Chhattisgarh Flood News: 10 हजार एकड़ धान डूबी, रेत जमने से सहमे किसान, बीमा के नियमों में फंसा मुआवजा
Chhattisgarh Flood News: धमतरी जिले में भारी बारिश और गंगरेल बांध से छोड़े गए ढाई लाख क्यूसेक पानी के कारण बाढ़ की स्थिति बन गई, जिससे करीब 4 हजार हेक्टेयर धान की फसल प्रभावित हुई है। रुद्री, मुजगहन, रत्नाबांधा समेत कई गांवों के खेतों में पानी भर गया और कई जगह फसल बहने के साथ रेत-मिट्टी जम गई। पक चुकी धान की फसल को सबसे ज्यादा नुकसान की आशंका है। फसल बीमा के नियमों के कारण किसानों को मुआवजा मिलने में परेशानी की संभावना है, जिसे देखते हुए प्रशासन ने विशेष राहत के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा है।
प्रकाशित: 28 Sep 2026, 09:31 AM· 3 मिनट पढ़ने का समय
धमतरी
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Chhattisgarh Flood News: जिले में पिछले दो दिनों से जारी मूसलाधार बारिश और नदियों के उफान ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। गंगरेल बांध से रुद्री और महानदी में छोड़े गए ढाई लाख क्यूसेक पानी के कारण तटीय इलाकों में बाढ़ की स्थिति बन गई। इस प्राकृतिक आपदा की सबसे बड़ी मार लहलहाती खरीफ फसलों पर पड़ी है, जहां करीब 4000 हेक्टेयर (लगभग 10 हजार एकड़) में लगी धान की फसल जलमग्न हो चुकी है।
तेज बहाव में बही फसलें, खेतों में बिछी रेत की परत
बारिश थमने के बाद अब जलभराव वाले इलाकों से पानी की निकासी तो शुरू हो गई है, लेकिन किसानों की मुसीबतें कम नहीं हुई हैं। कई निचले इलाकों में तेज बहाव के कारण फसलें पूरी तरह बह गईं, वहीं कई खेतों में बाढ़ का पानी उतरने के बाद धान पर रेत और मिट्टी की मोटी परत जम गई है। कृषि विभाग के उपसंचालक मोनेश कुमार साहू के मुताबिक, जो फसलें पककर तैयार थीं या गबोद (गाभा) अवस्था में थीं, उन्हें सबसे अधिक नुकसान की आशंका है। हालांकि, लेट वैरायटी की फसलों के इस आपदा से सुरक्षित निकलने की उम्मीद जताई जा रही है।
बाढ़ से डूबे किसानों के खेत ये गांव हुए सबसे ज्यादा प्रभावित
महानदी के तटीय और मैदानी इलाकों के दर्जनों गांवों में बाढ़ का सीधा असर देखा जा रहा है। इनमें मुख्य रूप से:
रुद्री, मुजगहन, रत्नाबांधा, पोटियाडीह और परसतराई
खरतुली, कोलियारी, अछोटा, तेलीनसत्ती और खरेंगा
देवपुर, मुड़पार, बरारी और कोटाभर्री
इन गांवों के खेतों में अब भी जगह-जगह पानी जमा है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समय रहते पानी पूरी तरह नहीं निकला, तो लंबे समय तक डूबे रहने के कारण धान के पौधे सड़ जाएंगे।
नियमों का अड़ंगा: फसल बीमा कराने के बावजूद हाथ खाली रहने का डर
बाढ़ से पस्त किसानों के सामने एक और बड़ा संकट खड़ा हो गया है। फसल डूबने के बावजूद प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के मौजूदा नियमों के तहत किसानों को मुआवजा मिलने में पेंच फंसा हुआ है। दरअसल, धान को प्राकृतिक रूप से जलीय पौधा माना जाता है। योजना के मौजूदा प्रावधानों के अनुसार, केवल फसल कटाई के बाद के 14 दिनों में खेत में पानी भरने से हुए नुकसान की भरपाई का ही नियम है। खड़ी फसल में बाढ़ से हुए नुकसान को लेकर फिलहाल प्रत्यक्ष भरपाई का सीधा प्रावधान नहीं है।
राहत की उम्मीद: शासन को भेजा गया विशेष प्रस्ताव
किसानों की इस गंभीर समस्या को देखते हुए जिला प्रशासन और कृषि विभाग ने राज्य शासन से हस्तक्षेप की मांग की है। धान को जलीय पौधा मानने के बावजूद, इस अभूतपूर्व बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रभावित किसानों को विशेष राहत देने के लिए एक प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। यदि सरकार इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है, तो न केवल इस बार किसानों को राहत मिलेगी, बल्कि भविष्य में भी बाढ़ आपदा के दौरान बीमा सुरक्षा का दायरा बढ़ सकेगा।