जब भी माता-पिता की भक्ति और निस्वार्थ सेवा की बात आती है, इतिहास में सबसे पहला नाम श्रवण कुमार का याद किया जाता है। पौराणिक कहानियों की यह मिसाल आज के दौर में भी जीवंत हो उठी है। सावन के इस पवित्र महीने में देशभर से कांवड़ यात्री हरिद्वार गंगाजल लेने पहुँच रहे हैं, लेकिन इसी भीड़ के बीच एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसने लाखों लोगों का दिल जीत लिया है। दिल्ली के शाहदरा की रहने वाली काजल चौधरी अपनी 90 वर्ष की बुजुर्ग सासू मां, चंद्रिदेवी को कांवड़ में बिठाकर हरिद्वार से दिल्ली तक की कठिन पैदल यात्रा पर निकली हैं।
दूसरी बार कांवड़ यात्रा ले जा रही काजल
कांवड़ के एक पलड़े में उनकी बुजुर्ग सास बैठी हैं और दूसरे पलड़े में संतुलन बनाने के लिए 71 किलो गंगाजल रखा हुआ है। रास्तों में जो भी इस दृश्य को देख रहा है, वह श्रद्धा और अचरज से भर उठ रहा है। काजल के लिए यह पहला मौका नहीं है। यह उनकी लगातार दूसरी कांवड़ यात्रा है। पिछले साल भी उन्होंने इसी तरह अपनी सास को कांवड़ पर बैठाकर हरिद्वार से दिल्ली का सफर तय किया था।
जब उनसे इस कठिन संकल्प के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने बहुत सादगी से जवाब दिया,
"आज के समय में बुजुर्गों की अनदेखी बढ़ रही है। मैं समाज को बस यह संदेश देना चाहती हूँ कि माता-पिता और सास-ससुर की सेवा दिल से करनी चाहिए। अगर हम उनकी सेवा करेंगे, तो वे हमेशा हमें हंसते-मुस्कुराते अपना आशीर्वाद देकर जाएँगे।"
समाज के लिए बनी प्रेरणा
इस भक्तिमयी यात्रा के बीच काजल ने एक खास उम्मीद भी जताई है। उन्होंने बताया कि उनकी 90 वर्षीय सास चंद्रिदेवी की दिल से इच्छा है कि वे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिल सकें और उन्हें अपनी तरफ से कुछ भेंट सौंप सकें। काजल ने मीडिया के माध्यम से अपील की है कि उनकी बुजुर्ग मां की यह आखिरी इच्छा पूरी हो जाए। आज के इस दौर में जहाँ रिश्तों में दूरियाँ बढ़ रही हैं, वहीं काजल चौधरी की यह भक्ति और सेवा-भावना समाज के लिए एक प्रेरणा बन चुकी है। सड़कों पर उनसे मिलने वाले श्रद्धालु उनके जज्बे को सलाम कर रहे हैं और उन्हें कलियुग की 'श्रवण कुमार' कहकर बुला रहे हैं।