Job Fraud Case: छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में युवतियों को नौकरी का लालच देकर गलत गतिविधियों में फंसाने की कोशिश का मामला सामने आया है। एक सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर युवती ने आरोप लगाया है कि उसकी बहन को भी अधिक वेतन वाली नौकरी का झांसा देकर एक संदिग्ध गिरोह ने संपर्क किया था। हालांकि, परिवार की सतर्कता के चलते युवती समय रहते इस जाल में फंसने से बच गई।
मामले के अनुसार, युवतियों से नौकरी के नाम पर फोन के माध्यम से संपर्क किया जा रहा था। आरोप है कि बातचीत के दौरान उनसे बायोडाटा के साथ-साथ कई निजी जानकारियां मांगी जा रही थीं। इनमें लंबाई, शरीर पर टैटू या तिल जैसी व्यक्तिगत पहचान से जुड़ी जानकारी भी शामिल होने की बात सामने आई है। इसके बाद उन्हें अच्छी कमाई और बेहतर अवसरों का लालच देकर आगे बातचीत बढ़ाने की कोशिश की जाती थी।
नौकरी के बहाने निजी जानकारी मांगने का आरोप
सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर परी यादव ने आरोप लगाया कि उसकी बहन से भी इसी तरह संपर्क किया गया था। शुरुआत में उसे आकर्षक नौकरी और ज्यादा कमाई का भरोसा दिलाया गया। बातचीत के दौरान जब उससे व्यक्तिगत और शारीरिक पहचान से जुड़ी जानकारी मांगी गई, तो परिवार को इस पूरे मामले पर शक हुआ। संदेह होने के बाद परिवार ने युवती को आगे बातचीत करने से रोक दिया और संदिग्ध लोगों से संपर्क खत्म कर दिया गया।
नशे के जरिए ब्लैकमेल करने का लगाया आरोप
परी यादव ने दावा किया है कि यह गिरोह युवतियों को अपने जाल में फंसाने के बाद उन्हें नशे की हालत में आपत्तिजनक वीडियो बनाकर ब्लैकमेल कर सकता है। हालांकि, इन गंभीर आरोपों की अभी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो पाई है। मामले की पूरी सच्चाई जांच के बाद ही सामने आ सकेगी। आरोप है कि युवतियों को आकर्षित करने के लिए सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से बड़ी रकम, नोटों के बंडल और आलीशान जीवनशैली दिखाने वाले वीडियो भेजे जा रहे हैं। इन वीडियो के जरिए युवतियों को अधिक कमाई का सपना दिखाकर संपर्क में लाने की कोशिश की जाती है।सतर्कता से बचा परिवार, जांच की मांग
परी यादव के अनुसार, उनकी बहन भी इस नेटवर्क के संपर्क में आ गई थी, लेकिन समय रहते बातचीत में सामने आई संदिग्ध बातों और निजी जानकारी मांगने के तरीके से परिवार सतर्क हो गया। इसके बाद युवती ने आगे कोई संपर्क नहीं किया और वह संभावित खतरे से बच गई। उन्होंने मामले की जांच की मांग करते हुए कहा कि नौकरी के नाम पर युवतियों से संपर्क करने वाले लोगों की पहचान की जानी चाहिए। यदि लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो यह एक गंभीर मामला हो सकता है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क सक्रिय है या नहीं।

