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गड्ढों से तरह राहगीर
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महासमुंद

गड्ढों में गुम हुआ विकास : 40 साल पुरानी सड़क की बदहाली पर फूटा जनाक्रोश, ग्रामीण बोले— अब सड़क नहीं तो आंदोलन तय

बागबाहरा नगर पालिका क्षेत्र से गुजरने वाली लोक निर्माण विभाग (PWD) की लगभग 40 साल पुरानी सड़क, जो NH-353 को पिथौरा से जोड़ती है, गंभीर बदहाली का शिकार हो चुकी है। सोनदादर, लालपुर, आमगांव, लमकेनी और तिलाईदादर जैसे गांवों को जोड़ने वाला यह मार्ग अब बड़े-बड़े गड्ढों, मिट्टी कटाव, ध्वस्त किनारों और झाड़ियों से भरा हुआ है। सड़क के कई हिस्सों में 4–5 फीट तक गहरे खड्डे बन चुके हैं, जिससे वाहन चालकों के लिए दुर्घटना का खतरा बढ़ गया है।

प्रकाशित: 15 Jun 2026, 02:04 PM · अपडेट: 02 Aug 2026, 01:09 AM
बागबाहरा
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
विकास, सुशासन और ग्रामीण संपर्क मार्गों के बड़े-बड़े दावों के बीच नगर पालिका बागबाहरा क्षेत्र से होकर गुजरने वाली लोक निर्माण विभाग (PWD) की वह महत्वपूर्ण सड़क, जो एनएच-353 से सोनदादर, लालपुर, आमगांव, लमकेनी और तिलाईदादर होते हुए पिथौरा राजमार्ग को जोड़ती है, आज बदहाली की ऐसी तस्वीर पेश कर रही है जिसने सरकारी दावों की चमक फीकी कर दी है। लगभग 40 वर्ष पुरानी यह सड़क क्षेत्र के हजारों लोगों की जीवनरेखा मानी जाती है, लेकिन आज गड्ढों, उखड़ी गिट्टियों, मिट्टी कटाव, ध्वस्त किनारों और झाड़ियों के बीच अपनी बदहाली की कहानी खुद बयां कर रही है।

नगर पालिका क्षेत्र के भीतर ही खुल रही व्यवस्थाओं की पोल

सबसे चिंताजनक स्थिति नगर पालिका क्षेत्र के भीतर देखने को मिल रही है। सड़क ढाल वाले हिस्से और तीखे मोड़ों से होकर गुजरती है, जहां वर्षों से हो रहे मिट्टी कटाव के कारण कई स्थानों पर 4 से 5 फीट तक गहरे खड्डे बन चुके हैं। बरसात का पानी लगातार बहने से कटाव और अधिक गहरा होता जा रहा है। सड़क के किनारे बने ये गहरे खड्डे वाहन चालकों के लिए बड़ा खतरा बन चुके हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि कोई वाहन थोड़ा भी संतुलन खो दे तो गंभीर दुर्घटना हो सकती है, लेकिन जिम्मेदार विभाग अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकाल पाया है।

झाड़ियों ने बढ़ाया खतरा, मोड़ों पर नहीं दिखता सामने का वाहन

सड़क के दोनों ओर फैली बड़ी-बड़ी झाड़ियां भी परेशानी का बड़ा कारण बनी हुई हैं। कई मोड़ों पर झाड़ियों के कारण सामने से आने वाले वाहन दिखाई नहीं देते, जिससे टक्कर की आशंका बनी रहती है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार शिकायतों के बावजूद झाड़ियों की सफाई नहीं कराई गई, जबकि यह समस्या लंबे समय से बनी हुई है।

सड़क नहीं, गड्ढों और कटावों का जाल

मार्ग के अधिकांश हिस्सों में डामर पूरी तरह उखड़ चुका है। जगह-जगह बड़े गड्ढे, क्षतिग्रस्त किनारे और उभरी हुई गिट्टियां वाहन चालकों के लिए मुसीबत बन चुकी हैं। कई स्थानों पर सड़क की चौड़ाई भी प्रभावी रूप से कम हो गई है। हालत यह है कि वाहन चालक सड़क पर चलने के बजाय गड्ढों और कटावों से बचने की कोशिश करते नजर आते हैं।

दो वाहन आमने-सामने आए तो शुरू हो जाती है परेशानी

मार्ग के कई हिस्सों में सड़क इतनी संकरी और जर्जर हो चुकी है कि दो चारपहिया वाहन एक साथ सुरक्षित रूप से नहीं निकल पाते। सामने से वाहन आने पर किसी एक चालक को पीछे हटना पड़ता है। सड़क किनारे बने गहरे कटाव इस स्थिति को और अधिक जोखिमपूर्ण बना देते हैं।

बरसात में कई गुना बढ़ जाती है समस्या

मानसून शुरू होते ही सड़क की हालत और भी खराब हो जाती है। गड्ढे पानी से भर जाते हैं और उनकी गहराई का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है। मिट्टी कटाव और तेज हो जाता है, जिससे सड़क का किनारा लगातार कमजोर होता जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के दिनों में इस सड़क पर सफर करना सबसे अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

छात्र, मरीज और किसान सबसे ज्यादा प्रभावित

इस मार्ग से प्रतिदिन सैकड़ों छात्र-छात्राएं स्कूल और कॉलेज पहुंचते हैं। ग्रामीणों को अस्पताल, बाजार और अन्य जरूरी कामों के लिए इसी सड़क पर निर्भर रहना पड़ता है। खराब सड़क के कारण मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाने में भी दिक्कतें आती हैं। वहीं किसानों को कृषि यंत्र, खाद-बीज और उपज के परिवहन में अतिरिक्त समय और खर्च का सामना करना पड़ रहा है।

5 किलोमीटर की दूरी के लिए 17 किलोमीटर का चक्कर

ग्राम सोनदादर के भीतर सड़क की जर्जर स्थिति के कारण बड़े वाहन और कृषि यंत्रों का आवागमन प्रभावित हो रहा है। मजबूरी में आमगांव और लमकेनी के किसानों को बागबाहरा पहुंचने के लिए मात्र 5 किलोमीटर की दूरी के बजाय लगभग 17 किलोमीटर लंबा वैकल्पिक मार्ग अपनाना पड़ रहा है। इससे समय, श्रम और ईंधन की भारी बर्बादी हो रही है।

जेब पर भी पड़ रही भारी मार

खराब सड़क का असर केवल आवागमन तक सीमित नहीं है। लगातार झटकों और गड्ढों के कारण वाहनों के सस्पेंशन, टायर, हेडलाइट और अन्य पुर्जे समय से पहले खराब हो रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अब सड़क पर चलने से ज्यादा खर्च वाहन मरम्मत पर हो रहा है।

शिकायतें सैकड़ों, समाधान शून्य

ग्रामीणों के अनुसार सड़क की समस्या को लेकर वर्षों से "सुशासन तिहार", "आपकी सरकार आपके द्वार", "तुहर सरकार-तुहर द्वार" और विभिन्न जनसमस्या निवारण शिविरों में शिकायतें दर्ज कराई जा रही हैं। आवेदन दिए गए, अधिकारियों को मौके की स्थिति से अवगत कराया गया, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल आश्वासन मिले। पिछले वर्ष लमकेनी में आयोजित शिविर में आठ दिनों के भीतर सड़क सुधार का वादा भी किया गया था, जो आज तक पूरा नहीं हो सका।

जब अधिकारी और जनप्रतिनिधि भी बदल लें रास्ता...

ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की वास्तविक स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि गत वर्ष लमकेनी में आयोजित एक सरकारी शिविर में कई अधिकारी और जनप्रतिनिधि भी इस मार्ग से गुजरने के बजाय लगभग 17 किलोमीटर लंबे वैकल्पिक रास्ते से पहुंचे थे। जब जिम्मेदार लोग ही इस सड़क पर चलने से बचने लगें तो आम लोगों की परेशानी का अंदाजा सहज लगाया जा सकता है।

विकास के दावों पर बड़ा सवाल

क्षेत्रवासियों का सवाल है कि जब गांवों को जोड़ने वाली मुख्य सड़क ही बदहाली का शिकार हो, तो ग्रामीण विकास और बुनियादी सुविधाओं के दावे कितने सार्थक हैं? लोगों का कहना है कि यह सड़क वर्षों से विभागीय उपेक्षा और प्रशासनिक उदासीनता का प्रतीक बन चुकी है।

ग्रामीणों की दो टूक चेतावनी— अब सड़क चाहिए, सिर्फ आश्वासन नहीं

लगातार अनदेखी से क्षेत्रवासियों का आक्रोश अब उबाल पर है। हाल ही में डोकरपाली में आयोजित सुशासन तिहार शिविर में भी सड़क मरम्मत की मांग जोरदार ढंग से उठाई गई। विधायक, जनपद अध्यक्ष, एसडीएम और कलेक्टर तक गुहार लगाने के बावजूद कार्रवाई नहीं होने से लोगों का धैर्य जवाब देने लगा है।
पुनित ठाकुर, विदेशराम नेताम, गणेश पटेल, ओमप्रकाश ठाकुर, सदाराम यादव, भारत साहू, वीरेन्द्र दुबे, सालिक ध्रुव, प्रदीप जगत, मनहरण बरिहा, नंदलाल पटेल, गोकुल पटेल, आत्माराम ध्रुव और कन्हैया पटेल सहित क्षेत्रवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र सड़क का जीर्णोद्धार, चौड़ीकरण, मिट्टी कटाव वाले हिस्सों का स्थायी उपचार, गहरे खड्डों की भराई और सड़क किनारे फैली झाड़ियों की सफाई नहीं कराई गई तो व्यापक जनआंदोलन छेड़ा जाएगा। ग्रामीणों का साफ कहना है कि अब उन्हें घोषणाएं और आश्वासन नहीं, बल्कि सड़क पर दिखाई देने वाला विकास चाहिए।
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