महासमुंद जिला अस्पताल में संचालित पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) कुपोषित बच्चों के लिए बड़ी राहत साबित हो रहा है। कलेक्टर विनय लंगेह के मार्गदर्शन में पिछले दो वर्षों में यहां 357 गंभीर कुपोषित बच्चों का सफल उपचार किया गया है। जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त प्रयासों से बच्चों को बेहतर पोषण और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
15 बिस्तरों वाले केंद्र में मिल रहा निःशुल्क इलाज
जिला अस्पताल परिसर में संचालित 15 बिस्तरों वाले एनआरसी में 1 माह से 5 वर्ष तक के गंभीर कुपोषित बच्चों का निःशुल्क उपचार किया जाता है। यहां बच्चों को विशेषज्ञों की निगरानी में रखा जाता है और उनके स्वास्थ्य सुधार के लिए विशेष पोषण आहार उपलब्ध कराया जाता है।
विशेष आहार से सुधर रहा बच्चों का स्वास्थ्य
एनआरसी में भर्ती बच्चों को एफ-75, एफ-100 थेराप्यूटिक फूड, फार्मूला मिल्क के साथ दलिया, खिचड़ी, हलवा और इडली जैसे पौष्टिक भोजन दिए जाते हैं। नियमित देखभाल और संतुलित आहार से बच्चों के वजन में सुधार होता है और वे धीरे-धीरे सामान्य जीवन की ओर लौटते हैं।
माताओं को भी दी जा रही पोषण संबंधी जानकारी
केंद्र में बच्चों के साथ रहने वाली माताओं की सुविधाओं का भी ध्यान रखा जाता है। उन्हें प्रतिदिन दो समय पौष्टिक भोजन दिया जाता है। उपचार पूरा होने के बाद माताओं को 2,250 रुपये की आर्थिक सहायता भी प्रदान की जाती है। इसके अलावा उन्हें घर में उपलब्ध स्थानीय खाद्य सामग्री से बच्चों के लिए पौष्टिक भोजन तैयार करने का प्रशिक्षण दिया जाता है।
आंगनबाड़ी और मितानिन की मदद से आसान भर्ती प्रक्रिया
एनआरसी में बच्चों की भर्ती प्रक्रिया को सरल रखा गया है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और मितानिन की अनुशंसा के आधार पर या अभिभावक सीधे संपर्क कर अपने बच्चों को भर्ती करा सकते हैं। इससे जरूरतमंद बच्चों तक समय पर उपचार पहुंच रहा है।
वर्तमान में 13 बच्चों का चल रहा उपचार
महिला एवं बाल विकास विभाग की सुपरवाइजर शीला प्रधान ने बताया कि वर्तमान में 15 सीटों वाले एनआरसी में 13 बच्चों का उपचार जारी है। उन्होंने बताया कि हाल ही में विश्वकर्मा नगर की तीन वर्षीय गंभीर रूप से कम वजन वाली बच्ची को केंद्र में भर्ती कराया गया है। बच्ची की मां को उम्मीद है कि 14 दिनों की विशेष देखभाल और पोषण उपचार के बाद उसकी बेटी स्वस्थ होकर घर लौटेगी