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मेडिकल कॉलेज में सभी बच्चों के इलाज
मेडिकल कॉलेज में सभी बच्चों के इलाज
रायगढ़

मौत से जीती जंग : सांप के जहर से लड़कर जीते 5 मासूम, रायगढ़ मेडिकल कॉलेज की टीम ने बचाई जान

रायगढ़ मेडिकल कॉलेज अस्पताल में करैत, कोबरा और रसेल वाइपर के डंस से गंभीर हुए पांच बच्चों का सफल इलाज किया गया। समय पर एंटी-स्नेक वेनम, पीआईसीयू और वेंटिलेटर सुविधा मिलने से सभी बच्चों की जान बच गई और उन्हें स्वस्थ होने के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

कीर्तिमान डेस्क
कीर्तिमान डेस्क
09 Jul 2026, 10:32 AM
रायगढ़
मानसून के मौसम में बढ़ रहे सर्पदंश के मामलों के बीच रायगढ़ मेडिकल कॉलेज अस्पताल में पांच बच्चों को समय पर इलाज मिलने से उनकी जान बच गई। अलग-अलग घटनाओं में करैत, कोबरा और रसेल वाइपर जैसे जहरीले सांपों के डंस का शिकार हुए इन बच्चों की हालत बेहद गंभीर थी। डॉक्टरों की टीम ने लगातार निगरानी और आधुनिक उपचार के जरिए सभी बच्चों को स्वस्थ कर बुधवार को अस्पताल से छुट्टी दे दी।
धरमजयगढ़ क्षेत्र के रहने वाले दो सगे भाई वीर कुमार (7) और लाकेश राठिया (12) रात में सो रहे थे, तभी करैत सांप ने दोनों के गर्दन के पास डंस लिया। सुबह तक जहर शरीर में फैलने लगा और दोनों की हालत गंभीर हो गई। इसके बाद परिजन उन्हें तत्काल इलाज के लिए रायगढ़ मेडिकल कॉलेज अस्पताल लेकर पहुंचे। 

गंभीर हालत में पीआईसीयू और वेंटिलेटर पर रखा गया 

वहीं, सक्ती जिले के हसौद निवासी मंजू (7) को कोबरा सांप ने पैर में काट लिया था। जहर के असर से उसके पैर में तेज सूजन और फफोले पड़ गए थे। रायगढ़ निवासी हितेश ढंगर (5) को रसेल वाइपर ने डंस लिया था, जिसके कारण शरीर में रक्तस्राव और खून जमने से जुड़ी समस्या सामने आई। इसके अलावा कलमी निवासी हर्षित प्रजापति (7) को भी रात में सोते समय करैत सांप ने काट लिया था। उसकी स्थिति भी गंभीर बनी हुई थी। सभी बच्चों को अलग-अलग समय पर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल पहुंचने के बाद बच्चों में सर्प विष के गंभीर प्रभाव दिखाई दे रहे थे। कई बच्चों को पलकें झुकने, बोलने और निगलने में परेशानी, मांसपेशियों में कमजोरी और सांस लेने में कठिनाई जैसी समस्याएं हो रही थीं। स्थिति को देखते हुए तीन बच्चों को तत्काल पीआईसीयू में भर्ती कर वेंटिलेटर सपोर्ट दिया गया। 

सांप के जहर से लड़कर जीते मासूम
एंटी-स्नेक वेनम और 24 घंटे निगरानी से बची जान

वहीं रसेल वाइपर के डंस से प्रभावित बच्चे में हो रहे रक्तस्राव और खून के थक्के बनने की समस्या को विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में नियंत्रित किया गया।  चिकित्सकों ने सभी बच्चों को जरूरत के अनुसार एंटी-स्नेक वेनम की खुराक दी। कुछ बच्चों को 50 वायल तक एंटी-स्नेक वेनम की आवश्यकता पड़ी। इसके साथ ही आधुनिक गहन चिकित्सा, लगातार मॉनिटरिंग और जरूरी जांचों के जरिए उपचार किया गया।
लगातार इलाज और डॉक्टरों की मेहनत से सभी बच्चों की हालत में सुधार आया और बुधवार को पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया। अस्पताल अधीक्षक डॉ. दुर्गा शंकर पटेल ने बताया कि जहरीले सर्पदंश के मामलों में समय पर एंटी-स्नेक वेनम, वेंटिलेटर सुविधा और प्रशिक्षित मेडिकल टीम की उपलब्धता बेहद महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने कहा कि इसी वजह से पांचों बच्चों को गंभीर स्थिति से बाहर लाया जा सका। 

समय पर इलाज और विशेषज्ञ टीम बनी जीवनरक्षक

सभी बच्चों का इलाज आयुष्मान योजना के तहत निशुल्क किया गया। मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. संतोष कुमार ने इस उपलब्धि को अस्पताल की आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था, विशेषज्ञ चिकित्सकों की दक्षता और पीआईसीयू सुविधाओं का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि समय पर उपचार मिलने पर जहरीले सांपों के डंस जैसे गंभीर मामलों में भी मरीजों की जान बचाई जा सकती है। बाल एवं शिशु रोग विभागाध्यक्ष डॉ. लक्ष्मणेश्वर कुमार सोनी के नेतृत्व में सहायक प्राध्यापक डॉ. गौरव क्लॉडियस, डॉ. फारूज अहमद, डॉ. पल्लवी सहित पीआईसीयू टीम और नर्सिंग स्टाफ ने 24 घंटे निगरानी, वेंटिलेटर प्रबंधन और समन्वित उपचार के जरिए बच्चों को स्वस्थ करने में अहम भूमिका निभाई।
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