छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले से सटे महाराष्ट्र के गढ़चिरौली क्षेत्र में सुरक्षाबलों को नक्सल विरोधी अभियान के तहत बड़ी सफलता मिली है। गढ़चिरौली-नारायणपुर सीमा क्षेत्र के घने जंगलों में चलाए जा रहे संयुक्त अंतरराज्यीय ऑपरेशन के दौरान माओवादियों द्वारा संचालित हथियार निर्माण केंद्र का पर्दाफाश किया गया।
इस कार्रवाई ने नक्सल नेटवर्क की उस गुप्त संरचना को उजागर कर दिया है, जिसमें जंगलों के भीतर हथियार तैयार कर सुरक्षाबलों पर हमलों की योजना बनाई जाती थी। 27 मई को बीडीडीएस (बम निरोधक दस्ते) और संयुक्त सुरक्षा बलों ने सघन तलाशी अभियान चलाया। इसी दौरान जमीन के नीचे और जंगल के भीतर छिपाकर रखी गई भारी मात्रा में हथियार, विस्फोटक और निर्माण सामग्री बरामद की गई। जांच में सामने आया कि यह पूरा नेटवर्क अंतरराज्यीय सीमा के सुदूर वन क्षेत्रों का फायदा उठाकर लंबे समय से सक्रिय था।
भारी मात्रा में हथियार और विस्फोटक बरामद
अभियान के दौरान सुरक्षाबलों ने जो सामग्री बरामद की, वह अत्यंत खतरनाक और विध्वंसक श्रेणी की है— 1 इंसास राइफल, 2 सिंगल शॉट राइफल, 2 बारह बोर राइफल, 2 जिंदा एसएलआर कारतूस, 12 जिंदा .303 राइफल कारतूस, 4 जिंदा बारह बोर कारतूस, लगभग 25 किलो आईईडी विस्फोटक सामग्री, 2 क्लेमोर माइंस, 110 डेटोनेटर, कॉर्टेक्स वायर, 500 से अधिक बीजीएल सेल और निर्माण सामग्री, 7 बीजीएल लॉन्चर, 3 ट्यूब लॉन्चर, लोहे की रॉड व अन्य उपकरण, 2 लेथ मशीनें, 2 मोटर, ग्राइंडर मशीन, इन्वर्टर, बैटरी और सोलर प्लेट, तारों के बंडल सहित भारी मात्रा में तकनीकी सामग्री। सुरक्षाबलों ने मौके पर ही वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर कई विस्फोटक सामग्री को निष्क्रिय कर नष्ट कर दिया।हमलों की साजिश और जंगल का दुरुपयोग
जांच में यह भी सामने आया है कि माओवादी संगठन इस क्षेत्र का उपयोग सुरक्षाबलों पर घात लगाकर हमले करने के लिए करता था। जंगलों में छिपाकर रखे गए हथियार और विस्फोटक का इस्तेमाल नक्सली सप्ताह, चुनाव और अन्य विध्वंसक गतिविधियों में किया जाता था।
