Bastar News: मरीजों को मिलेगी राहत, NMDC ने शुरू की निःशुल्क एम्बुलेंस सेवा
Bastar News: दुर्गम वनांचलों में रहने वाले ग्रामीणों को राहत देने के लिए एनएमडीसी लिमिटेड ने निःशुल्क एम्बुलेंस सेवा शुरू की है। 23 अक्टूबर से शुरू हुई यह सुविधा लोहागांव सहित आसपास के गांवों के लोगों को आपातकालीन स्थिति में अस्पताल पहुंचने में मदद करेगी। इसके साथ ही क्षेत्र में मोबाइल चिकित्सा शिविर, बस सेवा और सड़क निर्माण के जरिए ग्रामीणों की स्वास्थ्य सुविधाओं और आवागमन को बेहतर बनाने का प्रयास है।
प्रकाशित: 25 Oct 2026, 06:34 PM· अपडेट: 25 Oct 2026, 06:36 PM· 4 मिनट पढ़ने का समय
बस्तर
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Bastar News: दुर्गम वनांचलों में रहने वाले ग्रामीणों के लिए आपातकालीन स्थिति में अस्पताल पहुंचना अब पहले से आसान हो सकता है। पहाड़ी रास्तों और परिवहन की कमी के कारण यहां के लोगों को इलाज के लिए कई घंटे तक पैदल सफर करना पड़ता है। खासकर गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों के बीमार होने पर अस्पताल तक पहुंचना परिवारों के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है। इस परेशानी को कम करने के लिए एनएमडीसी लिमिटेड ने निःशुल्क एम्बुलेंस सेवा शुरू की है। 23 अक्टूबर को शुरू हुई यह सेवा डिपॉजिट-13 परियोजना क्षेत्र और आसपास के दूरस्थ गांवों के लोगों को आपातकालीन परिवहन सुविधा उपलब्ध कराएगी। इससे जरूरत पड़ने पर मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।
लोहागांव जंक्शन से संचालित एम्बुलेंस
नई एम्बुलेंस सेवा लोहागांव जंक्शन से संचालित की जा रही है। इसके दायरे में लोहागांव, अंद्रि, गम्फुर, डोडी टिम्मेनार, पुरंगेल, करका और तंबोडी समेत आसपास के दुर्गम वनांचल शामिल हैं। इन क्षेत्रों के ग्रामीण जरूरत पड़ने पर इस सुविधा का लाभ ले सकेंगे। एम्बुलेंस में मरीजों को ले जाने के लिए स्ट्रेचर की व्यवस्था है। इसके संचालन के लिए चालक तैनात किया गया है, जबकि एनएमडीसी के कर्मचारी भी सेवा में सहयोग कर रहे हैं। इस पहल का मुख्य उद्देश्य उन ग्रामीणों को अस्पताल तक पहुंचने में मदद करना है।
डिपॉजिट-11सी और डिपॉजिट-14 के आसपास रहने वाले ग्रामीणों को भी इस सुविधा से लाभ मिलने की उम्मीद है। इन क्षेत्रों के लोग एम्बुलेंस सेवा का लाभ लेने के लिए लोहागांव तिराहे तक पहुंच सकते हैं। परियोजना क्षेत्र से जुड़ी जानकारी के अनुसार, आसपास की कुछ बस्तियों के ग्रामीणों को पहले अस्पताल जाने के लिए करीब 16 किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ता था। इस दूरी को तय करने में पांच से छह घंटे तक लग सकते थे। ऐसे में किसी मरीज की तबीयत अचानक बिगड़ने, प्रसव की स्थिति बनने या दुर्घटना होने पर अस्पताल पहुंचने में देरी की आशंका बनी रहती थी। निःशुल्क एम्बुलेंस सेवा शुरू होने से ग्रामीणों को इस समस्या से राहत मिलने की उम्मीद है। बस्तर में नि:शुल्क एम्बुलेंस सेवा
‘हॉस्पिटल ऑन द व्हील्स’ से गांवों में पहुंच रही चिकित्सा सुविधा
एनएमडीसी क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं को ग्रामीणों तक पहुंचाने के लिए पहले से ही ‘हॉस्पिटल ऑन द व्हील्स’ नाम से मोबाइल चिकित्सा पहल संचालित की जा रही है। इसके तहत प्रत्येक रविवार को चिकित्सा शिविर लगाए जाते हैं। इन शिविरों के माध्यम से दूरस्थ गांवों में रहने वाले आदिवासी समुदायों की स्वास्थ्य जांच की जाती है और उनकी चिकित्सा संबंधी जरूरतों का आकलन किया जाता है। इस मोबाइल चिकित्सा सेवा में एक डॉक्टर और दो नर्सों की टीम तैनात रहती है। किरंदुल अस्पताल से जुड़े और मोबाइल चिकित्सा सेवा का संचालन करने वाले डॉ. एम. वी. लाल, सीएमओ-एनएमडीसी ने बताया कि वाहन में ईसीजी मशीन उपलब्ध है। मधुमेह के मरीजों के लिए बुनियादी दवाएं भी रखी जाती हैं। उन्होंने बताया कि मोबाइल टीम ग्रामीणों को शुरुआती चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराती है।
एम्बुलेंस सेवा के संपर्क नंबर: 9479156726 8763222004 ग्रामीणों की आवाजाही आसान बनाने के लिए लोहागांव तिराहे से किरंदुल बाजार के बीच बस सेवा भी शुरू की गई है। करीब नौ किलोमीटर की दूरी तय करने वाली यह बस प्रतिदिन तीन बार संचालित होती है। बस के निर्धारित समय सुबह 10 बजे, दोपहर 12:30 बजे और दोपहर 1:30 बजे हैं। इस सुविधा से ग्रामीणों को बाजार और दूसरे जरूरी स्थानों तक पहुंचने के लिए परिवहन का विकल्प मिला है। क्षेत्र में आवागमन बेहतर बनाने के लिए लोहागांव तिराहे से लोहागांव गांव तक सात किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण भी किया जा रहा है।
ग्रामीणों के लिए जरूरी सुविधाओं तक पहुंचना होगा आसान
दंतेवाड़ा के दुर्गम इलाकों में सड़क, बस और एम्बुलेंस जैसी सुविधाओं का विस्तार ग्रामीणों की रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ा है। खासकर आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में समय पर अस्पताल पहुंचना बेहद महत्वपूर्ण होता है। एनएमडीसी की ओर से शुरू की गई निःशुल्क एम्बुलेंस सेवा इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए उठाया गया कदम है। मोबाइल चिकित्सा शिविरों, बस सेवा और निर्माणाधीन सड़क के साथ यह पहल दूरस्थ गांवों के लोगों को स्वास्थ्य सुविधाओं और जरूरी सेवाओं से जोड़ने में मदद कर सकती है। अब इस व्यवस्था का वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि जरूरत के समय ग्रामीणों को एम्बुलेंस कितनी आसानी से उपलब्ध हो पाती है।