छत्तीसगढ़ में फिर जोर पकड़ेगा मानसून, अगले 7 दिनों तक बारिश के आसार, कई इलाकों में भारी वर्षा की चेतावनी
छत्तीसगढ़ में मानसून फिर सक्रिय हो गया है। IMD के पूर्वानुमान के मुताबिक प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में अगले सात दिनों तक हल्की से मध्यम बारिश जारी रह सकती है, जबकि उत्तर और मध्य छत्तीसगढ़ में कहीं-कहीं भारी बारिश की संभावना है। गरज-चमक और आकाशीय बिजली को लेकर भी सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
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कीर्तिमान न्यूज
22 Aug 2026, 03:52 PM
रायपुर
छत्तीसगढ़ में मानसून एक बार फिर सक्रिय नजर आ रहा है। प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश का सिलसिला जारी है और आने वाले दिनों में भी इससे राहत मिलने की संभावना कम है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा पूर्वानुमान के मुताबिक उत्तर और मध्य छत्तीसगढ़ में अगले सात दिनों तक कहीं-कहीं मध्यम से भारी बारिश का दौर जारी रह सकता है। वहीं प्रदेश के अधिकांश स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना जताई गई है।
मानसून ट्रफ भी सक्रिय
मौसम विभाग के अनुसार उत्तर-पूर्व मध्य प्रदेश और आसपास के क्षेत्र में बना कम दबाव का क्षेत्र तथा उससे जुड़ा चक्रवाती परिसंचरण मौसम को प्रभावित कर रहा है। इसके अलावा मानसून ट्रफ भी सक्रिय है। इसी मौसमी सिस्टम के प्रभाव से छत्तीसगढ़ में बादल छाए रहने के साथ बारिश की गतिविधियां बनी हुई हैं। IMD के पूर्वानुमान के मुताबिक 22 से 25 अगस्त के बीच प्रदेश के अधिकांश स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है।
भारी बारिश की संभावना
इस दौरान कुछ इलाकों में भारी बारिश के साथ गरज-चमक और आकाशीय बिजली गिरने की भी आशंका है। 26 और 27 अगस्त को भी अधिकांश स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा और कहीं-कहीं भारी बारिश होने का अनुमान है। मौसम विभाग के राष्ट्रीय पूर्वानुमान में भी छत्तीसगढ़ में 22 से 27 अगस्त के दौरान कहीं-कहीं भारी बारिश की संभावना जताई गई है। IMD के मानकों के अनुसार 24 घंटे में 64.5 से 115.5 मिलीमीटर बारिश को भारी वर्षा, जबकि 115.6 से 204.4 मिलीमीटर बारिश को बहुत भारी वर्षा की श्रेणी में रखा जाता है। हालांकि इसका अर्थ यह नहीं है कि पूरे जिले में इतनी बारिश होगी। भारी बारिश की चेतावनी आमतौर पर संबंधित क्षेत्र में एक-दो स्थानों के लिए भी जारी हो सकती है।
सड़क बना तालाबइन जिलों में गरज-चमक के साथ हो सकती है बारिश
मौजूदा मौसम प्रणाली को देखते हुए रायपुर, बलौदाबाजार-भाटापारा, गरियाबंद, महासमुंद, धमतरी, दुर्ग, बालोद, बेमेतरा, कबीरधाम, राजनांदगांव, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी, बिलासपुर, मुंगेली, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, कोरबा, जांजगीर-चांपा, सक्ती, रायगढ़ और सारंगढ़-बिलाईगढ़ सहित मध्य और उत्तरी हिस्सों में बारिश की गतिविधियों पर विशेष नजर रहेगी। इसके साथ ही सरगुजा, सूरजपुर, बलरामपुर-रामानुजगंज, जशपुर, कोरिया और मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में भी गरज-चमक के साथ बारिश की स्थिति बन सकती है।
किया जा रहा लगातार अपडेट
दक्षिण छत्तीसगढ़ के बस्तर, कोंडागांव, कांकेर, नारायणपुर, दंतेवाड़ा, सुकमा और बीजापुर में भी मानसूनी बारिश की गतिविधियां जारी रहने की संभावना है। यहां यह ध्यान रखना जरूरी है कि किसी जिले में भारी बारिश की चेतावनी का स्तर दिन और स्थान के अनुसार बदल सकता है। IMD की जिला-वार चेतावनी 22 से 26 अगस्त के लिए लगातार अपडेट की जा रही है। मौसम केंद्र रायपुर की 21 अगस्त की रिपोर्ट के अनुसार पिछले 24 घंटों में प्रदेश के अनेक स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई थी।
तापमान में हो सकता है बड़ा बदलाव
राज्य में मौसमी उपखंडीय वर्षा सामान्य श्रेणी में थी और सामान्य से करीब 7 प्रतिशत कम दर्ज की गई। मौसम विभाग ने अगले पांच दिनों के दौरान अधिकतम तापमान में किसी बड़े बदलाव की संभावना नहीं जताई है। 22 अगस्त को उपलब्ध मौसम आंकड़ों में दुर्ग में 11.8 मिमी, जगदलपुर में 3.9 मिमी और बिलासपुर में 0.4 मिमी बारिश दर्ज की गई, जबकि अंबिकापुर में बारिश दर्ज नहीं हुई। अलग-अलग क्षेत्रों में बारिश की मात्रा में बड़ा अंतर देखने को मिल सकता है।
खेती-किसानी में जुटे किसानखेती-किसानी के लिए राहत
मानसून की बारिश खेती-किसानी के लिहाज से राहत देने वाली साबित हो सकती है। पर्याप्त वर्षा से धान सहित खरीफ फसलों को नमी मिलेगी और जिन इलाकों में सिंचाई के लिए बारिश पर निर्भरता अधिक है, वहां किसानों को फायदा हो सकता है। लगातार नियंत्रित बारिश से तालाब, जलाशय, कुएं और भूजल स्तर को भी फायदा मिलता है। हालांकि जिन खेतों में पहले से पर्याप्त पानी भरा है, वहां लगातार तेज बारिश नुकसान भी पहुंचा सकती है।
सड़कों पर भर आया नाले का पानी
खेतों में जलभराव होने से फसलों की जड़ों पर असर पड़ने, पौधों के गिरने और सब्जियों की फसल खराब होने का खतरा बढ़ सकता है। किसानों को खेतों में अतिरिक्त पानी की निकासी की व्यवस्था बनाए रखने की जरूरत होगी। तेज बारिश का सबसे अधिक असर निचले और जलभराव वाले क्षेत्रों में देखने को मिल सकता है। शहरों में नालियां और नाले उफनने से सड़कों पर पानी भर सकता है, जबकि ग्रामीण इलाकों में कच्ची सड़कों और छोटे पुल-पुलियों पर आवागमन प्रभावित होने की आशंका रहती है।
खुले स्थानों से बनाए दूरी
लगातार बारिश होने पर नदी-नालों का जलस्तर भी तेजी से बढ़ सकता है। बारिश के दौरान आकाशीय बिजली भी बड़ी चिंता है। मौसम विभाग ने गरज सुनाई देने पर लोगों को तुरंत सुरक्षित पक्के भवन में जाने, पेड़ों के नीचे शरण नहीं लेने, बिजली के तारों और धातु की संरचनाओं से दूरी बनाए रखने तथा खुले स्थानों पर नहीं रहने की सलाह दी है। खेतों में रखी कटी हुई उपज को भी सुरक्षित स्थान पर रखने की सलाह दी गई है।