Bailadila Deposit 13: दंतेवाड़ा में फिर सुलगने लगी नंदराज पर्वत की आग, बैलाडीला डिपॉजिट-13 के खनन विरोध में 18 गांवों के ग्रामीण लामबंद, बड़े आंदोलन की तैयारी
Bailadila Deposit 13: छत्तीसगढ़ के बस्तर में बैलाडीला के डिपॉजिट-13 और नंदराज पर्वत क्षेत्र में प्रस्तावित खनन गतिविधियों को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ रही है। तामोड़ी गांव में संयुक्त पंचायत जन संघर्ष समिति की बैठक में 18 से अधिक गांवों के प्रतिनिधियों ने नंदराज पर्वत और जंगल बचाने के लिए आंदोलन तेज करने का फैसला लिया। ग्रामीणों ने करीब 7,200 पेड़ों की कटाई की तैयारी का आरोप लगाते हुए ग्रामसभा की सहमति और खनन से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग की है।
प्रकाशित: 06 Oct 2026, 09:13 AM· 4 मिनट पढ़ने का समय
दंतेवाड़ा
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
Bailadila Deposit 13: छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में जल, जंगल और जमीन की रक्षा को लेकर एक बार फिर जनआंदोलन की सुगबुगाहट तेज हो गई है। बैलाडीला पहाड़ियों के डिपॉजिट-13 और पवित्र माने जाने वाले नंदराज पर्वत क्षेत्र में प्रस्तावित खनन गतिविधियों के खिलाफ स्थानीय ग्रामीणों का गुस्सा अब सड़कों पर उतरने की ओर बढ़ रहा है। रविवार को पहाड़ियों के आंचल में बसे तामोड़ी गांव में ‘संयुक्त पंचायत जन संघर्ष समिति’ के बैनर तले एक बड़ी बैठक आयोजित की गई, जिसमें आगे की निर्णायक रणनीति का खाका तैयार किया गया। इस बैठक में गमपुर, डोलीगुड़ा, हिरोली सहित आसपास के 18 से अधिक गांवों के प्रतिनिधि, महिला-पुरुष और युवा भारी संख्या में पहुंचे।
सभी ने एक सुर में नंदराज पर्वत को बचाने और क्षेत्र में होने वाली अंधाधुंध पेड़ कटाई पर तत्काल रोक लगाने का संकल्प लिया। आयोजन में पर्यावरण बचाओ मंच, मूलवासी बचाओ मंच और स्थानीय आदिवासी समाज के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया। बैठक के दौरान समिति के पूर्व पदाधिकारी नंदा कुंजाम, राजू भास्कर, जोगा कुंजाम, देवसिंह और मनीष कुंजाम प्रमुख रूप से मौजूद रहे।
7,200 पेड़ों की कटाई और ठेकेदारी पर भड़के ग्रामीण
बैठक में सबसे गंभीर मुद्दा डिपॉजिट-13 की पहाड़ी तक रास्ता बनाने के नाम पर हजारों पेड़ों की बलि देने की योजना का उठा। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सड़क निर्माण के बहाने वन विभाग की शह पर लगभग 7,200 पेड़ों को काटने की तैयारी पूरी कर ली गई है। विभाग ने पेड़ों पर मार्किंग (निशान) भी लगा दी है और ठेकेदार के जरिए कटाई का काम शुरू कराया जा रहा है। आदिवासियों का कहना है कि अगर ये जंगल कटे, तो उनका अस्तित्व ही संकट में पड़ जाएगा।
2019 के ऐतिहासिक प्रदर्शन की याद ताजा: तब लगा था 100 करोड़ का झटका
यह पहली बार नहीं है जब डिपॉजिट-13 को लेकर बस्तर का यह इलाका सुलग रहा हो। वर्ष 2019 में संयुक्त पंचायत जन संघर्ष समिति के आह्वान पर किरंदुल स्थित NMDC चेकपोस्ट के सामने ग्रामीणों ने 5 दिनों तक अभूतपूर्व चक्काजाम किया था। उस दौरान हजारों ग्रामीणों की मौजूदगी से NMDC का कामकाज पूरी तरह ठप हो गया था, शिफ्ट बसें रोक दी गई थीं और कंपनी को 100 करोड़ रुपये से अधिक का व्यावसायिक नुकसान उठाना पड़ा था। ग्रामीणों ने साफ कर दिया है कि अगर उनकी मांगें नहीं सुनी गईं, तो इस बार प्रदर्शन उससे भी अधिक व्यापक होगा।
बैठक में उपस्थित ग्रामीणअधिकारों पर डाका और ग्रामसभा के फर्जीवाड़े पर उठे सवाल
बैठक में पांचवीं अनुसूची के तहत मिलने वाले संवैधानिक अधिकारों का मुद्दा भी जोर-शोर से उठा। ग्रामीणों ने सवाल खड़ा किया कि जब यह पूरा इलाका अनुसूचित क्षेत्र में आता है, तो ग्रामसभा की सहमति के बिना पेड़ काटने की अनुमति कैसे दी जा रही है? पूर्व में ग्रामसभा की बैठकों को नजरअंदाज करने और गुपचुप तरीके से लीज जारी करने की प्रक्रियाओं पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया गया।
ग्रामीणों ने मांग की है कि:
ग्रामसभा से जुड़ी तमाम पुरानी और वर्तमान कार्यवाहियों की जानकारी सार्वजनिक की जाए।
जमीन की लीज निरस्त होने के बाद दोबारा किन शर्तों पर NCL को सौंपी गई, इसका स्पष्ट खुलासा हो।
NMDC डिपॉजिट-13 को लेकर अपनी स्थिति और भूमिका जनता के सामने पूरी तरह साफ करे।
गांव-गांव पहुंचेगी अलख, राशन-पानी के साथ अनिश्चितकालीन धरने की चेतावनी
समिति ने फैसला लिया है कि अब इस लड़ाई को सीमित न रखकर हर दरवाजे तक पहुंचाया जाएगा। इसके लिए विशेष टीमें गठित की जा रही हैं जो गांव-गांव जाकर आदिवासियों और स्थानीय लोगों को एकजुट करेंगी। जल्द ही समिति आंदोलन की अंतिम तिथि और स्थल की आधिकारिक घोषणा करेगी। स्थानीय निवासियों का कहना है कि नंदराज पर्वत की लीज NCL को सौंपे जाने से लोगों में गहरा असंतोष है। इस बार ग्रामीण केवल सांकेतिक विरोध दर्ज कराने के मूड में नहीं हैं; वे महीनों की व्यवस्था यानी 'राशन-पानी और बिस्तर' के साथ मोर्चे पर डटने की मुकम्मल तैयारी कर रहे हैं।