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खाद-बीज वितरण करते अधिकारी और किसान
खाद-बीज वितरण करते अधिकारी और किसान
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खरीफ सीजन : जशपुर में किसानों की बल्ले-बल्ले! सहकारी समितियां हुईं दोगुनी, ₹37.79 करोड़ का कृषि ऋण जारी 

खरीफ सीजन को देखते हुए जशपुर जिला प्रशासन और कृषि विभाग ने किसानों के लिए खाद, उन्नत बीज और कृषि ऋण की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की है। जिले की 44 सहकारी समितियों में कृषि आदानों का पर्याप्त भंडारण किया गया है तथा उर्वरकों की कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने के लिए सघन निगरानी अभियान चलाया जा रहा है।

कीर्तिमान डेस्क
प्रकाशित: 18 Jun 2026, 05:04 PM · अपडेट: 11 Sep 2026, 02:01 AM
रायपुर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

खरीफ सीजन के आगमन के साथ ही जशपुर जिले में कृषि गतिविधियों ने रफ्तार पकड़ ली है। अन्नदाताओं को खेती-किसानी में किसी भी तरह की असुविधा न हो, इसके लिए जिला प्रशासन और कृषि व सहकारिता विभाग ने कमर कस ली है। जिले में खाद, उन्नत बीज और कृषि ऋण की चाक-चौबंद व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। आदिम जाति सेवा सहकारी समितियों में कृषि आदानों (इन्पुट्स) का पर्याप्त बैकअप तैयार है, जिससे किसानों को ऐन वक्त पर भटकना न पड़े।

किसानों के हितों की रक्षा के लिए प्रशासन इस बार बेहद सख्त रुख अपनाए हुए है। उर्वरकों की कालाबाजारी, अवैध भंडारण और जमाखोरी को रोकने के लिए जिले भर में सघन निगरानी अभियान चलाया जा रहा है। निजी डीलरों और सहकारी समितियों पर फ्लाइंग स्क्वाड नजर रख रहे हैं। 

वैज्ञानिक खेती और संतुलित उर्वरक उपयोग पर जोर

उप संचालक कृषि एम.आर. भगत ने बताया कि जिले में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV) की नवीनतम अनुशंसाओं के आधार पर ही उर्वरकों का वितरण किया जा रहा है। कृषि विभाग का मैदानी अमला गांव-गांव पहुंचकर किसानों को 'मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन' की जानकारी दे रहा है। किसानों को केवल रासायनिक खादों पर निर्भर न रहकर संतुलित उर्वरक उपयोग, हरी खाद और जैविक विकल्पों (जैसे वर्मीकम्पोस्ट) को अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है, ताकि लंबे समय तक भूमि की उपजाऊ क्षमता बनी रहे।

किसानों की सहूलियत के लिए 24 से बढ़कर 44 हुईं समितियां

इस साल जशपुर के किसानों के लिए सबसे बड़ी राहत की खबर यह है कि जिले में सहकारी समितियों का दायरा बढ़ा दिया गया है। किसानों की सुविधा और लंबी दूरी की यात्रा को खत्म करने के लिए सहकारी समितियों की संख्या 24 से बढ़ाकर 44 कर दी गई है। इस क्रांतिकारी कदम से किसानों को अब अपने घर के पास ही खाद-बीज मिल रहा है, जिससे उनके समय और परिवहन पर होने वाले खर्च (ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट) में भारी बचत हो रही है।

खाद और धान बीज के भंडारण एवं वितरण के ताजा आंकड़े

वर्तमान में जिले की सभी 44 सहकारी समितियों में खाद-बीज की लोडिंग और वितरण का काम युद्धस्तर पर जारी है। अब तक के ताजा आंकड़े इस प्रकार हैं:

  • रासायनिक उर्वरक: कुल 9,285 मीट्रिक टन उर्वरक का भंडारण किया जा चुका है, जिसमें से 3,681 मीट्रिक टन का सुरक्षित वितरण किसानों को किया जा चुका है।

  • धान बीज: कुल 6,836 क्विंटल उन्नत धान बीज का भंडारण है, जिसमें से 1,872 क्विंटल बीज किसान अपने साथ ले जा चुके हैं। आगामी हफ्तों में मांग बढ़ने की संभावना को देखते हुए लगातार नया स्टॉक मंगाया जा रहा है।

किसानों को मिली वित्तीय संजीवनी

खेती की शुरुआती लागत और इनपुट्स खरीदने के लिए जिले के किसानों को बड़े पैमाने पर लोन की सुविधा दी गई है। सहकारी समितियों के माध्यम से अब तक 10,187 किसानों को कुल 37 करोड़ 79 लाख 12 हजार रुपये का कृषि ऋण (KCC) वितरित किया जा चुका है। ऋण का वर्गीकरण: इस कुल राशि में से 31 करोड़ 33 लाख 08 हजार रुपये नगद के रूप में दिए गए हैं, जबकि 6 करोड़ 46 लाख 04 हजार रुपये वस्तु ऋण (खाद-बीज के रूप में) उपलब्ध कराए गए हैं। इस समय पर मिली आर्थिक मदद से किसानों को साहूकारों के चक्कर नहीं काटने पड़ रहे हैं।

निरीक्षण और औचक निरीक्षण के लिए नोडल अधिकारी तैनात

कृषि विभाग ने यह साफ कर दिया है कि पूरे खरीफ सीजन के दौरान इनपुट्स की सप्लाई चेन में कोई रुकावट नहीं आने दी जाएगी। इसके लिए वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी (SADO) और ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों (RAEO) की विशेष टीमें बनाई गई हैं। ये टीमें लगातार सहकारी समितियों और निजी रिटेल काउंटरों का औचक निरीक्षण (सप्राइज इंस्पेक्शन) कर रही हैं, ताकि स्टॉक रजिस्टर और वास्तविक उपलब्धता में कोई गड़बड़ी न हो।

प्रशासन की अपील

कृषि विभाग ने जशपुर के सभी किसान भाइयों से अपील की है कि वे कृषि वैज्ञानिकों द्वारा अनुशंसित मात्रा में ही खादों का इस्तेमाल करें और 'मृदा स्वास्थ्य कार्ड' के अनुसार ही खेती करें। साथ ही, यदि जिले में कहीं भी खाद-बीज की किल्लत, ओवररेटिंग या टैगिंग (खाद के साथ जबरन दूसरी सामग्री बेचना) की शिकायत सामने आती है, तो उसकी सूचना तुरंत स्थानीय प्रशासन या कृषि विभाग के कंट्रोल रूम को दें, ताकि दोषियों पर तत्काल सख्त एक्शन लिया जा सके। 

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