खैरागढ़ में स्थित इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय अब भारतीय कला और संस्कृति की शिक्षा का अंतरराष्ट्रीय केंद्र बनता जा रहा है। एशिया के पहले राजकुमारी इंदिरा सिंह संगीत एवं कला विश्वविद्यालय में नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए विदेशों से बड़ी संख्या में आवेदन प्राप्त हुए हैं। भारतीय शास्त्रीय संगीत, लोकसंगीत, ललित कला, पेंटिंग, ग्राफिक्स, थियेटर, कत्थक और भरतनाट्यम जैसी विधाओं की पढ़ाई के लिए 23 देशों के 253 विद्यार्थियों ने प्रवेश के लिए आवेदन किया है।
23 देशों के विद्यार्थियों ने जताई पढ़ाई में रुचि
इस बार विश्वविद्यालय में बांग्लादेश, श्रीलंका, अंगोला, ब्राजील, कनाडा, इस्वातिनी, फिजी, इंडोनेशिया, ईरान, लाओस, मेडागास्कर, मॉरीशस, म्यांमार, सीरिया, यमन, नेपाल, अमेरिका, फिलिस्तीन, रूस, सूडान, तंजानिया, ट्यूनीशिया और त्रिनिदाद एंड टोबैगो समेत 23 देशों से आवेदन आए हैं। इनमें सबसे ज्यादा 187 आवेदन बांग्लादेश से प्राप्त हुए हैं। इसके बाद श्रीलंका से 31, मॉरीशस और रूस से 6-6 विद्यार्थियों ने प्रवेश के लिए आवेदन किया है।
छोटे शहर की शिक्षा व्यवस्था बनी विदेशी छात्रों की पसंद
छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ स्थित इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय में विदेशी विद्यार्थियों का रुझान लगातार बढ़ रहा है। शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए 23 देशों से 253 आवेदन मिले हैं, जिनमें बांग्लादेश से सबसे ज्यादा आवेदन आए हैं। भारतीय शास्त्रीय संगीत, लोकसंगीत, कत्थक, भरतनाट्यम, थियेटर और ललित कला जैसी विधाओं की पढ़ाई के लिए विदेशी छात्र खैरागढ़ को पसंद कर रहे हैं। विश्वविद्यालय की बेहतर शिक्षा व्यवस्था, गुरु-शिष्य परंपरा और शांत वातावरण इसकी बड़ी वजह मानी जा रही है।
22 विदेशी विद्यार्थियों ने लिया था प्रवेश
पिछले शैक्षणिक सत्र में विश्वविद्यालय को 232 विदेशी विद्यार्थियों के आवेदन मिले थे, जिनमें से 22 छात्रों को प्रवेश दिया गया था। उस समय बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल, मॉरीशस, दक्षिण अफ्रीका और वियतनाम समेत कई देशों के विद्यार्थियों ने संगीत और कला की विभिन्न विधाओं में दाखिला लिया था। पिछले सत्र में हिंदी साहित्य में भी विदेशी विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया था। इसके अलावा विश्वविद्यालय में पीएचडी के लिए भी विदेशी शोधार्थी आवेदन करते हैं। इससे पहले अफगानिस्तान समेत कई देशों के विद्यार्थी यहां शोध कार्य पूरा कर चुके हैं।
भारतीय कला को वैश्विक पहचान
भारतीय शास्त्रीय संगीत, लोकसंगीत, नृत्य, नाट्यकला और ललित कलाओं के प्रति दुनिया में बढ़ती रुचि का असर खैरागढ़ विश्वविद्यालय में दिखाई दे रहा है। विश्वविद्यालय लगातार विदेशी विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति से जोड़ने और उन्हें बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रहा है।
कुलपति ने बताया- गुणवत्ता और सुविधाओं पर जोर
विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. डॉ. लवली शर्मा ने कहा कि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना विश्वविद्यालय की प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि विदेशी विद्यार्थियों की बढ़ती संख्या विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि शोध की सीटें बढ़ाने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है।