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Raipur Central Jail: उगाही और मारपीट के गंभीर आरोप, सोशल मीडिया पर कैदियों के वीडियो वायरल
Raipur Central Jail: रायपुर सेंट्रल जेल से जुड़े कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, जिनमें कैदियों ने जेल प्रहरियों पर रिश्वत लेने, मारपीट करने और मुलाकात में बाधा डालने जैसे आरोप लगाए हैं। कैदियों ने बैरक बदलने, मेडिकल सुविधा और मुलाकात के नाम पर पैसे मांगने का दावा किया है। हालांकि, वायरल वीडियो और आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। जेल अधीक्षक योगेश क्षत्री ने वीडियो की सत्यता पर सवाल उठाते हुए जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होने की बात कही है।
Raipur Central Jail: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में कानून-व्यवस्था और जेल प्रशासन की साख पर गंभीर सवाल खड़े करने वाली खबरें लगातार सामने आ रही हैं। एक तरफ जहां बीआर आंबेडकर अस्पताल में सीजीपीएससी भर्ती घोटाले के
आरोपी टामन सिंह सोनवानी को कथित तौर पर वीआईपी सुविधाएं दिए जाने का वीडियो सामने आने से हंगामा मचा हुआ है, वहीं दूसरी ओर अब रायपुर सेंट्रल जेल के भीतर का एक और बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कुछ वीडियो में कैदियों ने जेल प्रहरियों पर खुलेआम वसूली, मारपीट और परिजनों से मिलने में अड़ंगा डालने जैसे संगीन आरोप लगाए हैं।
सुविधाओं के नाम पर 'रेट लिस्ट' और ऑनलाइन वसूली
वायरल वीडियो में एक कैदी ने दावा किया है कि जेल के भीतर कम भीड़भाड़ वाले बैरक या मेडिकल वार्ड में ट्रांसफर करने के बदले 15 से 20 हजार रुपये तक की रिश्वत मांगी जाती है। सिर्फ इतना ही नहीं, अपने ही वकील और परिजनों से मुलाकात करने की इजाजत देने के नाम पर भी 5 से 7 हजार रुपये ऐंठे जा रहे हैं। कैदी का आरोप है कि इस वसूली के लिए बाकायदा
ऑनलाइन पेमेंट कराया जाता है, जिसके कुछ कथित स्क्रीनशॉट भी इंटरनेट पर तैर रहे हैं। कैदियों के मुताबिक, जो पैसे देने से इनकार करता है, उसके साथ बैरक के अंदर बेरहमी से मारपीट की जाती है।
चोट के निशान दिखाकर लगाए फ्रैक्चर के आरोप
एक अन्य वीडियो में खुद को स्टुपेंड-3 बैरक का बताने वाले कैदी ने अपने शरीर, हाथों और पैरों पर बने चोट के गहरे निशान दिखाए हैं। कैदी का कहना है कि रिश्वत देने से मना करने पर उसके साथ इस कदर मारपीट की गई कि उसके हाथ-पैर में फ्रैक्चर हो गया। उसने आरोप लगाया कि जेल में बड़े और वीआईपी कैदियों को हर तरह की सुविधाएं और बेहतर इलाज मुहैय्या कराया जाता है, जबकि आम कैदियों को इलाज तक के लिए तरसाया जाता है।
20 सालों से एक ही जगह जमे कर्मचारियों पर उठे सवाल
वीडियो में कैदी ने विशेष रूप से चार जेल प्रहरियों—मन्नत पुरैना, टेकराम, मिथिलेश और राजू साहू के नामों का खुलासा किया है। आरोप है कि इनमें से कुछ कर्मचारी पिछले 20 सालों से एक ही जगह पर टिके हुए हैं। लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थापना को लेकर भी जेल प्रशासन के रवैये पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।
जेल अधीक्षक की सफाई: 'वीडियो की सत्यता प्रमाणित नहीं'
मामला गरमाने के बाद रायपुर सेंट्रल जेल के अधीक्षक योगेश क्षत्री का बयान भी सामने आया है। उन्होंने वीडियो की प्रामाणिकता से साफ इनकार करते हुए कहा:
"वायरल हो रहा वीडियो वास्तव में जेल के अंदर का है भी या नहीं, इसकी अभी पुष्टि नहीं हुई है। जेल में हजारों कैदी हैं, वे कब और कहां से वीडियो बना रहे हैं, यह कहना मुश्किल है। जेल में 200 से अधिक स्टाफ तैनात हैं, इसलिए बिना जांच के किसी के बारे में टिप्पणी नहीं की जा सकती।"
फिलहाल सोशल मीडिया पर वायरल इन वीडियो और ऑनलाइन ट्रांसफर के स्क्रीनशॉट की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन इन सनसनीखेज खुलासों ने प्रदेश के जेल महकमे में हड़कंप जरूर मचा दिया है।