छत्तीसगढ़ पुलिस का एक ऐसा कारनामा सामने आया है, जिसने पूरे महकमे में हड़कंप मचा दिया है। थानों में शिकायतकर्ताओं से पुलिस के 'खर्चे-पानी' की बातें तो आम हैं, लेकिन कटघोरा थाने की पुलिस ने एक कदम आगे बढ़ते हुए प्रार्थी से ही अपनी फ्लाइट की टिकटें बुक करवा लीं। वह भी एक-दो नहीं, बल्कि टीआई (थाना प्रभारी) समेत पूरे 8 पुलिसकर्मियों की! मामला वरिष्ठ अधिकारियों के संज्ञान में आते ही बिलासपुर रेंज के आईजी ने पूरी टीम को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। दरअसल, कटघोरा पुलिस 55 करोड़ रुपये की कथित ठगी के एक हाई-प्रोफाइल मामले की जांच कर रही थी।
शिकायतकर्ता के खर्चे पर फ्लाइट
आरोपी की तलाश में पुलिस टीम को दिल्ली जाना था। अमूमन ऐसी जांच के लिए पुलिस टीम सड़क या ट्रेन मार्ग का इस्तेमाल करती है, लेकिन इस मामले में कटघोरा पुलिस ने नियम-कायदों को ताक पर रखते हुए शिकायतकर्ता गौरव मोदी के खर्चे पर दिल्ली की फ्लाइट पकड़ ली। हैरानी की बात यह है कि इस 'वीआईपी यात्रा' की भनक आला अधिकारियों को भी नहीं लगने दी गई।
निलंबित हुए ये पुलिसकर्मी को किया गया है, उनमें शामिल हैं:
निरीक्षक मोती पटेल (थाना प्रभारी, कटघोरा)
उप निरीक्षक राम पाण्डेय
प्रधान आरक्षक गुनाराम सिन्हा, गोपाल यादव और राजेश कंवर
आरक्षक प्रदीप राठौर, सुशील यादव और प्रशांत सिंह
तथ्यों के आधार पर होगा एक्शन
कोरबा एसपी सिद्धार्थ तिवारी ने इस कार्रवाई की पुष्टि करते हुए बताया कि पुलिस विभाग के नियमों के उल्लंघन के इस मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर आगे का एक्शन लिया जाएगा। यह पूरा विवाद 'कृष्णा ऑटो राइडर्स प्राइवेट लिमिटेड' और 'जेडसीबी' (ZCB) इंडिया के बीच डीलरशिप से जुड़ा हुआ है। कृष्णा ऑटो राइडर्स का आरोप है कि डीलरशिप अचानक खत्म किए जाने से उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।
विवाद सिर्फ थाने तक नहीं, दिल्ली हाईकोर्ट तक पहुंचा
कंपनी के मुताबिक, उन्होंने इस कारोबार में करीब 50 करोड़ रुपये का भारी-भरकम निवेश किया था। इसी विवाद को लेकर न्यायिक मजिस्ट्रेट के निर्देश पर कटघोरा थाने में भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। यह डीलरशिप विवाद सिर्फ थाने तक सीमित नहीं है, बल्कि दिल्ली हाईकोर्ट की दहलीज तक पहुंच चुका है।हाईकोर्ट ने नहीं दी अंतिम राय
हाल ही में, 12 मई 2026 को हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की रजामंदी के बाद सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस परमोद कोहली को एकमात्र मध्यस्थ (आर्बिट्रेटर) नियुक्त किया था। इस कानूनी लड़ाई में मुख्य रूप से डीलरशिप के गैर-विस्तार और कथित एक्सटेंशन एग्रीमेंट की वैधता जैसे पेंच फंसे हुए हैं। हालांकि, हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया था कि उसने अभी तक किसी भी पक्ष के दावों के गुण-दोष पर अपनी कोई अंतिम राय नहीं दी है।
खाकी की कार्यशैली पर सवाल
थाना प्रभारी समेत पूरी टीम के निलंबन से पुलिस महकमे में सन्नाटा खिंच गया है। एक तरफ जहाँ 55 करोड़ की ठगी का मामला खुद में काफी पेचीदा है, वहीं पुलिस टीम की इस 'फ्री की हवाई यात्रा' ने खाकी की कार्यशैली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबकी नजरें एसपी की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं।