पूर्व संसदीय सचिव और महासमुंद के पूर्व विधायक विनोद सेवन लाल चंद्राकर ने सहारा रिफंड को लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि सहारा रिफंड पोर्टल शुरू हुए करीब साढ़े तीन साल हो चुके हैं, लेकिन अब तक अधिकांश निवेशकों को उनकी जमा राशि वापस नहीं मिल पाई है। उन्होंने इसे निवेशकों के साथ छल और वादा खिलाफी करार दिया।
1.45 करोड़ से अधिक आवेदन दर्ज होने का दावा
विनोद चंद्राकर ने कहा कि केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने 18 जुलाई 2023 को सहारा रिफंड पोर्टल की शुरुआत की थी। उस समय निवेशकों को उनकी राशि वापस दिलाने का भरोसा दिया गया था। चंद्राकर के मुताबिक, 19 अगस्त 2026 तक देशभर में पोर्टल पर 1 करोड़ 45 लाख 79 हजार 780 आवेदन दर्ज हो चुके हैं।
उन्होंने दावा किया कि इतनी बड़ी संख्या में आवेदन होने के बावजूद अब तक 2 प्रतिशत निवेशकों को भी उनकी राशि वापस नहीं मिल सकी है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के भी बड़ी संख्या में निवेशकों ने रिफंड के लिए आवेदन किया है और वे लंबे समय से अपनी जमा पूंजी वापस मिलने का इंतजार कर रहे हैं।
चुनाव के बाद पोर्टल निष्क्रिय करने का लगाया आरोप
पूर्व विधायक ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल और बिहार विधानसभा चुनावों से पहले कुछ निवेशकों को उनकी बकाया राशि के मुकाबले केवल 10 से 20 हजार रुपये देकर भुगतान की औपचारिकता पूरी की गई। उन्होंने दावा किया कि चुनाव समाप्त होने के बाद रिफंड पोर्टल को निष्क्रिय कर दिया गया।
इंतजार के दौरान कई निवेशकों की मौत का दावा
चंद्राकर ने कहा कि वर्षों से रिफंड का इंतजार करते हुए कई बुजुर्ग निवेशकों की मृत्यु हो गई। उन्होंने कहा कि ऐसे परिवारों की स्थिति बेहद चिंताजनक है, क्योंकि उनकी जमा पूंजी वापस नहीं मिलने से परिवार आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के पास निवेशकों के आवेदन और आंकड़े मौजूद हैं, लेकिन इसके बावजूद समाधान की दिशा में अपेक्षित तेजी नहीं दिखाई जा रही है। उन्होंने कहा कि निवेशक आज भी कलेक्टर और मंत्रियों के कार्यालयों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं।
छत्तीसगढ़ में चिटफंड मामलों का भी किया जिक्र
पूर्व संसदीय सचिव ने कहा कि छत्तीसगढ़ में पिछली कांग्रेस सरकार के दौरान चिटफंड कंपनियों के निवेशकों की राशि वापस कराने के लिए कार्रवाई शुरू की गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के सत्ता में आने के बाद यह प्रक्रिया बंद हो गई। उन्होंने कहा कि भाजपा के घोषणा पत्र में सहारा निवेशकों को राशि वापस दिलाने का वादा किया गया था, लेकिन यह वादा अब तक पूरा नहीं हुआ है। चंद्राकर ने कहा कि एक ओर सरकार विकास और उपलब्धियों की बात करती है, वहीं दूसरी ओर निवेशक अपनी मेहनत की कमाई के लिए परेशान हैं।
रिफंड पोर्टल दोबारा शुरू करने की मांग
विनोद चंद्राकर ने केंद्र सरकार से सहारा रिफंड पोर्टल को तत्काल पुनः सक्रिय करने की मांग की। उन्होंने कहा कि लंबित सभी आवेदनों का समयबद्ध निराकरण किया जाए और जिन निवेशकों की मृत्यु हो चुकी है, उनके परिजनों को प्राथमिकता के आधार पर भुगतान किया जाए। उन्होंने कहा कि निवेशकों की जमा राशि का मूलधन और नियमानुसार ब्याज वापस करना सरकार की नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी है। साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार से इस मामले में स्पष्ट समयसीमा तय कर निवेशकों को राहत देने की मांग की।