गाइडलाइन की मुख्य बातें:
सरकार और नीतियों की आलोचना पर पूरी पाबंदी: पुलिसकर्मी अपने व्यक्तिगत या आधिकारिक अकाउंट्स से सरकार की किसी भी नीति, फैसले या योजना की आलोचना नहीं कर सकेंगे। इसके अलावा, अपने वरिष्ठ अफसरों और सहकर्मियों के खिलाफ अभद्र या अपमानजनक टिप्पणी करने पर भी पूरी तरह रोक लगा दी गई है।
AI प्लेटफॉर्म्स और संवेदनशील दस्तावेजों को लेकर सख्ती: चैटजीपीटी (ChatGPT) या जैमिनी (Gemini) जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल पर विभाग की गोपनीय या संवेदनशील जानकारी अपलोड करने से साफ मना किया गया है। सरकारी फाइलों के स्कैन दस्तावेज, स्क्रीनशॉट या कोई भी सॉफ्ट कॉपी सोशल मीडिया पर साझा करना सख्त मना है।
- निजी पब्लिसिटी पर ब्रेक: वर्दी में रील बनाना, अपनी व्यक्तिगत ब्रांडिंग करना या विभाग की उपलब्धियों को अपनी व्यक्तिगत सफलता बताकर पेश करने पर रोक रहेगी। पुलिस की उपलब्धियों को पूरे बल (Force) की उपलब्धि के रूप में ही दिखाया जाएगा। बिना पूर्व अनुमति के कोई भी पुलिसकर्मी अपना निजी प्रचार नहीं कर सकेगा।
राजनीतिक तटस्थता: कोई भी जवान या अधिकारी किसी भी स्थिति में राजनीतिक दलों के प्रतीक, झंडे, पोस्टर या चिह्नों का इस्तेमाल अपने सोशल मीडिया प्रोफाइल या पोस्ट में नहीं कर सकेगा।
लोकेशन और जियो-टैगिंग पर पाबंदी: वीवीआईपी सुरक्षा या संवेदनशील ड्यूटी पर तैनात जवान अपनी लाइव लोकेशन शेयर नहीं कर सकेंगे। फोटो या वीडियो पोस्ट करते समय जियो-टैगिंग (Geo-tagging) का उपयोग करने पर भी रोक लगाई गई है, ताकि सुरक्षा से जुड़ी जानकारियां लीक न हों। इसके अलावा, सरकारी सोशल मीडिया हैंडल का इस्तेमाल किसी भी निजी फायदे के लिए नहीं किया जा सकेगा।
पुलिस प्रशासन का मानना है कि इस गाइडलाइन से बल की अनुशासनहीनता पर लगाम लगेगी और सरकारी जानकारियों की गोपनीयता बनी रहेगी।

