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Filmed on Sridevi (Image Source: Social Media)
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Lata Mangeshkar Songs: 35 साल बाद भी कायम मोरनी बागा मा बोले का जादू, जानिए अमर गीत की कहानी

Lata Mangeshkar Songs: स्वर कोकिला लता मंगेशकर ने अपने करीब आठ दशक लंबे संगीत सफर में ऐसे कई यादगार गीत दिए, जो आज भी लोगों के दिलों में बसे हुए हैं। इन्हीं में से एक है फिल्म ‘लम्हे’ का लोकप्रिय गीत ‘मोरनी बागा मा बोले’। साल 1991 में रिलीज हुए इस गाने को 35 साल बाद भी शादी समारोहों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और जश्न के मौकों पर खूब सुना जाता है।

प्रकाशित: 20 Sep 2026, 04:30 PM · 3 मिनट पढ़ने का समय
नई दिल्ली
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
Lata Mangeshkar Songs: स्वर कोकिला लता मंगेशकर ने अपने करीब आठ दशक लंबे संगीत सफर में ऐसे कई यादगार गीत दिए, जो आज भी लोगों के दिलों में बसे हुए हैं। इन्हीं में से एक है फिल्म ‘लम्हे’ का लोकप्रिय गीत ‘मोरनी बागा मा बोले’। साल 1991 में रिलीज हुए इस गाने को 35 साल बाद भी शादी समारोहों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और जश्न के मौकों पर खूब सुना जाता है।
यह गीत सिर्फ एक फिल्मी गाना नहीं, बल्कि राजस्थान की समृद्ध लोक संस्कृति और परंपराओं की झलक भी पेश करता है। इसकी धुन और बोल में राजस्थानी मिट्टी की खुशबू साफ महसूस होती है।

राजस्थान की लोक परंपरा से जुड़ी है इस गीत की कहानी

भले ही आज ‘मोरनी बागा मा बोले’ को लोग खुशी और उत्सव के गीत के रूप में जानते हैं, लेकिन इसकी जड़ें राजस्थान की सदियों पुरानी लोक परंपराओं में छिपी हैं। बहुत कम लोग जानते हैं कि यह गीत मूल रूप से विरह और इंतजार की भावनाओं को व्यक्त करने वाली लोक रचना से जुड़ा हुआ है। पुराने समय में जब बंजारा समुदाय के पुरुष या परिवार के सदस्य रोजी-रोटी की तलाश में लंबे समय के लिए घर से दूर चले जाते थे, तब पीछे रह गई महिलाएं उनके लौटने की प्रतीक्षा और अपने मन की भावनाओं को लोकगीतों के माध्यम से व्यक्त करती थीं। यही वजह है कि इस गीत में खुशी के साथ-साथ एक गहरा भावनात्मक पक्ष भी दिखाई देता है। 

मांड शैली ने दी गीत को खास पहचान

‘मोरनी बागा मा बोले’ की सबसे बड़ी विशेषता इसकी पारंपरिक मांड शैली है। मांड राजस्थान की प्रसिद्ध लोक गायन शैलियों में से एक है, जिसमें प्रेम, विरह और जीवन के अनुभवों को बेहद खूबसूरती से प्रस्तुत किया जाता है। इस गीत के बोल दिग्गज गीतकार आनंद बख्शी ने लिखे थे। उन्होंने राजस्थानी लोक भावनाओं और वहां की संस्कृति को शब्दों में उतारने की कोशिश की। वहीं संगीतकार जोड़ी शिव-हरि ने पारंपरिक धुन को फिल्मी संगीत के साथ इस तरह जोड़ा कि यह गीत हर उम्र के लोगों को पसंद आने लगा।

लता मंगेशकर की आवाज ने गीत को बनाया यादगार

फिल्म लम्हे में श्रीदेवी पर फिल्माए गए इस गीत की शुरुआत ईला अरुण की दमदार राजस्थानी आवाज से होती है। इसके बाद लता मंगेशकर की मधुर और भावपूर्ण गायकी इस गीत को एक अलग ऊंचाई देती है। लता जी की आवाज में मौजूद मिठास और भावनाओं की गहराई ने इस लोकगीत को देशभर में लोकप्रिय बना दिया। यही कारण है कि आज भी यह गाना लोगों के बीच उतना ही पसंद किया जाता है जितना अपनी रिलीज के समय किया गया था।

‘लम्हे’ का संगीत आज भी माना जाता है खास

यश चोपड़ा के निर्देशन में बनी फिल्म ‘लम्हे’ अपनी अनोखी कहानी के साथ-साथ शानदार संगीत के लिए भी याद की जाती है। फिल्म के गानों में लता मंगेशकर के अलावा  हरिहरन, सुरेश वाडेकर और पामेला चोपड़ा जैसे कलाकारों की आवाज शामिल थी।फिल्म का संगीत भारतीय सिनेमा के यादगार म्यूजिक एल्बम में गिना जाता है। ‘मोरनी बागा मा बोले’ ने न सिर्फ फिल्म की लोकप्रियता बढ़ाई, बल्कि राजस्थान की लोक संस्कृति को देशभर के दर्शकों तक पहुंचाने में भी अहम भूमिका निभाई। 
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