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पूर्ण सूर्य ग्रहण
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सूर्य ग्रहण: आज लगेगा साल का दूसरा ग्रहण, भारत में सूतक मान्य होगा या नहीं?

आज साल 2026 का दूसरा और पूर्ण सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है। यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां सूतक काल मान्य नहीं होगा। पूर्ण ग्रहण ग्रीनलैंड, आइसलैंड, उत्तरी रूस और स्पेन समेत कुछ क्षेत्रों में दिखाई देगा।

कीर्तिमान डेस्क
प्रकाशित: 12 Aug 2026, 05:32 PM · अपडेट: 11 Sep 2026, 11:16 AM
धर्म डेस्क
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
साल 2026 का दूसरा सूर्य ग्रहण आज यानी 12 अगस्त को लगने जा रहा है। यह पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा। खगोलीय दृष्टि से यह साल की महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक है। हालांकि भारत में रहने वाले लोग इस ग्रहण को नहीं देख पाएंगे। दुनिया के कुछ हिस्सों में पूर्ण सूर्य ग्रहण दिखाई देगा, जबकि बड़े इलाके में सूर्य आंशिक रूप से ढका नजर आएगा।
आज का सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। NASA के मुताबिक पूर्ण ग्रहण का मुख्य रास्ता उत्तरी रूस से शुरू होकर ग्रीनलैंड, आइसलैंड और उत्तरी अटलांटिक से गुजरते हुए स्पेन और पुर्तगाल के एक छोटे हिस्से तक जाएगा। यूरोप, उत्तरी अमेरिका और अफ्रीका के कई इलाकों में आंशिक सूर्य ग्रहण देखने को मिलेगा। भारत इस ग्रहण के दृश्य क्षेत्र में नहीं है। इसी वजह से यहां लोग सूर्य और चंद्रमा के इस खगोलीय नजारे को प्रत्यक्ष रूप से नहीं देख सकेंगे। धार्मिक मान्यताओं में आमतौर पर ग्रहण उसी क्षेत्र के लिए प्रभावी माना जाता है, जहां वह दिखाई देता है। 

पूर्ण सूर्य ग्रहण
भारत में सूतक काल को लेकर क्या मान्यता?

चूंकि आज का सूर्य ग्रहण भारत में नजर नहीं आएगा, इसलिए ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार यहां इसका सूतक काल भी मान्य नहीं माना जा रहा है। इस आधार पर मंदिरों और दैनिक धार्मिक गतिविधियों को लेकर ग्रहण से जुड़े सामान्य प्रतिबंध लागू नहीं माने जाते। यह धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यता का विषय है। विज्ञान ग्रहण के सूतक या राशि आधारित प्रभावों की पुष्टि नहीं करता। पूर्ण सूर्य ग्रहण का शानदार नजारा ग्रीनलैंड, आइसलैंड, उत्तरी रूस और स्पेन के कुछ हिस्सों में दिखाई देगा। पुर्तगाल के एक छोटे हिस्से से भी पूर्ण ग्रहण देखा जा सकेगा। इसके अलावा यूरोप के बड़े हिस्से, कनाडा और अमेरिका के कुछ क्षेत्रों तथा उत्तर-पश्चिमी अफ्रीका में आंशिक सूर्य ग्रहण दिखाई देगा। पूर्णता के रास्ते में मौजूद अधिकांश स्थानों पर सूर्य पूरी तरह ढकने की अवधि दो मिनट से कम रहेगी। 

कैसे लगता है सूर्य ग्रहण?

कुछ स्थानों पर यह अवधि दो मिनट से थोड़ी अधिक हो सकती है। सूर्य ग्रहण उस समय होता है, जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है। ऐसी स्थिति में चंद्रमा सूर्य की रोशनी को पृथ्वी तक पहुंचने से कुछ समय के लिए रोक देता है। जिन इलाकों पर चंद्रमा की गहरी छाया पड़ती है, वहां पूर्ण सूर्य ग्रहण दिखाई देता है। आसपास के बड़े क्षेत्र में आंशिक सूर्य ग्रहण नजर आ सकता है। ज्योतिष में सूर्य को ऊर्जा, आत्मविश्वास, सत्ता और नेतृत्व से जोड़कर देखा जाता है। इसी कारण सूर्य ग्रहण को भी विशेष ज्योतिषीय घटना माना जाता है। ग्रहण के दौरान पूजा-पाठ, मंत्र जाप और ध्यान करने जैसी कई परंपराएं प्रचलित हैं। हालांकि ग्रहण के कारण प्राकृतिक आपदा, राजनीतिक बदलाव, दुर्घटना या किसी विशेष राशि के लोगों के जीवन में निश्चित घटना होने जैसे दावे वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नहीं हैं।

सूर्य ग्रहण देखते समय सुरक्षा सबसे जरूरी

ऐसे दावों को ज्योतिषीय मान्यता या आकलन के रूप में ही देखना उचित है। जिन देशों में यह ग्रहण दिखाई देगा, वहां इसे सामान्य धूप के चश्मे या नंगी आंखों से नहीं देखना चाहिए। आंशिक चरण के दौरान सूर्य को देखने के लिए प्रमाणित सोलर व्यूइंग ग्लास या सुरक्षित सोलर फिल्टर का इस्तेमाल जरूरी है। कैमरा, दूरबीन या टेलीस्कोप से सूर्य देखने के लिए भी विशेष सोलर फिल्टर की आवश्यकता होती है। भारत में यह सूर्य ग्रहण दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां प्रत्यक्ष रूप से ग्रहण देखने का मौका नहीं मिलेगा। इच्छुक लोग अधिकृत वैज्ञानिक संस्थानों की ऑनलाइन कवरेज के जरिए इस खगोलीय घटना को देख सकते हैं।
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