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CM Mohan Yadav at education meeting (Image Source: AI Photo)
CM Mohan Yadav at education meeting (Image Source: AI Photo)
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Madhya Pradesh Education : सरकारी स्कूलों को मिलेंगे पक्के भवन, 90% रिजल्ट पर CM यादव का फोकस

Madhya Pradesh Education: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बिना पक्के भवन वाले सरकारी स्कूलों को जल्द सर्वसुविधायुक्त भवन देने का ऐलान किया। साथ ही हर जिले में बोर्ड परीक्षा परिणाम 90 प्रतिशत से अधिक करने का लक्ष्य तय करते हुए कमजोर विद्यार्थियों पर विशेष ध्यान देने और आधुनिक तकनीक के उपयोग पर जोर दिया।

कीर्तिमान डेस्क | सती दीवान
06 Sep 2026, 03:50 PM
मध्यप्रदेश
Madhya Pradesh Education: सरकारी स्कूलों की व्यवस्था को बेहतर बनाने और शिक्षा के स्तर में सुधार के लिए सरकार ने अब मैदानी स्तर पर काम तेज करने की तैयारी शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश के नव-नियुक्त युवा जिला शिक्षा अधिकारियों, जिला परियोजना समन्वयकों और विकासखंड शिक्षा अधिकारियों के साथ सीधा संवाद किया। 
शिक्षा व्यवस्था से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा करते हुए अधिकारियों को स्पष्ट लक्ष्य के साथ काम करने के निर्देश दिए। और बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि प्रदेश के जिन सरकारी स्कूलों के पास वर्तमान में अपने पक्के भवन नहीं हैं, उन्हें जल्द ही सर्वसुविधायुक्त पक्के भवन उपलब्ध कराए जाएंगे।
सरकार का उद्देश्य बच्चों को ऐसा शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना है, जहां उन्हें पढ़ाई के लिए जरूरी सभी बुनियादी सुविधाएं मिल सकें। 
युवा अधिकारियों को मिली मैदानी जिम्मेदारी मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में औसतन 28 वर्ष की आयु के लगभग 123 युवा अधिकारियों को शिक्षा व्यवस्था की मैदानी कमान सौंपी गई है।

AI और तकनीक से बदलेगी शिक्षा

युवाओं में ऊर्जा के साथ नई सोच और आधुनिक तकनीक को अपनाने की क्षमता होती है। ऐसे में इन अधिकारियों को शिक्षा के क्षेत्र में नई कार्य संस्कृति विकसित करने की दिशा में काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज शिक्षा का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल लर्निंग और आधुनिक तकनीक विद्यार्थियों के लिए सीखने के नए अवसर पैदा कर रही हैं। 
इन तकनीकों का बेहतर उपयोग कर सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को भी आधुनिक शिक्षा से जोड़ा जा सकता है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि वे केवल कार्यालयीन काम तक सीमित न रहें, बल्कि नियमित रूप से स्कूलों का निरीक्षण करें, शिक्षकों और विद्यार्थियों से संवाद करें और जमीनी समस्याओं को समझकर उनका समाधान सुनिश्चित करें। 

रिजल्ट और हर बच्चे की पढ़ाई पर फोकस

हर जिले में 90 प्रतिशत से अधिक परीक्षा परिणाम का लक्ष्य मुख्यमंत्री ने शिक्षा अधिकारियों और शिक्षकों को बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम में सुधार के लिए स्पष्ट लक्ष्य दिया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक जिले में बोर्ड परीक्षा का परिणाम 90 प्रतिशत से अधिक करने का संकल्प लेकर काम किया जाए।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि परीक्षा परिणाम सुधारने के लिए केवल अंतिम समय में तैयारी कराने के बजाय पूरे शैक्षणिक सत्र में विद्यार्थियों की प्रगति पर नजर रखी जाए। कमजोर विद्यार्थियों की समय रहते पहचान कर उनके लिए अलग रणनीति तैयार की जाए, ताकि वे पढ़ाई में पीछे न रह जाएं। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित नहीं होना चाहिए।

शिक्षक बनें बच्चों के भविष्य के मार्गदर्शक

उन्होंने कहा कि शिक्षक का काम केवल पाठ्यक्रम पूरा करना नहीं है, बल्कि बच्चों के भविष्य को दिशा देना भी है। शिक्षक समाज निर्माण के ध्वजवाहक हैं और उन्हें अध्यापन को केवल नौकरी के रूप में नहीं देखना चाहिए। उन्होंने शिक्षकों से कहा कि वे विद्यार्थियों की रुचि, क्षमता और पारिवारिक परिस्थितियों को समझें और उसी के अनुसार उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करें। बच्चों को अलग-अलग करियर विकल्पों की जानकारी दी जाए, ताकि वे अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार भविष्य का रास्ता चुन सकें। 

योजनाओं का लाभ और जनभागीदारी पर जोर

उन्होंने मुफ्त साइकिल, बस सुविधा, गणवेश और मध्याह्न भोजन जैसी योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इन सुविधाओं से कोई भी पात्र विद्यार्थी वंचित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से योजनाओं की जमीनी स्थिति की नियमित समीक्षा करने को कहा, ताकि कागजों में योजनाओं के संचालन के बजाय उनका वास्तविक लाभ विद्यार्थियों तक पहुंच सके।

जनभागीदारी और योग पर जोर

उन्होंने अधिकारियों से कहा कि स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों और जनभागीदारी का बेहतर उपयोग किया जाए। इससे स्कूलों में आवश्यक सुविधाओं के विकास के साथ विद्यार्थियों के लिए बेहतर शैक्षणिक वातावरण तैयार किया जा सकेगा। योग और प्राणायाम को दिनचर्या में शामिल करने की सलाह मुख्यमंत्री ने शिक्षकों और शिक्षा अधिकारियों के स्वास्थ्य को लेकर भी संदेश दिया। 
उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर परिणाम के लिए शिक्षक और अधिकारी स्वयं भी स्वस्थ और तनावमुक्त रहें। इसके लिए अपनी दिनचर्या में योग और प्राणायाम को शामिल करने की सलाह दी। 

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