महाराष्ट्र शिक्षक पात्रता परीक्षा पेपर लीक मामले की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। पुलिस का दावा है कि यह सिर्फ एक राज्य तक सीमित मामला नहीं, बल्कि कई राज्यों में फैला एक संगठित गिरोह है। जांच एजेंसियां अब बिहार, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और हरियाणा तक इस नेटवर्क की कड़ियां तलाश रही हैं।
पुलिस के अनुसार बिहार के समस्तीपुर निवासी विजेंद्र गुप्ता को इस पूरे रैकेट का मुख्य साजिशकर्ता माना जा रहा है। पूछताछ के दौरान गिरफ्तार तीनों आरोपियों ने कथित तौर पर उसका नाम लिया है। जांच अधिकारियों का कहना है कि विजेंद्र गुप्ता पर पहले भी विभिन्न राज्यों में परीक्षा पेपर लीक से जुड़े मामलों में शामिल रहने का संदेह रहा है।
तीन आरोपी पुलिस हिरासत में
भिवंडी की अदालत ने मामले में गिरफ्तार राजीव शाह, आकाश कुमार उर्फ सूरज सिंह और धीरज सिंह को 6 जुलाई तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है। पुलिस को उम्मीद है कि पूछताछ के दौरान इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की भी जानकारी मिलेगी। वहीं हरियाणा के सोनीपत निवासी कपिल दहिया की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
क्यूआर कोड से तलाशा जा रहा लीक का स्रोत
जांच एजेंसियां शिक्षा विभाग की मदद से प्रत्येक प्रश्न-पत्र पर छपे विशेष क्यूआर कोड के आधार पर यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि पेपर कहां से लीक हुआ। इसी मामले के सामने आने के बाद 28 जून को होने वाली शिक्षक पात्रता परीक्षा परीक्षा से एक दिन पहले रद्द करनी पड़ी। इससे राज्य के छह लाख से अधिक अभ्यर्थी प्रभावित हुए।
सरकार ने अभ्यर्थियों को दिया भरोसा
स्कूल शिक्षा मंत्री दादा भुसे ने कहा कि सरकार मामले को बेहद गंभीरता से ले रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि परीक्षा दोबारा कराई जाएगी। इसके लिए अभ्यर्थियों को न तो नया आवेदन करना होगा और न ही दोबारा परीक्षा शुल्क देना पड़ेगा। नई परीक्षा तिथि जल्द घोषित की जाएगी। राज्यभर के 1028 परीक्षा केंद्रों पर यह परीक्षा आयोजित होनी थी। सरकार ने कहा है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच जारी है।