देश भर में मानसून की चाल इस समय अजीब तरह से बंट गई है। राजस्थान, मध्य प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा और पंजाब जैसे राज्यों में मानसून की रफ्तार थम गई है। नतीजा यह है कि यहाँ बारिश की कमी महसूस की जा रही है। इसके विपरीत बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और पूर्वी उत्तर प्रदेश में झमाझम बारिश का दौर जारी है। मौसम विभाग के विशेषज्ञों का कहना है कि इसके पीछे मानसून ट्रफ का असर है। अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से आने वाली नम हवाएं इस वक्त पूर्वी भारत में सिमट कर रह गई हैं। यही वजह है कि पश्चिम-उत्तर भारत तक पर्याप्त नमी नहीं पहुंच पा रही है। अब लोगों को नए मौसम तंत्र या मानसून ट्रफ के खिसकने का इंतजार है।
पूर्वोत्तर में बाढ़ का कहर
पूर्वोत्तर भारत में स्थिति काफी गंभीर बनी हुई है। अरुणाचल प्रदेश में बीते 24 घंटों में बाढ़ और भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई है। राज्य के चार जिलों में करीब 1.02 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। दुखद है कि अब तक 7 लोगों की मौत हो चुकी है और 29 लोग घायल बताए गए हैं। असम का हाल भी कुछ ऐसा ही है। वहां 6 जिलों के 99 गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। करीब 37,032 लोग अपना घर-बार छोड़कर सुरक्षित स्थानों की तलाश में हैं। लखीमपुर जिला इस आपदा से सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र बनकर उभरा है। स्थानीय प्रशासन राहत और बचाव कार्यों में जुटा है।
पुरी रथयात्रा पर बारिश का साया
ओडिशा में भगवान जगन्नाथ की प्रसिद्ध रथयात्रा से पहले मौसम ने चिंता बढ़ा दी है। मौसम विभाग ने पुरी समेत राज्य के कई हिस्सों में भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी कर दिया है। बंगाल की खाड़ी में बनने वाला कम दबाव का क्षेत्र इसका मुख्य कारण है। अगले 24 घंटों में तटों पर कम दबाव का नया क्षेत्र बनने की संभावना है। बुधवार से शुक्रवार की सुबह तक पुरी में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। श्रद्धालुओं और प्रशासन के लिए यह मौसम किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है। यात्रा के दौरान सुरक्षा इंतजामों को और अधिक पुख्ता किया जा रहा है।