Fake Appointment Letter: छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम में सरकारी नौकरी का झांसा देकर धोखाधड़ी का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। किसी अज्ञात जालसाज ने निगम के महाप्रबंधक (GM) विनोद कुमार वर्मा के डिजिटल दस्तखत स्कैन कर एक फर्जी नियुक्ति पत्र तैयार कर दिया। मामला पकड़ में आने के बाद तेलीबांधा थाना पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संगीन धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पूरी घटना का खुलासा तब हुआ जब 29 अगस्त की रात करीब 9:30 बजे महाप्रबंधक विनोद कुमार वर्मा के वाट्सएप पर एक अनजान नंबर से मैसेज आया।
दस्तखत स्कैन कर फर्जी लेटर पर चिपया
मैसेज के साथ एक जॉइनिंग लेटर की फोटो थी। कुछ ही देर बाद शेखर वर्मा नाम के व्यक्ति ने फोन कर जीएम से पूछा कि क्या यह नियुक्ति पत्र उन्होंने ही जारी किया है? जब महाप्रबंधक ने पत्र देखा तो वह दंग रह गए। पत्र पर उन्हीं के हस्ताक्षर थे, जबकि उन्होंने ऐसा कोई आदेश जारी ही नहीं किया था। जांच करने पर साफ हुआ कि किसी ने उनके पुराने दस्तखत स्कैन करके इस फर्जी लेटर पर चिपका दिए हैं। जालसाज ने बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के कसडोल (हांडापारा) निवासी हेमंत साहू के नाम से यह लेटर तैयार किया था। इसमें दावा किया गया था कि हेमंत को 6 जुलाई 2026 से कसडोल दफ्तर में बतौर 'डाटा एंट्री ऑपरेटर' तैनात किया जाता है।
इस फर्जीवाड़े की पोल दो बड़ी बातों से खुली:
कोई दफ्तर ही नहीं: निगम का कसडोल में कोई दफ्तर संचालित ही नहीं होता।
दो साल से कोई भर्ती नहीं: महाप्रबंधक ने बताया कि बीते दो सालों में निगम की तरफ से डाटा एंट्री ऑपरेटर पद के लिए न तो कोई आवेदन मंगाए गए और न ही कोई भर्ती हुई।
भाषा पूरी तरह आधिकारिक इस्तेमाल की गई
हैरानी की बात यह भी है कि जालसाजी से बनाए गए इस पत्र में कोई डिस्पैच नंबर (पत्र क्रमांक) या तारीख तक दर्ज नहीं थी, लेकिन भाषा पूरी तरह आधिकारिक इस्तेमाल की गई थी ताकि सामने वाले को धोखा दिया जा सके। महाप्रबंधक ने पुलिस को दी शिकायत में कहा कि उनके पद और हस्ताक्षर का गलत इस्तेमाल कर विभाग की साख को बट्टा लगाने की कोशिश की गई है। अंदेशा है कि इसके जरिए किसी से नौकरी के नाम पर मोटी रकम ऐंठने का खेल रचा गया है।
डिजिटल फुटप्रिंट खंगाले जा रहे
तेलीबांधा पुलिस ने 1 सितंबर की रात मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अब BNS की धारा 318(4), 336(3), 338 और 340(2) के तहत जांच आगे बढ़ा रही है। जिस वाट्सएप नंबर से यह लेटर भेजा गया था, उसकी कॉल डिटेल (CDR), आईपी एड्रेस और डिजिटल फुटप्रिंट खंगाले जा रहे हैं। साथ ही हेमंत साहू से भी पूछताछ की जाएगी कि क्या वह इस ठगी का शिकार हुआ है या उसका नाम सिर्फ इस्तेमाल किया गया है।

