Raipur Breaking News: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में कांग्रेस नेता आनंद कुकरेजा से 25 करोड़ रुपये की भारी-भरकम रंगदारी मांगने के हाई-प्रोफाइल मामले में नया मोड़ आ गया है। मामले में आरोपी शोएब ढेबर को पुलिस एक बार फिर गिरफ्तार करने जा रही है। रविवार को रिमांड कोर्ट से जमानत मिलने के बाद पुलिस ने तुरंत मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) की अदालत का दरवाजा खटखटाया था और दोबारा हिरासत में लेने की अनुमति मांगी थी। पुलिस की ओर से पेश की गई मजबूत दलीलों और तथ्यों को ध्यान में रखते हुए सीजेएम कोर्ट ने शोएब की दोबारा गिरफ्तारी की मंजूरी दे दी है।
धमकी, लॉरेंस बिश्नोई गैंग का नाम और 25 करोड़ की मांग
पूरा मामला कांग्रेस नेता आनंद कुकरेजा से जुड़ी एक गंभीर शिकायत से शुरू हुआ था। कुकरेजा ने पुलिस को बताया था कि उनसे 25 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगी गई है और रकम न देने की सूरत में उन्हें व उनके पूरे परिवार को जान से मारने की धमकी दी गई। फोन करने वाले ने खुद को कुख्यात लॉरेंस बिश्नोई और अमन साव गैंग से जुड़ा हुआ बताया था। शिकायत मिलते ही हरकत में आई पुलिस ने जब तकनीकी जांच शुरू की, तो सबसे पहले जांजगीर-चांपा के एक युवक की संदिग्ध भूमिका सामने आई। उस युवक से कड़ाई से पूछताछ की गई, जिसके तार सीधे शोएब ढेबर से जुड़े पाए गए। इसके बाद पुलिस ने शोएब को उठाकर पूछताछ की थी।
अब रिमांड लेकर खुलवाएगी साजिश के सारे राज
शोएब ढेबर को दोबारा शिकंजे में लेने के बाद पुलिस अब उसे पुलिस रिमांड पर लेने की तैयारी में है। जांच टीम का मुख्य मकसद यह पता लगाना है कि कांग्रेस नेता को धमकाने की इस बड़ी साजिश के पीछे और कौन-कौन से चेहरे शामिल हैं। साथ ही, पुलिस यह भी खंगाल रही है कि रंगदारी वसूलने के लिए लॉरेंस बिश्नोई और अमन साव गैंग का नाम किस तरह और किसके इशारे पर इस्तेमाल किया गया था। पुलिस के मुताबिक, इस केस में कॉल डिटेल्स, इस्तेमाल किए गए मोबाइल फोन और आरोपियों के बीच की कड़ियों की तकनीकी जांच पहले ही की जा चुकी है।
50 करोड़ की पुरानी रंगदारी से भी जुड़ रहे तार
मामला सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं है। पुलिस इस पूरी घटना को पूर्व महापौर एजाज ढेबर से जुड़े एक पुराने मामले से भी जोड़कर देख रही है। एजाज ढेबर को भी लॉरेंस बिश्नोई और अमन साव गैंग के नाम पर 50 करोड़ रुपये की धमकी मिली थी। जांच एजेंसियां अब इस बात की तहकीकात में जुटी हैं कि क्या इन दोनों मामलों के पीछे एक ही नेटवर्क काम कर रहा है या फिर गैंग के नाम पर शहर में कोई बड़ा सिंडिकेट सक्रिय है।

