमी को लेकर विशेष तैयारियां की जा रही हैं। मंदिर के पुजारी बालमुकुंद शास्त्री के अनुसार, इस बार पर्वकालीन अष्टमी का संयोग बन रहा है। सुबह भगवान बाल गोपाल का पंचामृत अभिषेक किया जाएगा। इसके बाद उन्हें नवीन वस्त्र पहनाकर भोग अर्पित किया जाएगा। रात 11 बजे 11 ब्राह्मणों द्वारा विशेष अभिषेक और पूजन कराया जाएगा। इसके बाद मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण की जन्म आरती होगी।
इस्कॉन मंदिर में होगा प्राकट्य उत्सव
वैष्णव परंपरा के इस्कॉन मंदिर में चार सितंबर को कृष्ण जन्माष्टमी का मुख्य आयोजन होगा। मंदिर के अध्यक्ष महामन प्रभु के अनुसार, दिनभर विशेष दर्शन, हरिनाम संकीर्तन, भजन-कीर्तन और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण का प्राकट्य उत्सव मनाया जाएगा। आयोजकों के मुताबिक, इस आयोजन में 20 हजार से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। जन्माष्टमी महोत्सव की शुरुआत 28 अगस्त से ही विभिन्न कार्यक्रमों के साथ होगी।
25 साल में पांच बार एक ही दिन पड़ी जन्माष्टमी
पिछले 25 वर्षों में ऐसे संयोग पांच बार बने हैं, जब जन्माष्टमी एक ही दिन मनाई गई।
- 30 अगस्त 2021
- 14 अगस्त 2017
- 28 अगस्त 2013
- 24 अगस्त 2008
- 31 अगस्त 2002