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एम.टेक किसान ने अपनाई आधुनिक खेती
एम.टेक किसान ने अपनाई आधुनिक खेती
सरकारी सूचना

बड़ी सफलता : एम.टेक किसान ने अपनाई आधुनिक खेती, ग्राफ्टेड बैंगन से 6.5 लाख प्रति एकड़ तक कमाई

महासमुंद जिले के लोहारडीह गांव के एम.टेक. शिक्षित किसान क्रान्ति कुमार चंद्राकर ने पारंपरिक धान खेती छोड़कर आधुनिक तकनीक आधारित उद्यानिकी खेती अपनाई। उद्यानिकी विभाग की योजना के तहत ग्राफ्टेड बैंगन की खेती में ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग तकनीक का उपयोग कर उन्होंने लगभग 400 क्विंटल प्रति एकड़ उत्पादन प्राप्त किया। उनकी सफलता से आसपास के किसान भी आधुनिक खेती तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं।

कीर्तिमान डेस्क
कीर्तिमान डेस्क
15 Jun 2026, 05:31 PM
महासमुंद

महासमुंद विकासखंड के ग्राम लोहारडीह निवासी क्रान्ति कुमार चंद्राकर एक शिक्षित एवं प्रगतिशील किसान हैं। एम.टेक. की शिक्षा प्राप्त चंद्राकर पूर्व में अपने 1.46 हेक्टेयर सिंचित कृषि भूमि में मुख्य रूप से धान की खेती करते थे। धान उत्पादन में अधिक पानी, बढ़ती मजदूरी लागत एवं सीमित लाभ के कारण उन्हें अपेक्षित आर्थिक लाभ प्राप्त नहीं हो रहा था। खेती से आय बढ़ाने और आधुनिक तकनीकों को अपनाने की सोच के साथ उन्होंने खेती में नवाचार करने का निर्णय लिया।

उद्यानिकी विभाग की योजना से मिला नया अवसर

वर्ष 2025-26 में उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन में उन्होंने राष्ट्रीय कृषि विकास योजना अंतर्गत संचालित ग्राफ्टेड बैंगन एवं टमाटर सीडलिंग प्रदर्शन कार्यक्रम में भाग लिया। योजना के तहत उन्हें 30 हजार रुपए की अनुदान राशि डीबीटी के माध्यम से प्रदान की गई। विभागीय तकनीकी मार्गदर्शन प्राप्त कर उन्होंने अपने खेत में ड्रिप सिंचाई एवं मल्चिंग तकनीक के साथ ग्राफ्टेड बैंगन की खेती प्रारंभ की। आधुनिक तकनीकों के उपयोग से फसल की गुणवत्ता और उत्पादन में सुधार हुआ।

धान की तुलना में कई गुना अधिक लाभ

चंद्राकर बताते हैं कि पहले धान की खेती से लगभग 35 हजार रूपए तक का लाभ मिलता था, वहीं ग्राफ्टेड बैंगन की खेती से लगभग 400 क्विंटल प्रति एकड़ उत्पादन प्राप्त हुआ। बाजार में औसतन 25 रुपए प्रति किलोग्राम की दर से विक्रय होने पर उत्पादन से बेहतर आय प्राप्त हुई। खेती में, श्रमिक एवं अन्य सभी खर्चों को निकालने के बाद उन्हें लगभग 6.50 लाख रुपए प्रति एकड़ का लाभ प्राप्त हुआ। उनके खेत में बेहतर उत्पादन और आधुनिक खेती के परिणामों को देखकर आसपास के किसान भी उद्यानिकी फसलों की खेती, ड्रिप सिंचाई एवं मल्चिंग तकनीक अपनाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं।

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