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मलबे की चपेट में आई गाड़ीयां
मलबे की चपेट में आई गाड़ीयां
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मानसून का रौद्र रूप : किन्नौर में बाढ़ से थमी ज़िंदगी, तीन दिन में 16 करोड़ स्वाहा, अब तक 14 की मौत

हिमाचल प्रदेश में मानसून की शुरुआत के साथ ही भारी तबाही देखने को मिल रही है। किन्नौर में मूसलाधार बारिश और भूस्खलन से NH-5 घंटों बंद रहा, जबकि रिब्बा-कंडे मार्ग भी मलबे के कारण ठप हो गया। पिछले तीन दिनों में राज्य को करीब 16 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है और 14 लोगों की मौत हो चुकी है। फिलहाल 49 सड़कें और 3 बिजली ट्रांसफार्मर प्रभावित हैं।

कीर्तिमान न्यूज
04 Jul 2026, 09:11 AM
किन्नौर
हिमाचल प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की दस्तक के साथ ही तबाही का दौर शुरू हो गया है। भारी बारिश, बादल फटने और भूस्खलन (लैंडस्लाइड) ने राज्य को झकझोर कर रख दिया है। ताजा घटनाक्रम में किन्नौर जिले में शुक्रवार तड़के करीब चार बजे हुई मूसलाधार बारिश ने भारी तबाही मचाई। 
चोलिंग में बाढ़ के बाद आए भारी मलबे के कारण शिमला-रिकांगपिओ राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-5) पूरी तरह ठप हो गया। सड़क का करीब 30 मीटर हिस्सा मलबे की चपेट में आ गया था, जिसे साफ करने में प्रशासन को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। सुबह करीब 10 बजे जाकर इस हाईवे को दोबारा खोला जा सका। 

आवाजाही हुई पूरी तरह बंद 

इस दौरान एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया, जब वहां से गुजर रही दो कारें मलबे की जद में आ गईं, लेकिन गनीमत रही कि गाड़ियां वहीं रुक गईं और कोई जानी नुकसान नहीं हुआ। दूसरी ओर, रिब्बा में भी बाढ़ के बाद मलबा आने से रिब्बा-कंडे संपर्क मार्ग गाड़ियों की आवाजाही के लिए पूरी तरह बंद हो गया है। मानसून की शुरुआती मार ही सूबे पर भारी पड़ रही है। शुरुआती तीन दिनों के भीतर ही राज्य को लगभग 16 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया गया है। 
सामान्य से कही अधिक बरसा पानी
आंकड़ों पर नजर डालें तो इन तीन दिनों में प्रदेश में 30.9 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य से 106 फीसदी ज्यादा है। सबसे ज्यादा खराब हालात किन्नौर जिले के हैं, जहां तीन दिन में 18.3 मिलीमीटर बारिश हुई। यह आंकड़ा सामान्य से रिकॉर्ड 423 प्रतिशत अधिक है। लाहौल-स्पीति को छोड़ दें तो सूबे के लगभग सभी जिलों में सामान्य से कहीं अधिक पानी बरसा है। 

मरने वालों की संख्या बढ़कर 14 हुई 

इस भारी तबाही के कारण राज्य में फिलहाल 49 सड़कें बंद हैं और 3 बिजली ट्रांसफार्मर ठप पड़े हैं। स्टेट इमरजेंसी ऑपरेशन्स सेंटर (SEOC) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, हिमाचल में मानसून का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। राज्य में बारिश और मौसम से जुड़ी दुर्घटनाओं में मरने वालों की संख्या बढ़कर 14 हो गई है।
मलबे को हटाती मशीन

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार:

  • 12 लोगों की मौत: 30 जून से अब तक बाढ़, भूस्खलन और बारिश से जुड़ी सीधे हादसों में।

  • 02 लोगों की मौत: खराब मौसम के कारण हुए सड़क हादसों में।

इस समय कई जिलों में सड़कें, बिजली और पानी की सप्लाई बुरी तरह चरमरा गई है। प्रशासन और राहत टीमें युद्धस्तर पर मलबा हटाने और जरूरी सेवाओं को बहाल करने में जुटी हुई हैं। पिछले 24 घंटों के दौरान राज्य के अलग-अलग हिस्सों में जमकर बादल बरसे। शिमला के जुब्बड़हट्टी में 44 मिमी, मंडी के बलद्वाड़ा में 32 मिमी, सराहन में 27 मिमी और बिलासपुर में 26 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई।

तापमान में उतार-चढ़ाव का दौर जारी 

अजीब बात यह है कि एक तरफ बारिश आफत बनी हुई है, तो दूसरी तरफ दिन के तापमान में 6 डिग्री सेल्सियस तक का उछाल देखा गया है। कुल्लू के भुंतर में अधिकतम तापमान 6.2 डिग्री, मनाली में 5.5 डिग्री, मंडी में 5.2 डिग्री और केलंग में 4.7 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ गया है। वहीं न्यूनतम तापमान में उतार-चढ़ाव का दौर जारी है। मौसम विभाग के रिकॉर्ड के मुताबिक, इस बार जून का महीना बेहद सूखा रहा। 

मौसम विभाग ने जारी की चेतावनी

जून में केवल 64.9 मिलीमीटर बारिश हुई, जो साल 1901 के बाद से अब तक की 44वीं सबसे कम बारिश है (सामान्य से 36% कम)। जून महीने में सबसे ज्यादा 115 मिमी बारिश मंडी में दर्ज की गई थी। लेकिन अब जुलाई की शुरुआत होते ही मानसून रौद्र रूप दिखा रहा है। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने चेतावनी जारी की है कि 5 जुलाई से मानसून और ज्यादा रफ्तार पकड़ेगा। विभाग ने 12 जुलाई तक पूरे प्रदेश में भारी बारिश का 'ऑरेंज और येलो अलर्ट' जारी किया है, जिसे देखते हुए स्थानीय लोगों और पर्यटकों को नदी-नालों और संवेदनशील इलाकों से दूर रहने की सलाह दी गई है।
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