सपनों पर चला बुलडोजर : विधायक कॉलोनी बनाने उजाड़ने पहुंचे 48 परिवारों के आशियानें
रायपुर के माना क्षेत्र स्थित नकटी गांव में प्रस्तावित विधायक कॉलोनी के लिए प्रशासन ने 48 मकानों को हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी है। भारी पुलिस बल की मौजूदगी में बुलडोजर पहुंचते ही ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन किया। प्रशासन सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे का दावा कर रहा है, जबकि ग्रामीण वर्षों से निवास और प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिलने का हवाला देकर बेदखली का विरोध कर रहे हैं।
कीर्तिमान डेस्क
29 Jun 2026, 12:06 PM
रायपुर
रायपुर के माना क्षेत्र स्थित ग्राम नकटी में प्रस्तावित विधायक कॉलोनी के लिए सोमवार सुबह प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई शुरू की। कार्रवाई के तहत वार्ड क्रमांक 16 और 17 में बने 48 मकानों को हटाने की प्रक्रिया शुरू हुई।
इससे पहले रविवार देर रात से ही पूरे गांव में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी और एक हजार से अधिक पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी। सुबह जब राजस्व विभाग की टीम बुलडोजर और अन्य अमले के साथ मौके पर पहुंची तो बड़ी संख्या में ग्रामीण घरों से बाहर निकल आए और कार्रवाई का विरोध करने लगे। देखते ही देखते मौके पर हंगामे की स्थिति बन गई।
पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में पूरे इलाके में तनावपूर्ण माहौल बना रहा। पहले भी हुआ था विरोध, नोटिस के बाद बढ़ा विवाद इस कार्रवाई से पहले शुक्रवार रात, मुहर्रम की छुट्टी के बावजूद प्रशासन ने वार्ड 16 और 17 के मकानों पर बेदखली के नोटिस चस्पा किए थे।
सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा
वहीं 26 जून को भी जब प्रशासनिक टीम गांव पहुंची थी, तब ग्रामीणों ने अधिकारियों का घेराव कर विरोध प्रदर्शन किया था। उस दौरान भाजपा नेताओं के खिलाफ नारेबाजी भी की गई थी। रातभर सुरक्षा घेरा बनाए रखने के बाद सोमवार सुबह कार्रवाई शुरू की गई। प्रशासन का कहना है कि जिन जमीनों पर मकान बनाए गए हैं, वे सरकारी भूमि हैं और उन पर अवैध रूप से कब्जा किया गया है। इसी आधार पर संबंधित परिवारों को जमीन खाली करने के लिए नोटिस जारी किए गए थे। प्रशासन का दावा है कि प्रस्तावित विधायक बुलडोजर के सामने डटे ग्रामीणकॉलोनी के विकास कार्य के लिए भूमि खाली कराना आवश्यक है। ग्रामीण बोले- वर्षों से रह रहे, पीएम आवास भी मिला दूसरी ओर ग्रामीणों का कहना है कि वे कई वर्षों से इस इलाके में रह रहे हैं और यह जमीन नकटी गांव का ही हिस्सा है। उनका दावा है कि यहां रहने वाले कई परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान भी स्वीकृत किए गए हैं। ऐसे में अब उसी भूमि को सरकारी बताकर बेदखल करना उचित नहीं है।
पिछले साल भी रुकी थी कार्रवाई
ग्रामीणों के अनुसार वार्ड 16 और 17 में करीब 48 परिवार निवास करते हैं। उनका कहना है कि यह भूमि पहले गांव की निस्तारी भूमि थी, लेकिन समय के साथ यहां आबादी बस गई और बाद में इसे गांव की आबादी क्षेत्र का हिस्सा माना जाने लगा। अब विधायक कॉलोनी की योजना में इस भूमि को शामिल किए जाने के बाद लोगों को हटाया जा रहा है। नकटी गांव में यह पहली बार बेदखली की कार्रवाई नहीं हो रही है। पिछले वर्ष भी जिला प्रशासन ने नोटिस जारी कर मकान खाली कराने का प्रयास किया था। हालांकि उस समय ग्रामीणों के विरोध और जनप्रतिनिधियों के हस्तक्षेप के बाद कार्रवाई स्थगित कर दी गई थी। इस बार फिर नोटिस जारी होने और भारी पुलिस बल की तैनाती के बाद गांव में चिंता और तनाव का माहौल है।
इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि विधानसभा के बजट सत्र से जुड़ी हुई है। 21 मार्च 2025 को बजट सत्र के दौरान विधायक धर्मजीत सिंह ने रायपुर में विधायकों और सांसदों के लिए भूमि आवंटन को लेकर सवाल उठाया था। जवाब में राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने बताया था कि नया रायपुर के नकटी गांव में जमीन चिन्हित करने की प्रक्रिया चल रही है और अंतिम निर्णय होना बाकी है। इसके बाद से प्रशासनिक स्तर पर इस क्षेत्र में कार्रवाई तेज हुई। अब प्रस्तावित विधायक कॉलोनी के लिए भूमि खाली कराने की प्रक्रिया शुरू होने से ग्रामीण लगातार विरोध जता रहे हैं।