उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में पुलिस ने मानव तस्करी के एक गिरोह का खुलासा किया है। आरोप है कि गिरोह के सदस्य छत्तीसगढ़ की बेसहारा और आर्थिक रूप से कमजोर बच्चियों व महिलाओं को पढ़ाई, नौकरी और आर्थिक मदद का भरोसा देकर अपने जाल में फंसाते थे।
इसके बाद उन्हें अलीगढ़ लाकर मोटी रकम में बेच दिया जाता था। टप्पल थाना पुलिस और एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग (एएचटी) की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए पांच आरोपितों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने उनके कब्जे से तीन बच्चियों को भी सुरक्षित रेस्क्यू किया है। गिरफ्तार लोगों में तीन कथित खरीदार भी शामिल हैं। पुलिस के मुताबिक, 7 अगस्त को पीआरवी के जरिए सूचना मिली थी कि एक बच्ची को टप्पल क्षेत्र के मौर गांव में बेच दिया गया है।
सूचना मिलते ही पुलिस ने शुरू की कार्रवाई
सूचना के बाद सीओ खैर अभिषेक कुमार पटेल के नेतृत्व में टप्पल थाना और एएचटी की टीमों ने कार्रवाई शुरू की। ऑपरेशन स्माइल के तहत पुलिस ने बच्ची को बरामद कर लिया। पूछताछ के दौरान पुलिस को मानव तस्करी के पूरे नेटवर्क के बारे में जानकारी मिली। जांच में प्रयागराज के सराय इनायत क्षेत्र के पहाड़ीपुर गांव निवासी बबीता उर्फ चाची का नाम सामने आया। पुलिस के अनुसार, बबीता उर्फ चाची छत्तीसगढ़ की बेसहारा और आर्थिक रूप से कमजोर बच्चियों तथा महिलाओं को पढ़ाई-लिखाई, नौकरी और आर्थिक सहायता दिलाने का भरोसा देकर अपने प्रभाव में लेती थी। इसके बाद उन्हें अलीगढ़ लाया जाता था। जांच में पुलिस को पता चला कि सुखाराम उर्फ सूखा उर्फ महावीर फौजदारा इन बच्चियों को खरीदने के बाद अलीगढ़ और आसपास के इलाकों में मोटी रकम लेकर बेचता था।तीन बच्चियों को सुरक्षित रेस्क्यू किया
मामले में पुलिस ने सुखाराम, बबीता उर्फ चाची, बबलू, ओमपाल सिंह और विनोद को गिरफ्तार किया है। संयुक्त टीम ने कार्रवाई के दौरान तीन बच्चियों को गिरोह के चंगुल से सुरक्षित बाहर निकाला। पुलिस अब गिरोह से जुड़े अन्य लोगों और इस नेटवर्क में शामिल संभावित खरीदारों के बारे में भी जानकारी जुटा रही है। पुलिस ने टप्पल थाने में मुकदमा अपराध संख्या 466/2026 दर्ज किया है। आरोपितों के खिलाफ बीएनएस की धारा 143, 64, 65(1), पॉक्सो एक्ट की धारा 3/4(2) और बाल विवाह निषेध अधिनियम की धारा 9 के तहत कार्रवाई की गई है। पुलिस मामले की आगे की जांच कर रही है और गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी खंगाली जा रही है।


