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राष्ट्रपति के नाम भेजा ज्ञापन : लोकसभा भंग करने और बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग

छत्तीसगढ़ किसान मजदूर महासंघ के प्रतिनिधियों ने राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन भेजकर लोकसभा भंग करने और बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग की है। ज्ञापन में शिक्षा, महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की समस्याओं, कानून-व्यवस्था और केंद्र सरकार की विभिन्न नीतियों पर सवाल उठाते हुए कई मुद्दों पर तत्काल कार्रवाई की अपील की गई है।

कीर्तिमान डेस्क
प्रकाशित: 25 Jul 2026, 06:22 PM · अपडेट: 30 Oct 2026, 10:39 PM
आरंग
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
छत्तीसगढ़ किसान मजदूर महासंघ के संयोजक मंडल सदस्य पारस साहू और गजेंद्र सिंह कोसले ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू तथा संसद के विपक्षी सांसदों के नाम एक ज्ञापन भेजकर केंद्र सरकार की विभिन्न नीतियों और कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। ज्ञापन में देश की मौजूदा राजनीतिक, शैक्षणिक, आर्थिक और प्रशासनिक परिस्थितियों को लेकर चिंता जताते हुए लोकसभा भंग करने तथा भविष्य के चुनाव बैलेट पेपर से कराने की मांग की गई है। ज्ञापन में कहा गया है कि देश के युवा, किसान, मजदूर और महिलाएं कई मुद्दों को लेकर लंबे समय से अपनी आवाज उठा रहे हैं, लेकिन उनकी मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो रही है। ज्ञापन के अनुसार, लोकतांत्रिक संस्थाओं और संवैधानिक व्यवस्थाओं को लेकर लोगों में असंतोष बढ़ रहा है, जिसे देखते हुए राष्ट्रपति से हस्तक्षेप करने की अपील की गई है।

शिक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल 

ज्ञापन में शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी गंभीर चिंताएं व्यक्त की गई हैं। इसमें नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं, विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं और इससे छात्रों पर पड़ने वाले मानसिक दबाव का उल्लेख किया गया है। साथ ही शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे छात्र आंदोलनों का भी जिक्र किया गया है। पत्र में यह भी दावा किया गया है कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर आंदोलन कर रहे छात्रों और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के समर्थन में चल रहे प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई हुई। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर बल प्रयोग और छात्राओं के साथ अभद्र व्यवहार जैसे आरोप लगाए हैं। 

कानून व्यवस्था और न्याय व्यवस्था पर भी टिप्पणी 

ज्ञापन में गृह मंत्रालय की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया गया है कि आंदोलन कर रहे छात्रों के साथ कठोर व्यवहार किया गया। साथ ही कुछ पुलिस अधिकारियों के आचरण को लेकर भी आपत्ति दर्ज कराई गई है। इसके अलावा न्यायिक प्रक्रिया को लेकर भी युवाओं की नाराजगी का उल्लेख किया गया है।

आर्थिक मुद्दों को भी बनाया आधार 

पत्र में देश की आर्थिक स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए महंगाई, बेरोजगारी और रुपये की स्थिति का उल्लेख किया गया है। ज्ञापन में दावा किया गया है कि आम जनता बढ़ती कीमतों और रोजगार के सीमित अवसरों से परेशान है। साथ ही पेट्रोल की कीमतों, ई-20 ईंधन नीति और बुनियादी ढांचे की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। 

किसानों और ग्रामीण समस्याओं का जिक्र 

किसानों से जुड़े मुद्दों को उठाते हुए ज्ञापन में समय पर खाद और बिजली उपलब्ध नहीं होने का आरोप लगाया गया है। इसके अलावा न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को कानूनी गारंटी देने की मांग दोहराई गई है। किसानों की आर्थिक स्थिति और कृषि क्षेत्र की चुनौतियों को भी पत्र में प्रमुखता से शामिल किया गया है।

केंद्रीय एजेंसियों और अन्य नीतियों पर आरोप 

ज्ञापन में ईडी और सीबीआई जैसी केंद्रीय एजेंसियों के कथित दुरुपयोग का आरोप लगाया गया है। साथ ही पर्यावरण, रक्षा और अन्य नीतियों को लेकर भी केंद्र सरकार की आलोचना की गई है। राम मंदिर ट्रस्ट, अग्निवीर योजना और विभिन्न सरकारी फैसलों पर भी सवाल उठाए गए हैं। 

ज्ञापन में रखी गई प्रमुख मांगें 

ज्ञापन के माध्यम से राष्ट्रपति से कई मांगें की गई हैं। इनमें वर्तमान लोकसभा और केंद्रीय मंत्रिमंडल को भंग करने, भविष्य के चुनाव केवल बैलेट पेपर से कराने, पेपर लीक, छात्र आत्महत्या, महंगाई और प्रशासनिक जवाबदेही तय करने जैसे मुद्दे प्रमुख हैं। इसके अलावा स्मार्ट मीटर, बढ़ते बिजली बिल, महिलाओं की सुरक्षा और अन्य जनहित के विषयों पर भी तत्काल कार्रवाई की मांग की गई है। छत्तीसगढ़ किसान मजदूर महासंघ के पदाधिकारियों का कहना है कि यदि इन मांगों पर समय रहते विचार नहीं किया गया तो देशभर में व्यापक जनआंदोलन की स्थिति बन सकती है।
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